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बलौदाबाजार में ड्रोन से खेती की नई शुरुआत, 40 हेक्टेयर में खरपतवार नाशक छिड़काव

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में किसान अब आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को अधिक लाभदायक और आसान बना रहे हैं। विकासखंड भाटापारा के ग्राम पाटन, धौरभठा और खोलवा के किसानों ने ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए करीब 40 हेक्टेयर कृषि भूमि में खरपतवार नाशक का छिड़काव कर आधुनिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

पारंपरिक तरीके से इतने बड़े क्षेत्र में खरपतवार नाशक का छिड़काव करने में 10 से 15 दिन तक का समय लग जाता था। वहीं ड्रोन तकनीक की मदद से यह कार्य कुछ ही घंटों में पूरा हो गया। इससे किसानों का समय बचा, श्रम की आवश्यकता कम हुई और खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई।

ग्राम धौरभठा के किसान आलोक जायसवाल और ग्राम खोलवा के कृषक गुड्डू चांडक ने बताया कि पहले केवल 2 से 3 एकड़ क्षेत्र में दवा छिड़कने के लिए दो मजदूरों को पूरा दिन काम करना पड़ता था। अब ड्रोन की सहायता से 40 हेक्टेयर क्षेत्र में एक ही दिन में समान रूप से छिड़काव संभव हो गया। इससे पानी की खपत भी कम हुई और किसानों को पीठ पर दवा की टंकी उठाकर खेतों में काम करने की परेशानी से भी राहत मिली।

यह अभियान कृषि विभाग और स्थानीय कृषि तकनीक सेवा प्रदाताओं के सहयोग से संचालित किया गया। ड्रोन ने निर्धारित ऊंचाई से पूरे खेत में समान रूप से खरपतवार नाशक का छिड़काव किया, जिससे दवा की बर्बादी कम हुई और फसल पर दवा का प्रभाव अधिक प्रभावी रहा। विभाग के अनुसार, मैनुअल छिड़काव की तुलना में इस तकनीक से लगभग 80 प्रतिशत समय की बचत हुई है। साथ ही मजदूरी खर्च और दवा की खपत भी कम हुई तथा खरपतवार नियंत्रण की गुणवत्ता बेहतर हुई।

जिला प्रशासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इनमें ईफको कंपनी के चार ड्रोन भी शामिल हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था से छोटे और सीमांत किसानों को भी कम शुल्क पर ड्रोन सेवा उपलब्ध हो रही है, जिससे आधुनिक कृषि तकनीक का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच रहा है।

भाटापारा क्षेत्र में धान और दलहन की फसलों में ड्रोन के माध्यम से खरपतवार नियंत्रण की यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पाटन, धौरभठा और खोलवा के किसान इस प्रयोग के परिणामों से संतुष्ट हैं और आगामी फसल सीजन में अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कराने की योजना बना रहे हैं। यह पहल कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और स्मार्ट खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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