BusinesschhattisgarhLatestPolitical

कोयला उत्पादन बढ़ा, लेकिन घटते गए स्थायी कर्मचारी: SECL में 5 महीने में 754 कामगार कम, ठेका श्रमिकों पर बढ़ी निर्भरता

कोल इंडिया में भी 3,450 स्थायी कर्मचारी घटे; बढ़ते उत्पादन लक्ष्य के बीच रोजगार के स्वरूप को लेकर उठ रहे सवाल

कोरबा/बिलासपुर। देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने की कवायद के बीच कोयला क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में स्थायी कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में SECL के स्थायी श्रमबल में 754 कर्मचारियों की कमी दर्ज की गई है। इसी अवधि में कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों को मिलाकर स्थायी कर्मचारियों की संख्या 3,450 घट गई।

कोल इंडिया की अगस्त 2026 की श्रमबल सारांश रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर 2026 तक कंपनी में 2,08,616 स्थायी कर्मचारी रह गए हैं। वित्त वर्ष की शुरुआत में यह संख्या 2,12,066 थी। यानी करीब पांच महीने के भीतर स्थायी श्रमबल में 3,450 की कमी आई।

SECL में 754 कर्मचारियों की कमी

कोल इंडिया की अलग-अलग अनुषंगी कंपनियों में स्थायी कर्मचारियों की संख्या में कमी देखी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) में 1,045, SECL में 754 और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में 620 स्थायी कर्मचारियों की कमी दर्ज की गई।

SECL छत्तीसगढ़ के कोयला क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनी है। ऐसे में यहां स्थायी कर्मचारियों की संख्या में लगातार कमी का असर स्थानीय रोजगार के अवसरों पर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

उत्पादन लक्ष्य बढ़ा, श्रमबल घटा

कोल इंडिया का मौजूदा वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 814.85 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। वहीं 17 सितंबर 2026 तक कंपनी ने 297.07 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है।

यानी एक तरफ कंपनी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, जबकि दूसरी तरफ स्थायी कर्मचारियों की संख्या कम हो रही है। इस स्थिति में उत्पादन गतिविधियों में ठेका श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ने की बात सामने आ रही है।

1975 में 7.50 लाख कर्मचारी, अब करीब 2.08 लाख

कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के समय वर्ष 1975 में कोल इंडिया में करीब 7.50 लाख कर्मचारी थे। उस समय कंपनी का कोयला उत्पादन लगभग 79 मिलियन टन बताया जाता है।

आज कंपनी का उत्पादन लक्ष्य कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन स्थायी कर्मचारियों की संख्या घटकर करीब 2.08 लाख रह गई है। इस बदलाव को कोयला उद्योग में बढ़ते मशीनीकरण और बदलती कार्यप्रणाली से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

सेवानिवृत्ति के बाद नई भर्ती सीमित

स्थायी कर्मचारियों की संख्या घटने के पीछे लगातार होने वाली सेवानिवृत्ति, मशीनीकरण, ऑटोमेशन और नई नियमित भर्तियों का सीमित होना प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्तमान में नियमित नियुक्तियां मुख्य रूप से मृत्यु प्रकरण, अनुकंपा नियुक्ति और जमीन के बदले रोजगार जैसे मामलों तक सीमित हैं।

दूसरी ओर उत्पादन और अन्य कार्यों में बाहरी कंपनियों के जरिए ठेका श्रमिकों की भागीदारी बढ़ रही है। श्रमिक संगठनों का दावा है कि कोल इंडिया में ठेका श्रमिकों की संख्या करीब चार लाख तक पहुंच चुकी है।

स्थायी नौकरी की जगह ठेका व्यवस्था पर सवाल

श्रमिक संगठनों का कहना है कि स्थायी और ठेका कर्मचारियों के वेतन तथा दूसरी सुविधाओं में अंतर है। उनका तर्क है कि कई मामलों में समान प्रकृति का काम करने के बावजूद ठेका श्रमिकों को स्थायी कर्मचारियों के मुकाबले कम पारिश्रमिक और सुविधाएं मिलती हैं।

श्रमिक संगठनों के मुताबिक ठेका व्यवस्था से कंपनी की लागत कम हो सकती है, लेकिन इससे स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर सीमित होने का सवाल उठता है।

एटक ने नियमित भर्ती बढ़ाने की मांग उठाई

एटक नेता अजय विश्वकर्मा के अनुसार कोल इंडिया में नियमित कामगारों की पर्याप्त नियुक्तियां नहीं होने के कारण स्थायी कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। उनका कहना है कि फिलहाल नियुक्तियां मुख्य रूप से मृत्यु प्रकरण, अनुकंपा और जमीन के बदले नौकरी जैसे मामलों में ही हो रही हैं।

उनके मुताबिक उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रबंधन बाहरी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ा रहा है। इससे स्थायी रोजगार और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं।

कोयलांचल में रोजगार पर क्या असर होगा?

SECL और कोल इंडिया में स्थायी कर्मचारियों की संख्या में यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मशीनीकरण और ऑटोमेशन के कारण उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ नियमित रोजगार के अवसरों का स्वरूप भी बदल रहा है।

आने वाले समय में कोयला उत्पादन बढ़ने के साथ स्थायी और ठेका श्रमिकों के बीच संतुलन, नई नियमित भर्तियों और स्थानीय रोजगार का मुद्दा कोयलांचल क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button