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M Type Personality: एक बच्चे का मन अगर हर दिन कुछ नया करना चाहता है तो क्या वह कमजोर फोकस है?

पेंटिंग के बाद कोडिंग, फिर संगीत और अगले दिन किसी नई चीज में रुचि—अगर बच्चा बार-बार अलग-अलग क्षेत्रों की ओर आकर्षित होता है तो इसे तुरंत आलस या कमजोर एकाग्रता न मानें।

नई दिल्ली। कुछ बच्चे बचपन से ही किसी एक विषय में लंबे समय तक टिके रहते हैं, जबकि कुछ बच्चे एक साथ कई चीजों में रुचि दिखाते हैं। आज उन्हें चित्रकारी पसंद है, कल वे कंप्यूटर कोडिंग सीखना चाहते हैं और अगले दिन संगीत, विज्ञान, खेल या लेखन में दिलचस्पी लेने लगते हैं।

ऐसे बच्चों को कई बार माता-पिता और शिक्षक यह कहकर टोक देते हैं कि “एक चीज पर ध्यान दो”, “तुम किसी काम को पूरा नहीं करते” या “तुम्हारा फोकस कमजोर है।” लेकिन हर बार ऐसा होना अनुशासन की कमी का संकेत नहीं होता।

मनोविज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह के व्यापक रुचि-पैटर्न को Multipotentiality या Multipotentialite की अवधारणा से समझने की कोशिश की जाती है। सोशल मीडिया और कुछ लोकप्रिय सामग्री में इसे कभी-कभी “Type M Personality” भी कहा जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Type M कोई आधिकारिक मानसिक रोग, व्यक्तित्व विकार या मान्यता प्राप्त क्लिनिकल डायग्नोसिस नहीं है।

आखिर Multipotentiality क्या है?

Multipotentiality का सामान्य अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जिसके अंदर एक से अधिक क्षेत्रों में रुचि, क्षमता या संभावित प्रतिभा हो और जो अलग-अलग विषयों को सीखने तथा उनके बीच संबंध खोजने की ओर आकर्षित हो।

उदाहरण के लिए कोई बच्चा गणित सीखने के साथ-साथ संगीत में रुचि ले सकता है, विज्ञान के प्रयोग कर सकता है और साथ ही चित्रकारी या कहानी लिखने में भी समय लगाना चाहता है।

ऐसे बच्चे के लिए समस्या यह नहीं होती कि उसके पास रुचि का अभाव है। कई बार उल्टा होता है—रुचियां बहुत ज्यादा होती हैं।

इस विचार को किसने सामने रखा?

Multipotentiality कोई ऐसी खोज नहीं है जिसे किसी एक वैज्ञानिक ने अचानक “Type M” नाम देकर खोज लिया हो। इसकी जड़ें शिक्षा और करियर मनोविज्ञान में पुरानी हैं।

अमेरिकी शिक्षा शोधकर्ता E. Paul Torrance ने प्रतिभाशाली और रचनात्मक बच्चों की क्षमताओं तथा उनके विकास पर महत्वपूर्ण काम किया। बाद के वर्षों में Barbara Kerr सहित कई शोधकर्ताओं ने gifted individuals, career development और उन लोगों का अध्ययन किया जिनकी रुचियां एक से अधिक क्षेत्रों में फैली होती हैं।

“Multipotentialite” शब्द को लोकप्रिय बनाने में Emilie Wapnick की किताब How to Be Everything और उनके TEDx भाषण की भी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने ऐसे लोगों का वर्णन किया जो जीवन में कई अलग-अलग रुचियों और करियर दिशाओं को अपनाना चाहते हैं।

इसलिए “Type M Personality” को किसी एक व्यक्ति द्वारा खोजी गई प्रमाणित personality category बताना सही नहीं होगा। इसे अधिक सावधानी से multipotentiality का लोकप्रिय नाम कहना बेहतर है।

Leonardo da Vinci और Einstein को Type M कहना कितना सही है?

इतिहास में Leonardo da Vinci जैसे लोगों के उदाहरण अक्सर दिए जाते हैं, क्योंकि उनकी रुचियां कला, शरीर रचना, इंजीनियरिंग, विज्ञान और आविष्कार जैसे कई क्षेत्रों में थीं।

Benjamin Franklin भी विज्ञान, लेखन, राजनीति और आविष्कार सहित अनेक क्षेत्रों में सक्रिय रहे।

लेकिन आधुनिक मनोवैज्ञानिक शोध के आधार पर इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को औपचारिक रूप से “Type M personality” घोषित करना उचित नहीं है। उनके उदाहरण यह दिखाने के लिए दिए जा सकते हैं कि बहु-विषयक रुचियां असामान्य रूप से रचनात्मक काम का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन इसे वैज्ञानिक निदान नहीं माना जाना चाहिए।

बच्चे में M-Type या Multipotentiality के संकेत क्या हो सकते हैं?

