
1991 में IIT मद्रास में BTech करने पहुंचीं, अमेरिका से PhD और MIT में रिसर्च के बाद बनीं प्रोफेसर; 2023 में IIT मद्रास जांजीबार कैंपस की Director-in-Charge बनकर रचा इतिहास
प्रीति अघलायम की सफलता की कहानी: कुछ सफर ऐसे होते हैं, जिनमें मंजिल से ज्यादा खास वह रास्ता होता है, जहां से यात्रा शुरू हुई थी। IIT मद्रास की प्रोफेसर प्रीति अघलायम की कहानी भी ऐसी ही है। वर्ष 1991 में जिस संस्थान में वह केमिकल इंजीनियरिंग की छात्रा बनकर पहुंची थीं, करीब तीन दशक बाद उसी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय कैंपस की नेतृत्वकारी जिम्मेदारी उनके पास आई।
प्रीति अघलायम ने IIT मद्रास से BTech करने के बाद अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से MS और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स, एमहर्स्ट से PhD पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित MIT में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्चर के तौर पर काम किया।
भारत लौटने के बाद उनका अकादमिक करियर IIT बॉम्बे से शुरू हुआ। बाद में वह IIT मद्रास से जुड़ीं और केमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अध्यापन और शोध को आगे बढ़ाया।
1991 में IIT मद्रास से शुरू हुआ सफर
प्रीति अघलायम ने वर्ष 1991 में IIT मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग के BTech कार्यक्रम में दाखिला लिया था। उस दौर में इंजीनियरिंग संस्थानों में महिला छात्रों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी।
प्रीति ने अपने बैच के अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि उनकी कक्षा में करीब 50 विद्यार्थी थे, जिनमें केवल पांच छात्राएं थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे की शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया।
अमेरिका में MS और PhD
IIT मद्रास से BTech पूरा करने के बाद प्रीति अघलायम ने अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल की। वर्ष 1995 में उन्होंने University of Rochester से Chemical Engineering में MS किया।
इसके बाद वर्ष 2000 में उन्होंने University of Massachusetts Amherst से Chemical Engineering में PhD पूरी की। PhD के बाद उन्होंने Massachusetts Institute of Technology (MIT) में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्चर के रूप में काम किया।
विदेश में उच्च शिक्षा और शोध का अनुभव हासिल करने के बाद वह भारत वापस लौटीं और अकादमिक क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाया।
IIT बॉम्बे से शुरू हुआ अकादमिक करियर
भारत लौटने के बाद प्रीति अघलायम IIT बॉम्बे के Chemical Engineering विभाग से फैकल्टी के तौर पर जुड़ीं। यहां उन्होंने अध्यापन के साथ-साथ शोध कार्य भी किया।
उनके शोध कार्यों का संबंध केमिकल इंजीनियरिंग और रिएक्टर इंजीनियरिंग से जुड़े विभिन्न विषयों से रहा है। उनके काम में Underground Coal Gasification, Automotive NOx Reduction, Reaction Mechanism और Reactor Modelling जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।
2010 से IIT मद्रास का हिस्सा
वर्ष 2010 में प्रीति अघलायम IIT मद्रास से जुड़ीं। यहां उन्होंने Chemical Engineering विभाग में प्रोफेसर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।
IIT मद्रास में उनका अकादमिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। संस्थान की जानकारी के अनुसार, वह MS Ananth Chair Professor के पद से भी जुड़ी रही हैं।
शिक्षण और शोध के साथ उन्होंने संस्थान के विभिन्न अकादमिक कार्यों में भी योगदान दिया।
2023 में मिली बड़ी जिम्मेदारी
प्रीति अघलायम के करियर में बड़ा मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब IIT मद्रास ने तंजानिया के जांजीबार में अपना अंतरराष्ट्रीय कैंपस शुरू किया।
इस कैंपस की स्थापना के साथ प्रीति अघलायम को Director-in-Charge की जिम्मेदारी दी गई। IIT मद्रास जांजीबार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नियुक्ति के साथ वह किसी IIT कैंपस की Director-in-Charge बनने वाली पहली महिला बनीं।
यह जिम्मेदारी इसलिए भी खास थी क्योंकि यह IIT मद्रास के भारत से बाहर स्थापित अंतरराष्ट्रीय कैंपस के नेतृत्व से जुड़ी थी।
शोध और सम्मान भी उपलब्धियों का हिस्सा
प्रीति अघलायम का करियर केवल प्रशासनिक और शिक्षण जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा। उनके नाम कई शोध उपलब्धियां और सम्मान दर्ज हैं।
उन्हें Amar Dye-Chem Award, IIChE Young Achiever Award और INAE Young Engineer Award जैसे सम्मान मिल चुके हैं।
उनका शोध Chemical Engineering से जुड़े तकनीकी विषयों पर केंद्रित रहा है, जिसमें रिएक्शन मैकेनिज्म और रिएक्टर मॉडलिंग जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।
छात्रा से प्रोफेसर और फिर अंतरराष्ट्रीय कैंपस की जिम्मेदारी
प्रीति अघलायम की कहानी की खास बात यह है कि उनकी यात्रा उसी संस्थान से शुरू हुई जहां वह एक छात्रा थीं। वर्ष 1991 में IIT मद्रास में BTech की पढ़ाई शुरू करने वाली प्रीति ने अमेरिका में MS और PhD की, MIT में शोध किया, IIT बॉम्बे में अध्यापन किया और फिर IIT मद्रास की प्रोफेसर बनीं।
इसके बाद वर्ष 2023 में उन्हें IIT मद्रास के जांजीबार कैंपस की Director-in-Charge की जिम्मेदारी मिली।
एक छात्रा के रूप में IIT के कैंपस में कदम रखने से लेकर उसी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय कैंपस की नेतृत्वकारी भूमिका तक पहुंचने का यह सफर उनके लंबे अकादमिक और शोध करियर को दर्शाता है।












