
बारिश का मौसम चल रहा है और इसके साथ ही बच्चों में वायरल फीवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नमी भरे मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव और स्कूलों में बच्चों के एक-दूसरे के संपर्क में आने से वायरस आसानी से फैल रहे हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी और कमजोरी की शिकायत लेकर आने वाले बाल रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।
बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। वायरल फीवर के आम लक्षणों में 100 डिग्री या उससे अधिक बुखार, ठंड लगना, गले में खराश, नाक बहना, सूखी खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कभी-कभी उल्टी या दस्त शामिल हैं। कई मामलों में बुखार 3 से 5 दिन तक बना रहता है।
डॉक्टरों के अनुसार मानसून में जमा पानी से मच्छर भी बढ़ते हैं, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी रहता है। दूषित पानी और भोजन से डायरिया तथा अन्य संक्रमण हो सकते हैं। माता-पिता को बच्चों को बारिश के पानी में खेलने से रोकना चाहिए, गीले कपड़े तुरंत बदलने चाहिए और हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए। उबला या फिल्टर किया पानी ही पिलाएं, ताजा घर का बना खाना दें और सड़क किनारे के खाने से बचाएं।
अगर बुखार 2-3 दिन से ज्यादा रहे, तापमान बहुत ऊंचा हो, सांस लेने में तकलीफ हो, बार-बार उल्टी या दस्त हों, बच्चा बहुत सुस्त पड़े या भूख पूरी तरह बंद हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों खासकर 5 साल से कम उम्र वालों की विशेष निगरानी जरूरी है। स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद और साफ-सफाई से ज्यादातर मामले नियंत्रित हो जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग भी मानसून बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता बढ़ा रहा है। माता-पिता सतर्क रहें तो बच्चों को इस मौसमी बीमारी से काफी हद तक बचाया जा सकता है।












