IGKV Paper Leak: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का पेपर लीक कांड, प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार; 11 हजार में बेचने का आरोप

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। रायपुर पुलिस ने मामले की जांच के बाद एक प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले का मुख्य आरोपी दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज का प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया है। दो अन्य आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
परीक्षा से करीब दो घंटे पहले WhatsApp पर वायरल हुआ पेपर
मामला 20 अगस्त 2026 का है। IGKV से संबद्ध कृषि महाविद्यालयों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के AGCH-221 (एंटोमोलॉजी/कृषि कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा आयोजित होनी थी।
परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू होनी थी, लेकिन इससे पहले ही प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से WhatsApp पर वायरल होने की सूचना सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, 20 अगस्त की सुबह करीब 8:41 बजे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कवर्धा को ई-मेल के माध्यम से पेपर लीक की सूचना मिली। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने परीक्षा को रद्द कर दिया। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया कि प्रश्नपत्र का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर पहुंच गया था। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक करीब 60 से 70 प्रतिशत प्रश्नों के लीक होने की बात सामने आई थी।
जांच में प्रोफेसर तक पहुंची पुलिस
पेपर लीक की शिकायत के बाद रायपुर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और WhatsApp चैट की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, जांच में पेपर लीक का कनेक्शन दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज से सामने आया।
पुलिस ने दावा किया कि कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र वाले सीलबंद लिफाफे के साथ छेड़छाड़ कर अंदर मौजूद प्रश्नपत्र की तस्वीर या वीडियो हासिल किया और उसे आगे पहुंचाया। विभिन्न रिपोर्टों में लिफाफे में बारीक छेद कर मोबाइल कैमरे से प्रश्नपत्र रिकॉर्ड करने की बात सामने आई है।
11 हजार रुपये में पेपर बेचने का आरोप
पुलिस की जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र को छात्रों तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर 11 हजार रुपये में सौदा किया गया था। इसके बाद प्रश्नपत्र की जानकारी छात्रों के बीच WhatsApp के माध्यम से पहुंची।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 36 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी प्रोफेसर के अलावा पेपर खरीदने वाले छात्र भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और पुलिस की जांच को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र किस स्तर पर बाहर निकला और इसमें कितने लोग शामिल थे।
28 कृषि महाविद्यालयों की परीक्षा पर पड़ा असर
यह परीक्षा IGKV से संबद्ध कई कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जा रही थी। रिपोर्टों के अनुसार विश्वविद्यालय के अंतर्गत 28 कृषि महाविद्यालयों में यह परीक्षा होनी थी। पेपर लीक की शिकायत सामने आने के बाद हजारों छात्रों की परीक्षा प्रभावित हुई।
विश्वविद्यालय ने रद्द की गई परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक परीक्षा सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा कराए जाने की बात कही गई है। छात्रों को संशोधित परीक्षा कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेजों की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने को कहा गया है।
विश्वविद्यालय ने बनाई जांच समिति
पेपर लीक की शुरुआती शिकायत सामने आने के बाद IGKV प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी। शुरुआती रिपोर्टों में चार या पांच सदस्यीय जांच समिति बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। समिति का उद्देश्य यह पता लगाना था कि प्रश्नपत्र कहां से लीक हुआ और परीक्षा से पहले सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा।
बाद में पुलिस जांच ने मामले को नया मोड़ दिया और पुलिस ने प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।
36 घंटे में पुलिस ने खोला मामला
