रायपुर में 24 घंटे में 132 अपहरण की एफआईआर, मचा हड़कंप; जानिए क्या है पूरा मामला

एक दिन में 132 अपहरण केस से चौंका रायपुर, असल कहानी सामने आई तो सामने आया बड़ा सच
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक दिन के भीतर 132 अपहरण के मामले दर्ज होने की खबर ने पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों तक हलचल मचा दी। 24 घंटे में 132 अपहरण की एफआईआर दर्ज होने का आंकड़ा सामने आते ही सवाल उठने लगा कि आखिर राजधानी में अचानक इतने बड़े पैमाने पर अपहरण कैसे हो गए? क्या रायपुर में अपराध का ग्राफ अचानक इतना बढ़ गया है?
लेकिन इस पूरे मामले की असली कहानी कुछ अलग है।
दरअसल, ये 132 मामले ऐसे नहीं हैं, जिनमें 24 घंटे के अंदर 132 लोगों को अगवा किया गया हो। पुलिस ने पहले से लापता लोगों के मामलों को अब अपहरण की धाराओं में दर्ज करना शुरू किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने उन लोगों की तलाश को गंभीरता से आगे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है, जो मई-जून में लापता हुए थे और अब तक नहीं मिले हैं।
32 थानों में दर्ज हुईं 132 एफआईआर
रायपुर में यह कार्रवाई बड़े स्तर पर की गई है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर कुल 32 थानों में 132 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के 92 मामले हैं, जबकि ग्रामीण रायपुर में 40 मामले दर्ज किए गए हैं।
यानी आंकड़ा देखने पर भले ही ऐसा लगे कि रायपुर में एक दिन में 132 लोगों का अपहरण हो गया, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये पुराने लापता लोगों से जुड़े मामले हैं, जिन्हें अब अपहरण के रूप में दर्ज करके उनकी तलाश को प्राथमिकता दी जा रही है।
सबसे ज्यादा मामले इन थानों में
इन मामलों में मुजगहन थाना सबसे आगे रहा, जहां 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके बाद गुढियारी में 13, खमतराई में 11, उरला में 10 और टिकरापारा में 9 मामले दर्ज हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो खरोरा में 7, तिल्दा-नेवरा में 5 और धरसींवा में 4 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा अन्य थानों में भी लापता लोगों से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं।
आखिर अचानक अपहरण की धाराओं में केस क्यों दर्ज हुए?
अब सवाल यह है कि जिन लोगों की पहले गुम इंसान के रूप में शिकायत दर्ज थी, उनके मामले को अब अपहरण की एफआईआर में क्यों बदला जा रहा है?
पुलिस के मुताबिक पहले 18 साल से कम उम्र के बच्चे या बच्चियां लापता होने पर अपहरण का मामला दर्ज किया जाता था। वहीं, 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लापता होने पर सामान्य तौर पर गुम इंसान की शिकायत दर्ज होती थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लापता लोगों की तलाश को और गंभीर बनाने के लिए ऐसे मामलों में भी अपहरण का प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। इसका मकसद यह है कि मामला सिर्फ गुमशुदगी की शिकायत बनकर फाइलों में न रह जाए, बल्कि पुलिस सक्रिय रूप से व्यक्ति की तलाश करे।
बच्चों के मामले में और ज्यादा गंभीरता
लापता बच्चों के मामलों को लेकर भी पुलिस को विशेष रूप से गंभीर रहने के निर्देश हैं। ऐसे मामलों में शुरुआत से ही अपहरण या मानव तस्करी जैसी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच करने पर जोर दिया गया है।
यानी बच्चा या बच्ची लापता होने के बाद पुलिस को सिर्फ शिकायत दर्ज करके इंतजार नहीं करना है, बल्कि शुरुआती घंटों से ही उसकी तलाश और संभावित घटनाक्रम की जांच करनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी व्यक्ति के लापता होने के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
छत्तीसगढ़ में हजारों लोग अब भी लापता
रायपुर के 132 मामलों के पीछे पूरे छत्तीसगढ़ में लापता लोगों की एक बड़ी तस्वीर भी दिखाई देती है।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक प्रदेश में 1,03,766 लोग लापता हुए। इनमें से पुलिस ने 87,035 लोगों को तलाश लिया, लेकिन 16,731 लोग अब भी नहीं मिल पाए हैं।
यही वजह है कि अब लापता लोगों की तलाश को लेकर पुलिस पर ज्यादा प्रभावी कार्रवाई का दबाव है।
ऑपरेशन मुस्कान और तलाश से मिली बड़ी सफलता
लापता बच्चों और लोगों को खोजने के लिए पुलिस की ओर से ऑपरेशन मुस्कान और ऑपरेशन तलाश जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक अप्रैल में ही ऐसे अभियानों के दौरान 4,056 लोगों को खोजा गया। इनमें 545 बच्चे और 3,511 महिला-पुरुष शामिल थे।
बरामद किए गए बच्चों में 75 लड़के और 470 लड़कियां थीं। वहीं, बरामद महिला-पुरुषों में 972 पुरुष और 2,539 महिलाएं शामिल थीं।
रायपुर पुलिस अब नए सिरे से तलाश में जुटी
132 मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस इन मामलों की जांच नए सिरे से आगे बढ़ाएगी। पुलिस टीमों को लापता लोगों के बारे में उपलब्ध जानकारी जुटाने, उनके संपर्कों और संभावित ठिकानों की जांच करने और जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों तक तलाश बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यही है कि लंबे समय से लापता लोगों के मामले अब सिर्फ गुमशुदगी के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे।
आंकड़े ने चौंकाया, लेकिन कहानी कुछ और निकली
रायपुर में 24 घंटे के भीतर 132 अपहरण की एफआईआर दर्ज होने का आंकड़ा निश्चित तौर पर चौंकाने वाला है। पहली नजर में यह राजधानी की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। लेकिन जांच करने पर सामने आया कि ये 132 नए अपहरण नहीं हैं।
ये उन लोगों के मामले हैं, जो पहले से लापता हैं और जिनकी तलाश को अब अपहरण के मामलों के रूप में गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ एफआईआर दर्ज करने की नहीं, बल्कि इन सभी लापता लोगों को तलाशकर उनके परिवारों तक वापस पहुंचाने की है। आने वाले दिनों में इन मामलों की जांच और पुलिस की कार्रवाई से पता चलेगा कि कितने लोग कहां हैं और उनके लापता होने के पीछे आखिर क्या वजह रही।












