
कुकी-नगा संघर्ष में अब तक 22 नगा और 32 कुकी लोगों की मौत का दावा, सरकार ने शांति के लिए बातचीत पर दिया जोर
मणिपुर। मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच हिंसा की एक और घटना सामने आई है। राज्य के कामजोंग जिले में गुरुवार को संदिग्ध नगा उग्रवादियों के कथित हमले में एक कुकी महिला की मौत हो गई, जबकि उसका पति घायल हो गया। घटना के बाद उनके साथ मौजूद दो अन्य लोगों के लापता होने की खबर है। इस घटना ने राज्य में पहले से जारी कुकी-नगा तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मृतक महिला की पहचान हतनेइकिम के रूप में हुई है, जो हाओकिप मोलनोई गांव की रहने वाली थीं। बताया जा रहा है कि महिला अपने पति और दो अन्य लोगों के साथ जरूरी सामान खरीदने के लिए फाईकोह जा रही थीं। इसी दौरान फाईकोह और ऐशु के बीच सड़क पर उनके समूह पर कथित तौर पर हमला किया गया। हमले में महिला की मौत हो गई, जबकि उनके पति घायल हो गए। साथ मौजूद दो अन्य नागरिकों का अब तक पता नहीं चलने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, घटना के संबंध में हमलावरों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कुकी-नगा संघर्ष में बढ़ती जा रही मौतों की संख्या
मणिपुर में कुकी और नगा समुदायों के बीच तनाव और हिंसक घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी में कुकी-नगा संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 22 नगा और 32 कुकी लोगों की मौत हो चुकी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुरुवार के हमले के बाद इस संघर्ष में मारी गई कुकी महिलाओं की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। इनमें दो गर्भवती महिलाएं भी शामिल बताई गई हैं।
यह घटनाक्रम वर्ष 2023 से 2025 के दौरान चले कुकी-मैतेई जातीय संघर्ष के बाद राज्य में जारी व्यापक जातीय तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। हाल के दिनों में अलग-अलग जिलों में हुई हिंसक घटनाओं ने एक बार फिर शांति बहाली की चुनौतियों को उजागर किया है।
नगा व्यक्ति का कटा हुआ सिर मिलने से बढ़ा तनाव
मणिपुर में तनाव के बीच सुरक्षा बलों को बुधवार देर रात कांगपोकपी जिले में नगा व्यक्ति अजिनबोउ रिंगकामाई का कटा हुआ सिर मिलने की जानकारी सामने आई है। वह उन चार नगा पुरुषों में शामिल बताए गए हैं, जिनकी 10 अक्टूबर को मकुई अशांग गांव पर संदिग्ध कुकी उग्रवादियों के हमले के दौरान मौत हो गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, हमले के दौरान उनका सिर धड़ से अलग हो गया था और बाद में उसका पता नहीं चल पाया था। 11 अक्टूबर को उनका बिना सिर वाला शव इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जेएनआईएमएस) ले जाया गया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सुरक्षा बलों को बुधवार देर रात घटनास्थल के पास एक सुनसान स्थान पर सिर मिला। इसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया।
इस मामले में नगा संगठन जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर ने अधिकारियों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने सिर का पता लगाने और मृतक के उचित अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।
गृह मंत्री बोले- केवल सुरक्षा उपायों से नहीं रुकेगी हिंसा
राज्य में लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के बीच मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने गुरुवार को इंफाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती 84 बीएसएफ जवानों से मुलाकात की। इन जवानों को फूड पॉइजनिंग की आशंका के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इस दौरान गृह मंत्री ने कहा कि हिंसा रोकने के लिए केवल सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज के सभी वर्गों को भी शांति स्थापित करने में अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा, “हत्या करने से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। हमें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए और सभी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए।”
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज के लोगों को भी अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना होगा और हिंसा से दूर रहना होगा।
उनका संदेश ऐसे समय में आया है, जब राज्य के विभिन्न इलाकों में समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव के कारण शांति बहाली की कोशिशों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी
मणिपुर की सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के लिए स्पीयर कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने गुरुवार को असम राइफल्स की एक अग्रिम चौकी का दौरा किया। इस दौरान उन्हें भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात जवानों की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई।
भारत और म्यांमार के बीच करीब 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसमें लगभग 398 किलोमीटर हिस्सा मणिपुर में पड़ता है। सीमा की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों और सीमावर्ती इलाकों में उग्रवादी गतिविधियों की आशंकाओं के कारण सुरक्षा बलों के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
2028 तक सीमा पर बाड़ लगाने का लक्ष्य
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 55 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है। सरकार की योजना इस परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने की है।
हालांकि, पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों में निर्माण कार्य करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसके अलावा, सीमा के आर-पार आवाजाही करने वाले कुछ उग्रवादी समूहों के विरोध के कारण भी काम की रफ्तार प्रभावित हुई है।
सीमा पर बाड़ लगाने की परियोजना को अवैध आवाजाही और उग्रवादी गतिविधियों पर नियंत्रण की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बहाली भी महत्वपूर्ण होगी।
शांति बहाली सबसे बड़ी चुनौती
मणिपुर में ताजा हमला, नागरिकों का लापता होना और हालिया हत्याओं से जुड़े मामले राज्य की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं। लगातार हो रही हिंसा का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी सुरक्षा संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार जहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बातचीत शुरू करने पर जोर दे रही है, वहीं मौजूदा हालात में निष्पक्ष जांच, लापता लोगों की तलाश, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना अहम होगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मणिपुर में जारी जातीय तनाव को समाप्त करने के लिए सुरक्षा कार्रवाई के साथ प्रभावी संवाद की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।












