HealthInternationalLatestNational

सुपर अल नीनो का बढ़ सकता है कहर, 6 महीने में 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान; भारत भी प्रभावित

शिकागो विश्वविद्यालय के अध्ययन में भारत में 15,800 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों का अनुमान, विशेषज्ञों ने हीट एक्शन प्लान मजबूत करने पर दिया जोर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुपर अल नीनो की संभावित स्थिति को लेकर एक नए अध्ययन ने आने वाले महीनों में अत्यधिक गर्मी और उससे जुड़ी मौतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य वर्षों की तुलना में सुपर अल नीनो के प्रभाव के चलते अगले छह महीनों में दुनिया भर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें हो सकती हैं। भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है।

मौसमी पूर्वानुमान और मृत्यु दर के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन

बुधवार को जारी अध्ययन की सह-लेखक एमिली ग्रोवर कोपेक के अनुसार, ये अनुमान मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान तथा मृत्यु दर के बीच संबंध के विश्लेषण पर आधारित हैं। इसके लिए यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के प्रमुख मौसमी पूर्वानुमानों में से एक का इस्तेमाल किया गया है।

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 1996 से 2025 तक के तापमान और मृत्यु दर से जुड़े आंकड़ों को आधार बनाया। इसका उद्देश्य मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे अनुमान तैयार करना है, जिससे सरकारों और प्रशासन को समय रहते तैयारी करने में मदद मिल सके।

सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है तापमान

रिपोर्ट के अनुसार, सुपर अल नीनो के प्रभाव से आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर सतह का तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। अध्ययन में इस तापमान वृद्धि के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को अगले छह महीनों में होने वाली अतिरिक्त मौतों के अनुमान से जोड़ा गया है।

एमिली ग्रोवर कोपेक ने बताया कि जलवायु मॉडल के आधार पर भविष्य में होने वाली मौतों का अनुमान लगाने के लिए पहले भी इसी तरह की पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, मौजूदा अध्ययन में इस तरीके को कम अवधि वाले मौसमी पूर्वानुमानों के साथ इस्तेमाल किया गया है।

संसाधनों की तैयारी और समय पर कार्रवाई पर जोर

कोपेक के अनुसार, ऐसे पूर्वानुमानों का उद्देश्य यह समझने में मदद करना है कि संसाधनों का इस्तेमाल कहां किया जाए और लोगों की जान बचाने के लिए कब समय रहते कदम उठाए जाएं।

भारत में नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC) की क्लाइमेट रेजिलिएंस एंड हेल्थ टीम के प्रमुख अभियांत तिवारी ने इस तरह के पूर्वानुमान को समय रहते चेतावनी देने वाला उपयोगी साधन बताया। उन्होंने हीट एक्शन प्लान और मजबूत संस्थागत व्यवस्था के जरिए तैयारी बढ़ाने तथा कमजोर समुदायों की सुरक्षा पर जोर दिया।

बुजुर्गों और खुले में काम करने वालों को अधिक खतरा

एम्स के फैकल्टी सदस्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. हर्षल रमेश साल्वे ने भी सभी स्तरों पर हीट एक्शन प्लान लागू करने जैसी रोकथाम की रणनीतियों पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के दौरान बुजुर्गों, पहले से बीमार लोगों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों जैसे संवेदनशील वर्गों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

हालांकि, अध्ययन में दिए गए 4.51 लाख और 15,800 मौतों के आंकड़े मॉडल आधारित अनुमान हैं, वास्तविक मौतों की निश्चित भविष्यवाणी नहीं। वास्तविक प्रभाव मौसम की परिस्थितियों और अल नीनो की तीव्रता सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button