भोजशाला की वाग्देवी प्रतिमा की वापसी की कोशिश तेज……….

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से लगभग एक सदी पहले ब्रिटेन ले जाई गई 11वीं शताब्दी की देवी वाग्देवी की संगमरमर की प्रतिमा को स्वदेश लाने के प्रयासों में तेजी आ गई है। केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध और न्यायालय के निर्देशों के बाद ब्रिटिश संग्रहालय के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। सरकार को उम्मीद है कि बीते वर्षों में विदेशों से सैकड़ों प्राचीन कलाकृतियां वापस लाने की सफलता के बाद यह महत्वपूर्ण प्रतिमा भी भारत लौट सकेगी।
भोपाल में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों की बैठक में सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी प्रमुख एजेंडे में शामिल है। भारत इस मंच का उपयोग उन मूर्तियों, शिल्पों और ऐतिहासिक धरोहरों को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से कर रहा है, जिन्हें औपनिवेशिक काल के दौरान चोरी, तस्करी या अन्य माध्यमों से विदेश पहुंचाया गया था।
धार की भोजशाला से जुड़ी देवी वाग्देवी की प्रतिमा मध्य प्रदेश के लिए केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का भी महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इसकी वापसी को लेकर प्रदेश में लंबे समय से मांग उठती रही है।
केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार से औपचारिक अनुरोध प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार ने राजनयिक माध्यमों और संग्रहालय स्तर पर लगातार पहल शुरू की। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय ब्रिटिश संग्रहालय सहित संबंधित संस्थाओं के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए है ताकि प्रतिमा की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।
भारत पिछले कुछ वर्षों से विदेशों में मौजूद अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। इसी क्रम में कई देशों से सैकड़ों दुर्लभ मूर्तियां और ऐतिहासिक कलाकृतियां भारत लौट चुकी हैं। सरकार को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राजनयिक प्रयासों के जरिए भोजशाला की वाग्देवी प्रतिमा की वापसी भी संभव हो सकेगी।
यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों की पुनर्प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।












