
तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद सफाई, SIR और Form-6 को लेकर उठे सवालों पर आयोग का पक्ष सामने आया
नई दिल्ली। चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद को लेकर पिछले दिनों उठे विवाद के बीच आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। 26 सितंबर 2026 को हुई बैठक के बाद आयोग की ओर से बताया गया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले आम सहमति से लिए गए थे।
विवाद की शुरुआत उन रिपोर्टों के बाद हुई थी, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी तथा सुखबीर सिंह संधू के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद होने की बात कही गई थी। चुनाव आयोग ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजी गई चिट्ठी आयोग की किसी नीति से संबंधित नहीं थी, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ी थी।
SIR पर क्या है चुनाव आयोग का पक्ष?
आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अपडेट और व्यवस्थित करना है।
बिहार में SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले में बिहार में SIR कराने के लिए चुनाव आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत इस्तेमाल की गई शक्तियों का उल्लेख किया गया है। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को पात्रता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने और उस सूची में नाम नहीं होने वाले लोगों से निर्धारित सरकारी दस्तावेज मांगने का प्रावधान किया था।
Form-6 को लेकर भी उठा था सवाल
मतदाता सूची में नए मतदाता के पंजीकरण से संबंधित Form-6 में अतिरिक्त घोषणा को लेकर भी विवाद सामने आया था। जागरण के संपादकीय में दावा किया गया है कि इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्ति की खबर सही नहीं थी और सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR के संदर्भ में Form-6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र को वैध माना था। यह दावा मूल लेख में संपादकीय के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
विपक्ष ने उठाए हैं सवाल
SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण उसके संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है।
इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 के लिए मतदाता सूची डाउनलोड और नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है।
आयोग के सामने चुनौती यह है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और प्रक्रिया को लेकर लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान हो। इसी वजह से SIR को लेकर आगे की प्रक्रिया और उस पर न्यायिक एवं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।












