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धरमजयगढ़ में हाथियों का आतंक, 124 गजराजों के दल ने 6 मकान और 83 किसानों की फसलें रौंदी

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में इन दिनों जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। मानसून के मौसम में हाथियों के गांवों की ओर आने की घटनाएं बढ़ गई हैं। वन विभाग के अनुसार, वर्तमान में क्षेत्र में कुल 124 हाथियों का दल अलग-अलग इलाकों में विचरण कर रहा है।

बीते तीन दिनों के दौरान हाथियों ने कई गांवों में पहुंचकर भारी नुकसान पहुंचाया है। हाथियों के हमले से 6 मकान, एक झोपड़ी, एक अहाता और एक ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा हाथियों ने खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 83 किसानों की फसलें बर्बाद होने की जानकारी सामने आई है। वन विभाग नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।

वन विभाग के मुताबिक धरमजयगढ़ वन मंडल में मौजूद हाथियों में 35 नर, 57 मादा और 32 शावक शामिल हैं। सबसे बड़ा दल लैलूंगा रेंज क्षेत्र में सक्रिय है, जहां करीब 51 हाथी तीन अलग-अलग बीटों में घूम रहे हैं। इसके अलावा कापू रेंज में 29, बोरो रेंज में 23, धरमजयगढ़ रेंज में 15, छाल रेंज में 5 और बाकारूमा क्षेत्र में 1 हाथी मौजूद है।

बारिश के मौसम में धान सहित अन्य फसलें खेतों में तैयार होने लगी हैं। भोजन और पानी की तलाश में हाथी जंगल से निकलकर गांवों और खेतों की ओर पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ घरों और अन्य संपत्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार मौजूदगी से गांवों में डर का माहौल बना हुआ है। लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने और खेतों में जाने से भी बच रहे हैं। किसानों को अपनी फसलों और जान-माल की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।

स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। वनकर्मी और हाथी मित्र दल गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही लोगों को सतर्क रहने और हाथियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात में अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाएं। यदि किसी स्थान पर हाथियों का दल दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें। विभाग का कहना है कि प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और नुकसान का सर्वे पूरा होने के बाद प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।


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