रायपुर पुलिस के मुताबिक, मामले में करीब 36 घंटे के भीतर कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग जिलों में भेजी गई थीं। रिपोर्टों में कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में जांच किए जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र तक आरोपियों की पहुंच कैसे बनी, उसे रिकॉर्ड करने के बाद किन लोगों को भेजा गया और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
छात्रों में नाराजगी, परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद छात्रों में नाराजगी देखने को मिली। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा की तैयारी के बाद अचानक परीक्षा रद्द होना परेशानी का कारण बना। इससे परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
कांग्रेस ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और इसे परीक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या बताया।
सीलबंद लिफाफे में छेद कर एंडोस्कोपी कैमरे से पेपर देखने का आरोप
पुलिस जांच में पेपर लीक करने के तरीके को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोप है कि प्रश्नपत्र वाले सीलबंद लिफाफे को खोले बिना उसके अंदर का प्रश्नपत्र देखने और उसकी तस्वीर/वीडियो बनाने के लिए एंडोस्कोपी कैमरे का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने लिफाफे में बेहद छोटा छेद कर उसके अंदर कैमरा डालकर प्रश्नपत्र की तस्वीरें या वीडियो हासिल किए।
एंडोस्कोपी कैमरा सामान्य तौर पर एक पतली और लचीली ट्यूब के साथ लगा छोटा कैमरा होता है, जिसका इस्तेमाल संकरी या ऐसी जगहों के अंदर देखने के लिए किया जाता है जहां सीधे देखना संभव नहीं होता। पुलिस को संदेह है कि इसी तकनीक का इस्तेमाल प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने के लिए किया गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि एंडोस्कोपी कैमरा किसने खरीदा या उपलब्ध कराया, इसका इस्तेमाल किस स्थान पर किया गया और कैमरे से रिकॉर्ड की गई प्रश्नपत्र की तस्वीरें किन-किन लोगों तक पहुंचीं। यदि जांच में यह आरोप साबित होता है तो यह मामला केवल पेपर की तस्वीर वायरल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था को योजनाबद्ध तरीके से भेदने का मामला माना जाएगा।
पेपर लीक की पूरी कड़ी पर जांच
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, डिजिटल रिकॉर्ड और लेन-देन की जानकारी की जांच कर रही है। जांच का अहम बिंदु यह भी है कि सीलबंद प्रश्नपत्र तक पहुंच रखने वाले व्यक्ति ने एंडोस्कोपी कैमरे के जरिए उसे कैसे रिकॉर्ड किया और इसके बाद पेपर को छात्रों तक पहुंचाने के लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।
इस एंगल से जांच आगे बढ़ने पर यह भी सामने आ सकता है कि पेपर लीक की साजिश में केवल आरोपी प्रोफेसर और छात्रों की भूमिका थी या विश्वविद्यालय की प्रश्नपत्र वितरण व्यवस्था से जुड़े अन्य लोग भी इसमें शामिल थे।
IGKV पेपर लीक मामले में पुलिस ने भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को मुख्य आरोपी बताया है। जांच के अनुसार, आरोप है कि सोनकेसरिया ने सीलबंद प्रश्नपत्र के लिफाफे में छोटा छेद कर एंडोस्कोपी कैमरे की मदद से अंदर रखे प्रश्नपत्र की तस्वीरें/वीडियो हासिल किए और उन्हें आगे भेजा।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में योगेश सोनकेसरिया समेत कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। आरोपियों में प्रश्नपत्र हासिल करने वाले कुछ छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, मामले में दो अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि एंडोस्कोपी कैमरा किसने उपलब्ध कराया, प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग के बाद उसे किन-किन लोगों को भेजा गया और कथित तौर पर 11 हजार रुपये के लेन-देन में कौन-कौन शामिल था।
नोट: बाकी पांच गिरफ्तार आरोपियों के नाम मैं बिना सत्यापित पुलिस रिकॉर्ड/आधिकारिक स्रोत के नहीं जोड़ूंगा, ताकि खबर में गलत नाम प्रकाशित न हो।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।
अब आगे क्या होगा?
पुलिस की जांच अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों, WhatsApp चैट और प्रश्नपत्र के प्रसार की पूरी कड़ी पर केंद्रित है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि सीलबंद प्रश्नपत्र तक प्रोफेसर की पहुंच कैसे बनी और विश्वविद्यालय की प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
फिलहाल इस मामले में प्रोफेसर समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पेपर लीक की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।












