
संसद के मानसून सत्र में बुधवार को दो महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी मिल गई। लोकसभा ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस (संशोधन) विधेयक पारित किया, जबकि राज्यसभा ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।
दोनों विधेयकों का उद्देश्य देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाना और बढ़ते काम के दबाव को कम करना बताया जा रहा है।
बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानून में बदलाव
लोकसभा से पारित बैंकर्स बुक्स एविडेंस (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य पुराने बैंकिंग रिकॉर्ड कानून को मौजूदा डिजिटल व्यवस्था के अनुसार अपडेट करना है।
नई व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों को कानूनी प्रक्रिया में ज्यादा स्पष्ट मान्यता मिलेगी। इससे अदालतों में बैंक रिकॉर्ड पेश करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड को स्वीकार्यता मिलने से न्यायिक मामलों में देरी कम होगी और बैंकिंग से जुड़े विवादों के निपटारे में तेजी आएगी।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे न्यायाधीश
राज्यसभा से मंजूर हुए सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने कहा है कि देश में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ को कम करने की कोशिश
सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट पर बढ़ते मुकदमों के दबाव को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिक संख्या में बेंच गठित की जा सकेंगी, जिससे पुराने लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब इन विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद दोनों विधेयक कानून का रूप ले लेंगे और नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। इन बदलावों से बैंकिंग और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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