छात्र नहीं मिले तो 40 सरकारी स्कूलों में लटके ताले, 32 प्राथमिक विद्यालय भी बंद

पौड़ी जिले में घटती छात्र संख्या से बिगड़ी सरकारी स्कूलों की स्थिति, नए शैक्षणिक सत्र में 40 स्कूलों में एक भी बच्चे ने नहीं लिया प्रवेश; पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
पौड़ी/देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में घटती आबादी और सरकारी स्कूलों में कम होते नामांकन का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। पौड़ी जिले में नए शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्र संख्या शून्य रहने के कारण 40 सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लग गए हैं। इनमें 32 प्राथमिक और आठ उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इन स्कूलों में एक भी छात्र के प्रवेश नहीं लेने के कारण इनके संचालन पर रोक लगाने की स्थिति बनी है।
यह आंकड़ा पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा के सामने खड़ी चुनौतियों को उजागर करता है। जिन विद्यालयों में कभी आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ने आते थे, वहां अब नए सत्र में एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं हुआ। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की उपलब्धता, पलायन और सरकारी स्कूलों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पौड़ी जिले के 40 स्कूलों में क्यों लटके ताले?
शिक्षा विभाग के अनुसार, पौड़ी जिले में संचालित 1,297 प्राथमिक विद्यालयों में से 32 में नए शैक्षणिक सत्र के दौरान किसी भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया। वहीं, जिले के 231 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई।
इस तरह कुल 40 विद्यालयों में नए सत्र के दौरान कोई विद्यार्थी नामांकित नहीं हुआ। छात्र संख्या शून्य रहने के आधार पर इन विद्यालयों को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन कम होने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों से परिवारों का दूसरे शहरों की ओर जाना, गांवों में बच्चों की संख्या घटना और अभिभावकों की बदलती शैक्षणिक प्राथमिकताएं इनमें शामिल हो सकती हैं। हालांकि, पौड़ी जिले के इन 40 विद्यालयों में नामांकन शून्य होने के विशिष्ट कारणों की अलग-अलग पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
बीरोंखाल ब्लॉक में सबसे ज्यादा पांच प्राथमिक विद्यालय बंद
पौड़ी जिले के विकासखंडों में प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति अलग-अलग रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बीरोंखाल ब्लॉक में सबसे ज्यादा पांच प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य रही।
पौड़ी और यमकेश्वर विकासखंडों में चार-चार प्राथमिक विद्यालयों में नए सत्र में प्रवेश नहीं हुआ। एकेश्वर, द्वारीखाल, कोट, कल्जीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पोखड़ा और दुगड्डा में दो-दो प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई।
वहीं, खिर्सू, जयहरीखाल और नैनीडांडा में एक-एक प्राथमिक विद्यालय में कोई विद्यार्थी नामांकित नहीं हुआ।
ये आंकड़े बताते हैं कि छात्र संख्या में गिरावट किसी एक विकासखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई हिस्सों में सरकारी प्राथमिक शिक्षा को लेकर चुनौती सामने आ रही है।
आठ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी नहीं मिला कोई छात्र
प्राथमिक विद्यालयों के साथ उच्च प्राथमिक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक रही। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, एकेश्वर, यमकेश्वर, कल्जीखाल, रिखणीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी और जयहरीखाल विकासखंडों में एक-एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या शून्य रही।
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन नहीं होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध होती है। यदि गांवों में बच्चों की संख्या लगातार कम होती है, तो स्थानीय स्तर पर विद्यालयों का संचालन प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, किसी विद्यालय में छात्र संख्या शून्य होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा बंद हो गई है। लेकिन इससे यह सवाल जरूर उठता है कि आसपास के गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए कितनी दूरी तय करनी पड़ रही है और उनके लिए वैकल्पिक स्कूलों की व्यवस्था कैसी है।
किन विकासखंडों में कौन-कौन से स्कूल बंद हुए?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पौड़ी जिले के विभिन्न विकासखंडों में छात्र संख्या शून्य रहने वाले विद्यालयों में कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल शामिल हैं।
एकेश्वर ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय डियूल्ड, प्राथमिक विद्यालय पुसोली और उच्च प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल।
यमकेश्वर ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय पलेलगांव, पैंया, उमड़ा और नांद तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपड़ा कस्याली।
द्वारीखाल ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय घंडालू और खेड़ा।
बीरोंखाल ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय तनकिला, गाडखर्क, रतकोट, सुंदरखाल और चौंडी।
कोट ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय सैंज और कंडोला।
कल्जीखाल ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय बूंगा-दो और बलोद तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय पलाई।
खिर्सू ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय मुसोली।
थलीसैंण ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय खरकासारी और कुवाखर्क तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई।
रिखणीखाल ब्लॉक: उच्च प्राथमिक विद्यालय मेलधार।
पाबौ ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय कोटा और कलुण तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय कुई।
पोखड़ा ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय चमनाऊ और पोखड़ा।
पौड़ी ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय गजेंद्रपुर, चांदखेत, डोबल्या और थपलियालगांव तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय कड़ाकोट।
दुगड्डा ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय गढ़सिर और केष्टा।
जयहरीखाल ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय मोली और उच्च प्राथमिक विद्यालय रैतपुर।
नैनीडांडा ब्लॉक: प्राथमिक विद्यालय झुडंगू।
इन विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य होने की जानकारी सामने आई है। विद्यालयों के भविष्य, भवनों के उपयोग और आसपास के विद्यार्थियों की वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पहाड़ों से पलायन और घटती आबादी की चुनौती
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों को समझने के लिए गांवों की जनसंख्या, रोजगार और परिवारों के स्थानांतरण जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि गांवों में बच्चों की संख्या कम होती है, तो स्कूलों में नामांकन प्रभावित हो सकता है। इसी तरह, बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में परिवारों के दूसरे स्थानों पर जाने से भी स्थानीय विद्यालयों की छात्र संख्या पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
पौड़ी जिले के 40 विद्यालयों में नए सत्र में नामांकन शून्य होना इस व्यापक चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करता है। हालांकि, यह निष्कर्ष निकालने के लिए कि सभी विद्यालय केवल पलायन के कारण बंद हुए हैं, अलग से प्रमाण और आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि स्थानीय समुदाय के जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे में स्कूलों का संचालन प्रभावित होने पर बच्चों की पहुंच, परिवहन और आगे की पढ़ाई से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल: बच्चों की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी?
पौड़ी जिले में 40 विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। जिन क्षेत्रों में भविष्य में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है, वहां स्कूलों की स्थिति की नियमित समीक्षा करना उपयोगी होगा। साथ ही, आसपास के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए दूरी, परिवहन और सुरक्षित पहुंच जैसी जरूरतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों का आकलन, अभिभावकों से संवाद, शिक्षण सुविधाओं में सुधार और विद्यालयों तक आसान पहुंच जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके लिए विकासखंडवार आंकड़ों और गांवों की वास्तविक स्थिति के आधार पर योजना बनानी होगी।
पौड़ी जिले के ये आंकड़े सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को रेखांकित करते हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि शिक्षा विभाग घटती छात्र संख्या के कारणों का आकलन कैसे करता है और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।












