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छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, अब Negative List से तय होगा क्या प्रतिबंधित और क्या मान्य

रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में विकास और निवेश गतिविधियों को गति देने के लिए भूमि उपयोग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। नई व्यवस्था में अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है।

 

इस बदलाव का उद्देश्य भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक नियामकीय बाधाएं और अनुपालन का बोझ कम होगा तथा प्रदेश में आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

 

क्या होगा Negative List व्यवस्था का फायदा?

 

प्रस्तावित व्यवस्था में हर भूमि उपयोग के लिए अनुमत गतिविधियों की लंबी सूची रखने के बजाय प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची तैयार की जाएगी। यानी जो गतिविधि Negative List में शामिल नहीं होगी, उसे संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी में अनुमत माना जाएगा।

 

इससे भविष्य में आने वाली नई सेवाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के लिए भी रास्ता आसान होने की उम्मीद है।

 

आवासीय क्षेत्रों में कई गतिविधियां रहेंगी प्रतिबंधित

 

आवासीय क्षेत्रों में प्रदूषणकारी उद्योग, बड़े भंडारण केंद्र, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, गैस गोदाम और खनन जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है।

 

इसके अलावा पशुपालन, मछली पालन, बड़े डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार और कब्रिस्तान जैसी गतिविधियों को भी Negative List में रखने का प्रावधान किया गया है।

 

वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी नियम स्पष्ट

 

वाणिज्यिक क्षेत्रों में खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों और विस्फोटक पदार्थों का भंडारण समेत कई असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

 

औद्योगिक क्षेत्रों में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो और गैस गोदाम जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध का प्रस्ताव है।

 

कृषि भूमि के इस्तेमाल पर भी तय होंगे प्रतिबंध

कृषि भूमि में बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित रखने का प्रस्ताव है।

सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है।

15 दिन में दे सकते हैं सुझाव और आपत्ति

प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर आपत्ति या सुझाव दिए जा सकते हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से निवेशकों के लिए नियम अधिक स्पष्ट और अनुमानित होंगे तथा प्रदेश में विकास परियोजनाओं को गति मिलने की संभावना है।

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