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बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, 11 जिले सूखे की कगार पर; सीएम का काफिला भी रोका

मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। कम बारिश के चलते प्रदेश के 11 जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं। इनमें मालवा के प्रमुख जिले इंदौर और उज्जैन भी शामिल हैं। सबसे गंभीर स्थिति आलीराजपुर की बताई जा रही है, जहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।

बारिश की कमी का असर सिर्फ खरीफ की फसलों पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि आने वाले रबी सीजन की खेती, सिंचाई और कई इलाकों में पेयजल व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

11 जिलों में बिगड़े हालात

बारिश के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 11 जिले ऐसे हैं जहां बारिश की कमी चिंता का कारण बनी हुई है। इनमें इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर सीधे तौर पर सूखे के पैमाने के करीब बताए जा रहे हैं।

वहीं शाजापुर और पांढुर्णा में सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत का ही अंतर बताया गया है। हालांकि इन इलाकों में भी किसानों की चिंता कम नहीं हुई है, क्योंकि मानसून के दौरान बारिश का असमान वितरण खेती पर असर डाल रहा है।

आलीराजपुर में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

आलीराजपुर की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। यहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की कमी का सीधा असर खेतों पर दिखाई दे रहा है।

किसानों के सामने खरीफ की फसल को बचाने के साथ-साथ आने वाली रबी फसल की तैयारी की चुनौती भी खड़ी हो गई है। यदि जलाशयों और जमीन में पर्याप्त पानी नहीं बचा तो रबी सीजन में सिंचाई का संकट और गहरा सकता है।

पांढुर्णा में किसानों ने सीएम का काफिला रोका

बारिश की कमी को लेकर किसानों में नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 4 अक्टूबर को पांढुर्णा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले को किसानों ने रोक लिया।

किसानों की परेशानी और कम बारिश से पैदा हुए हालात इस विरोध के पीछे बड़ी वजह माने जा रहे हैं। बारिश की कमी के कारण फसलों पर पड़ रहे असर को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

खरीफ के बाद रबी की भी चिंता

कम बारिश का असर मौजूदा खरीफ फसलों पर तो पड़ ही रहा है, लेकिन किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल अब रबी सीजन को लेकर है। गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों के लिए पर्याप्त नमी और सिंचाई की जरूरत होती है।

अगर जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं रहा तो आने वाले महीनों में किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर भी प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ सकती है।

अब राहत की उम्मीद बारिश से

प्रदेश के इन इलाकों में किसानों की निगाहें अब आगे होने वाली बारिश पर टिकी हैं। यदि पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसलों के नुकसान के साथ जल संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

फिलहाल 11 जिलों में कम बारिश ने प्रशासन और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौसम की अगली करवट इन सूखाग्रस्त इलाकों को राहत दे पाएगी या किसानों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

 

 

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