छत्तीसगढ़ में तेंदुए का हमला: 24 घंटे में 7 ग्रामीण घायल, धमतरी और कोंडागांव में दहशत

छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ के धमतरी और कोंडागांव जिलों में तेंदुए के हमलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 घंटे के भीतर दो गांवों में तेंदुए के हमले में सात ग्रामीण घायल हुए हैं। घटना के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है।
धमतरी के कारीपानी गांव में तीन ग्रामीण घायल
जानकारी के मुताबिक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के सीतानदी क्षेत्र के पास स्थित कारीपानी गांव में बुधवार देर रात तेंदुआ घुस आया। घर के बाहर आवाज सुनकर बाहर निकलीं 60 वर्षीय उर्मिला बाई मरकाम पर तेंदुए ने हमला कर दिया। उन्हें बचाने पहुंचे उनके भाई सुंदर लाल नेताम और बीच-बचाव करने आईं पड़ोसी महिला मनाई बाई भी हमले में घायल हो गईं।
तीनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए उर्मिला बाई और सुंदर लाल को धमतरी जिला अस्पताल रेफर किया गया, जबकि मनाई बाई का उपचार नगरी के अस्पताल में जारी होने की जानकारी दी गई।
कोंडागांव के बस्तर बुद्रा गांव में चार लोग घायल
कारीपानी गांव में हमले के बाद तेंदुए के कोंडागांव जिले के बस्तर बुद्रा गांव पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यहां भी तेंदुए ने चार ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वन अधिकारियों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों में हमले करने वाला तेंदुआ एक ही बताया जा रहा है। हालांकि, उसकी पहचान और वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित वन विभाग की आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए।
ड्रोन से निगरानी, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान तेज कर दिया है। तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने के लिए ड्रोन से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता तेंदुए का पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ना है, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों को सतर्क रहने, जंगल की ओर अकेले नहीं जाने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। तेंदुए की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में लोगों को बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को फिर सामने लाती है। जंगल से सटे गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही के दौरान समय पर सूचना, सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण है।












