बस्तर के 92 गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा, छत्तीसगढ़ में 11 से 15 अगस्त तक विशेष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान

बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की तैयारी, 11 अगस्त से शुरू होगा हर घर तिरंगा अभियान
रायपुर। स्वतंत्रता दिवस 2026 को लेकर छत्तीसगढ़ में इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को खास तौर पर बस्तर के उन इलाकों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है, जहां लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के कारण राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन आसान नहीं रहा। राज्य में 11 से 15 अगस्त तक अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान लोगों को घरों और सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अभियान के तहत बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की तैयारी है। इन गांवों में बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिले के क्षेत्र शामिल हैं। सरकार और भाजपा संगठन इस पहल को केवल स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्रों में शांति, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाने के अभियान के रूप में भी देख रहे हैं।
तीन जिलों के 92 गांवों पर रहेगा विशेष ध्यान
अभियान में बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांवों को शामिल किया गया है। इन इलाकों में लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों का प्रभाव रहा है। ऐसे क्षेत्रों में पहली बार तिरंगा फहराने की तैयारी को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों में लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश के प्रति विश्वास को मजबूत करना है। इसके जरिए बस्तर की पहचान को हिंसा और माओवादी गतिविधियों से अलग करते हुए विकास, शांति और सामाजिक भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व माओवादी भी थामेंगे तिरंगा
इस अभियान में आत्मसमर्पण कर चुके 2 हजार से अधिक पूर्व माओवादी भी हिस्सा लेंगे। वे अलग-अलग स्थानों पर आयोजित तिरंगा यात्राओं में शामिल होकर राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश देंगे।
बस्तर में माओवादी विरोधी अभियानों के दौरान शहीद हुए जवानों के परिवारों को भी कार्यक्रमों में सम्मानित किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं और युवा मोर्चा के सदस्य शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें तिरंगा भेंट करने की पहल कर रहे हैं।
शहीद जवानों के नाम पर होंगे कई स्थान
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर संभाग के 500 से अधिक स्कूलों, प्रमुख चौराहों और सामुदायिक भवनों का नामकरण माओवादी विरोधी अभियानों में जान गंवाने वाले जवानों के नाम पर करने की योजना है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इस पहल को बलिदानी जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले जवानों की स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
रायपुर से शुरू होगी तिरंगा यात्रा
छत्तीसगढ़ में अभियान की शुरुआत 10 अगस्त को रायपुर के मरीन ड्राइव से प्रस्तावित है। सुबह 10 बजे आयोजित होने वाली तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री, मंत्री, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट, पूर्व सैनिक, खिलाड़ी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई जाएगी। पारंपरिक वेशभूषा के साथ स्थानीय वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति के जरिए राज्य की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया जाएगा।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भी अभियान को विस्तार दिया जाएगा। 450 से ज्यादा भाजपा मंडल इकाइयों के साथ ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और विकासखंड मुख्यालयों में तिरंगा यात्राएं तथा अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को जोड़ा जाएगा
अभियान को केवल जमीनी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी लोगों को अभियान से जोड़ने की तैयारी है। नागरिकों से घर, कार्यालय, दुकान और अन्य संस्थानों पर तिरंगा फहराने तथा उसकी तस्वीरें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने की अपील की जाएगी।
बस्तर में पहली बार तिरंगा फहराने की पहल पर जोर
इस वर्ष अभियान में बस्तर के उन गांवों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जहां माओवादी हिंसा के कारण लंबे समय तक राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन में बाधाएं रही हैं। ऐसे गांवों में तिरंगा फहराने की पहल के जरिए प्रशासन और सरकार राष्ट्रीय एकता, शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मौजूदगी का संदेश देना चाहती है।
92 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने और हजारों आत्मसमर्पित पूर्व माओवादियों के तिरंगा यात्रा में शामिल होने से इस वर्ष का ‘हर घर तिरंगा’ अभियान बस्तर के लिए विशेष महत्व रखता है।












