छत्तीसगढ़ के 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों में मिलेगा कौशल विकास प्रशिक्षण, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार का मौका

रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को कृषि क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल शुरू की गई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर प्रदेश के सभी 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से कौशल विकास प्रशिक्षण को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और कृषि आधारित संभावनाओं का इस्तेमाल करते हुए युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
27 कृषि विज्ञान केन्द्रों के लिए तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशालय विस्तार सेवाएं और कृषि कौशल परिषद, भारत के सहयोग से 8 से 12 सितंबर 2026 तक दो बैचों में प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण एवं प्रमाणन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
पहले बैच में 41 प्रतिभागियों ने 8 से 10 सितंबर तक प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। वहीं दूसरा बैच 10 से 12 सितंबर तक 42 प्रतिभागियों के साथ आयोजित किया जा रहा है। दोनों बैचों में विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सभी 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।
किन क्षेत्रों में दिया जाएगा प्रशिक्षण?
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कृषि और उससे जुड़े रोजगारपरक क्षेत्रों के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से
मशरूम उत्पादन
जैविक फसल उत्पादन
गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन
सब्जी उत्पादन
मधुमक्खी पालन
वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन
नर्सरी तैयार करना
कृषि मशीनरी का प्रदर्शन
सूक्ष्म सिंचाई तकनीक
मत्स्य पालन
मुर्गी पालन
जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से मिलेगा फायदा
प्रशिक्षण के बाद प्रमाणित मास्टर ट्रेनर मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को विभिन्न रोजगार भूमिकाओं में व्यावहारिक एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इससे कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का रास्ता मजबूत होगा।
कृषि से जुड़े छोटे कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल के जरिए भविष्य में मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, नर्सरी, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट और कृषि यंत्रीकरण जैसे क्षेत्रों में छोटे उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कौशल प्रशिक्षण को स्वरोजगार, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और कृषि उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया। वहीं निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस. एस. टुटेजा ने 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों के नेटवर्क के माध्यम से स्थानीय जरूरत और संसाधनों के अनुसार कौशल प्रशिक्षण का विस्तार करने की बात कही।
किसानों तक पहुंचेगी कृषि की उपयोगी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान कृषकोपयोगी पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ खेती’ के नए अंक का विमोचन भी किया गया। इसका उद्देश्य किसानों तक कृषि तकनीक और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है।
इस पूरी पहल से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित स्वरोजगार, स्थानीय उद्यमिता और आय बढ़ाने के अवसरों को मजबूत करने की उम्मीद है।