हर बहुरुचि वाला बच्चा Multipotentialite नहीं होता। फिर भी कुछ सामान्य संकेत ध्यान देने योग्य हो सकते हैं।

  • बच्चा कम समय में अलग-अलग विषयों में गहरी रुचि लेने लगे।
  • एक विषय सीखने के बाद उससे जुड़ी नई चीजों की खोज शुरू कर दे।
  • विज्ञान, कला, संगीत, तकनीक और लेखन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में आकर्षण दिखाए।
  • किसी चीज को सीखने की शुरुआत बहुत उत्साह से करे, लेकिन कुछ समय बाद दूसरी चुनौती की ओर बढ़ जाए।
  • अलग-अलग विषयों के बीच संबंध खोजने की कोशिश करे।
  • सामान्य सवालों के बजाय “ऐसा क्यों होता है?” और “अगर ऐसा करें तो क्या होगा?” जैसे सवाल अधिक पूछे।
  • किसी एक क्षेत्र में रुचि होने के बावजूद दूसरे क्षेत्रों को पूरी तरह छोड़ना न चाहे।

लेकिन इन संकेतों में से कोई भी अकेला यह साबित नहीं करता कि बच्चा Multipotentialite है।

क्या यह ADHD या कमजोर एकाग्रता हो सकती है?

यहीं माता-पिता को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

हर बार गतिविधि बदलना ADHD नहीं है और हर बहुरुचि वाला बच्चा Type M भी नहीं है। दूसरी तरफ, अगर बच्चे को लगातार ध्यान बनाए रखने में गंभीर परेशानी होती है, काम पूरा करने में कठिनाई होती है, अत्यधिक आवेगशीलता या अन्य व्यवहारिक समस्याएं घर और स्कूल दोनों जगह दिखाई देती हैं, तो केवल “वह बहुत प्रतिभाशाली है” कहकर बात खत्म नहीं करनी चाहिए।

ADHD जैसी स्थिति का आकलन योग्य मानसिक स्वास्थ्य या चिकित्सा विशेषज्ञ ही कर सकते हैं।

इसलिए Multipotentiality और ADHD को एक-दूसरे का पर्याय मानना गलत होगा।

ऐसे बच्चों की देखभाल कैसे करें?

1. हर रुचि को तुरंत करियर बनाने की कोशिश न करें

बच्चा आज संगीत सीखना चाहता है और अगले महीने रोबोटिक्स। इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता को हर बार नया महंगा कोर्स शुरू कर देना चाहिए।

पहले बच्चे को सीमित संसाधनों में उस रुचि को आजमाने दें और देखें कि वह उसमें कितनी निरंतरता दिखाता है।

2. “तुम किसी काम में टिकते नहीं” कहना बंद करें

बार-बार ऐसा सुनने से बच्चा अपनी जिज्ञासा को कमजोरी समझ सकता है।

इसके बजाय पूछा जा सकता है—

“तुम्हें इस चीज में सबसे ज्यादा क्या पसंद आया?”

इससे बच्चे को अपनी रुचि समझने में मदद मिलती है।

3. रुचि बदलने और जिम्मेदारी छोड़ने में अंतर समझें

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।

अगर बच्चा हर नई चीज शुरू करता है और पुरानी जिम्मेदारी छोड़ देता है, तो उसे यह सिखाना जरूरी है कि नई चीज सीखना अच्छी बात है, लेकिन शुरू किए गए जरूरी काम को पूरा करना भी जरूरी है।

उदाहरण के लिए—

“नई पेंटिंग शुरू कर सकते हो, लेकिन पहले स्कूल का जरूरी प्रोजेक्ट पूरा करो।”

4. “एक ही पैशन चुनो” का दबाव न बनाएं

बच्चे से बहुत कम उम्र में यह पूछना कि “बड़े होकर क्या बनोगे?” और फिर एक ही उत्तर पर जोर देना हमेशा उपयोगी नहीं होता।

बेहतर सवाल हो सकता है—

“तुम किन चीजों को सीखना पसंद करते हो और क्यों?”

