खाते से रकम गायब, जेल प्रहरी के साथ कैसे हुआ साइबर फ्रॉड?

रायपुर में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। केंद्रीय जेल रायपुर में पदस्थ एक जेल प्रहरी के बैंक खाते से साइबर ठगों ने करीब 95 हजार रुपये पार कर दिए। खास बात यह है कि ठगी का पता उस समय चला, जब मोबाइल में बैंकिंग और भुगतान से जुड़े एप दोबारा डाउनलोड करने के बाद जेल प्रहरी ने अपने खाते की जांच की।
मामला गंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार केंद्रीय जेल रायपुर में पदस्थ जेल प्रहरी आत्माराम सिन्हा जेल कॉलोनी स्थित क्वार्टर में रहते हैं। 28 सितंबर की सुबह करीब 9 बजे उनके मोबाइल में योनो, पेटीएम और फोन-पे जैसे एप काम नहीं कर रहे थे। मोबाइल में अचानक इन एप के काम नहीं करने से वह परेशान हो गए।
इसके बाद आत्माराम सिन्हा मोबाइल लेकर एक सर्विस सेंटर पहुंचे। वहां मोबाइल की जांच करने के बाद उसे फॉर्मेट कर दिया गया। मोबाइल फॉर्मेट होने के बाद उन्होंने दोबारा अपने जरूरी एप इंस्टॉल नहीं किए और कुछ समय बाद मोबाइल का इस्तेमाल करते रहे।
करीब दो दिन बाद जब उन्होंने मोबाइल में दोबारा बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े एप डाउनलोड किए और अपने बैंक खाते की जानकारी देखी तो उनके होश उड़ गए। खाते से करीब 95 हजार रुपये की रकम गायब थी।
जेल प्रहरी ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद गंज पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल फॉर्मेट कराने के बाद खाते से रकम किस तरीके से निकाली गई और साइबर ठगों ने बैंकिंग जानकारी तक कैसे पहुंच बनाई।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मोबाइल में बैंकिंग एप के अचानक काम करना बंद करने और उसके बाद मोबाइल फॉर्मेट कराने की घटना के बीच साइबर ठगी हुई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं मोबाइल में किसी संदिग्ध गतिविधि या तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए ठगों ने बैंक खाते तक पहुंच तो नहीं बनाई थी।
डिजिटल भुगतान और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह घटना एक बार फिर लोगों के लिए सावधानी बरतने का संकेत है। मोबाइल में बैंकिंग एप अचानक काम करना बंद कर दें तो बिना जांच के किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध सर्विस सेंटर को मोबाइल देना जोखिम भरा हो सकता है। पुलिस मामले की तकनीकी जांच के जरिए ठगी की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।












