अस्पताल के महिला शौचालय में घुसा तेंदुआ, महिला पर किया हमला; 5 घंटे तक मचा हड़कंप, फिर ऐसे पकड़ा गया

कवर्धा में अस्पताल के अंदर तेंदुए की दस्तक, महिला शौचालय में छिपा था खूंखार जानवर; डार्ट लगते ही आया काबू
छत्तीसगढ़ के कवर्धा शहर में सोमवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहर के बीचोंबीच स्थित स्नेहा हॉस्पिटल के महिला शौचालय में अचानक तेंदुआ घुस गया। अस्पताल में मौजूद लोगों को जैसे ही इसकी भनक लगी, अफरा-तफरी मच गई। तेंदुआ इतना करीब था कि उसके हमले में एक महिला घायल भी हो गई।
घटना की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में दहशत का माहौल बन गया। मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित स्थान पर किया गया और अस्पताल के आसपास लोगों की आवाजाही रोक दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया।
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि तेंदुआ अस्पताल के अंदर आखिर किस जगह छिपा हुआ है। वन विभाग की टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया। फुटेज में अस्पताल परिसर में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारी शुरू की गई।
महिला शौचालय तक कैसे पहुंचा तेंदुआ?
सोमवार सुबह अस्पताल में सामान्य तरीके से गतिविधियां चल रही थीं। इसी दौरान महिला शौचालय में तेंदुआ दिखाई दिया। अचानक सामने आए जंगली जानवर को देखकर वहां मौजूद महिला घबरा गई और इसी दौरान तेंदुए के हमले में उसे चोटें आईं।
घायल महिला को तत्काल अस्पताल में उपचार दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमानुसार महिला को मुआवजा भी दिया जाएगा।
तेंदुए के अस्पताल के भीतर होने की खबर कुछ ही देर में आसपास के इलाके में फैल गई। इसके बाद अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी। लोगों में तेंदुए को देखने की उत्सुकता भी थी, लेकिन वन विभाग और पुलिस ने किसी को भी अस्पताल के नजदीक जाने नहीं दिया।
पांच घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना वन विभाग को सुबह करीब 10 बजे मिली। वन मंडल अधिकारी निखिल अग्रवाल के नेतृत्व में टीम तत्काल स्नेहा हॉस्पिटल पहुंची।
अस्पताल परिसर की तलाशी और सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद वन विभाग ने तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की रणनीति बनाई। चूंकि अस्पताल शहर के बीचोंबीच था और आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, इसलिए जरा सी चूक भी खतरनाक साबित हो सकती थी।
तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ने के लिए बिलासपुर से विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम भी बुलाई गई। टीम ने अस्पताल की स्थिति, तेंदुए के छिपने की जगह और उसकी गतिविधियों का आकलन किया।
इसके बाद कई घंटे तक तेंदुए को सुरक्षित तरीके से काबू में लेने की कोशिश चलती रही।
2:55 बजे डार्ट लगते ही काबू में आया तेंदुआ
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोपहर करीब 2:55 बजे विशेषज्ञों को बड़ी सफलता मिली। सही मौका देखकर तेंदुए को ट्रैंक्विलाइजर डार्ट लगाया गया।
डार्ट लगने के बाद तेंदुआ धीरे-धीरे बेहोश हुआ और टीम ने तुरंत उसे सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे सावधानी से पिंजरे में रखा गया।
करीब पांच घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद आखिरकार अस्पताल में मौजूद लोगों और आसपास के रहवासियों ने राहत की सांस ली।
छह साल का नर तेंदुआ, लालपुर नर्सरी ले जाया गया
वन विभाग ने रेस्क्यू किए गए तेंदुए की पहचान नर तेंदुए के रूप में की है। उसकी उम्र करीब छह वर्ष बताई गई है।
तेंदुए को रेस्क्यू के बाद लालपुर नर्सरी ले जाया गया। वहां पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। उसकी स्थिति की जांच करने के साथ आवश्यक उपचार भी किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वन विभाग ने तेंदुए को उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ने का फैसला किया।
शाम 6 बजे भोरमदेव अभयारण्य में छोड़ा गया
लालपुर में स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार के बाद शाम करीब 6 बजे तेंदुए को भोरमदेव अभयारण्य में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
इस तरह सुबह अस्पताल के महिला शौचालय से शुरू हुई तेंदुए की मौजूदगी की दहशत शाम तक सुरक्षित रेस्क्यू और जंगल में वापसी के साथ खत्म हुई।
जंगल से शहर तक कैसे पहुंचा तेंदुआ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर करीब छह साल का यह नर तेंदुआ जंगल से निकलकर कवर्धा शहर के बीचोंबीच स्थित अस्पताल तक कैसे पहुंच गया।
क्या वह भटकते हुए शहर में आया था? क्या भोजन या पानी की तलाश में उसने शहर का रुख किया? या फिर आसपास के जंगल से निकलकर वह किसी रास्ते से अस्पताल परिसर तक पहुंचा?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है। हालांकि वन विभाग की प्राथमिकता तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर उसके प्राकृतिक रहवास में वापस पहुंचाना थी, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
वन विभाग ने लोगों से की खास अपील
घटना के बाद वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसके पास जाने की कोशिश न करें और न ही भीड़ लगाकर उसे देखने का प्रयास करें।
वन्यजीव दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों के करीब जाना उनके साथ-साथ इंसानों के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
कवर्धा की इस घटना में राहत की बात यह रही कि तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया और उसे वापस जंगल में छोड़ दिया गया। हालांकि अस्पताल जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर तेंदुए के पहुंचने की घटना ने शहर में वन्यजीवों और इंसानी आबादी के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर नई चिंता जरूर पैदा कर दी है।