5. रुचियों के बीच संबंध खोजने दें

अगर बच्चा विज्ञान और चित्रकारी दोनों पसंद करता है तो दोनों को अलग-अलग रखने के बजाय विज्ञान की ड्राइंग, मॉडल या डिजिटल डिजाइन जैसी गतिविधियां कराई जा सकती हैं।

यहीं बहु-विषयक सोच उपयोगी हो सकती है।

6. बच्चे को “जीनियस” घोषित करने में भी सावधानी रखें

Multipotentiality का मतलब यह नहीं है कि बच्चा अपने आप महान वैज्ञानिक, कलाकार या आविष्कारक बन जाएगा।

रुचि को कौशल में बदलने के लिए अभ्यास, धैर्य, अनुशासन और लंबे समय तक सीखना जरूरी है।

माता-पिता को क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

क्या करें

  • बच्चे की अलग-अलग रुचियों को समझें।
  • सीमित संख्या में गतिविधियां चुनकर उन्हें कुछ समय दें।
  • बच्चे को प्रयोग करने का अवसर दें।
  • उसकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करें।
  • काम पूरा करने की आदत विकसित करें।
  • जरूरत पड़ने पर शिक्षक या विशेषज्ञ से सलाह लें।

क्या न करें

  • हर गतिविधि बदलने पर बच्चे को आलसी न कहें।
  • हर नई रुचि को तुरंत करियर न बनाएं।
  • दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • बिना विशेषज्ञ की सलाह के बच्चे को ADHD या किसी अन्य स्थिति का लेबल न दें।
  • केवल “तुम बहुत प्रतिभाशाली हो” कहकर अनुशासन और मेहनत की जरूरत को नजरअंदाज न करें।

स्कूल और शिक्षक क्या कर सकते हैं?

ऐसे बच्चों के लिए केवल एक ही तरीके से सीखने की व्यवस्था हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकती। प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियां, अलग-अलग विषयों को जोड़ने वाले कार्य और रचनात्मक समस्याओं पर काम करने के अवसर उनकी रुचि को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।

मसलन, एक ही प्रोजेक्ट में विज्ञान, गणित, लेखन, डिजाइन और कंप्यूटर का इस्तेमाल कराया जा सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को हर विषय में अलग-अलग विशेष सुविधा देनी चाहिए। बल्कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि उसकी जिज्ञासा और जिम्मेदारी दोनों का संतुलन बना रहे।

क्या Multipotentiality वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुकी है?

यहां सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है।

Multipotentiality पर शिक्षा, giftedness, creativity और career development के क्षेत्रों में चर्चा और शोध मौजूद हैं। लेकिन “Type M Personality” को PFC, DMN या Basal Ganglia की एक विशिष्ट वैज्ञानिक personality type के रूप में स्थापित करने वाला व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं माना जाता।

इसी तरह यह कहना कि “Type M लोगों का दिमाग निश्चित रूप से ऐसा ही काम करता है” या “इनके दिमाग में विशेष chemicals होते हैं” वैज्ञानिक रूप से जरूरत से ज्यादा दावा होगा।

मस्तिष्क के prefrontal cortex, default mode network और अन्य neural systems रचनात्मकता, ध्यान, निर्णय और विचार प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं, लेकिन इन क्षेत्रों को सीधे “Type M brain” का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

सबसे जरूरी संदेश

अगर बच्चा पेंटिंग के बाद कोडिंग, कोडिंग के बाद संगीत और संगीत के बाद विज्ञान में रुचि लेने लगता है, तो माता-पिता को दो अतियों से बचना चाहिए।

पहली—उसे तुरंत “कमजोर फोकस वाला बच्चा” घोषित कर देना।

दूसरी—उसे तुरंत “जीनियस Type M बच्चा” मान लेना।

सही रास्ता बीच में है।

बच्चे की जिज्ञासा को जगह दें, लेकिन उसे जिम्मेदारी और निरंतरता भी सिखाएं। उसकी रुचियों को समझें, लेकिन किसी मनोवैज्ञानिक लेबल को बिना विशेषज्ञ मूल्यांकन के इस्तेमाल न करें।

कई क्षेत्रों में रुचि होना एक संभावना हो सकती है। उस संभावना को वास्तविक क्षमता में बदलने के लिए अभ्यास, अनुशासन, सही मार्गदर्शन और उपयुक्त वातावरण उतने ही जरूरी हैं।

 

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