
जन्म के शुरुआती दिनों में भी देखने के पैटर्न में अंतर, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नवजात शिशुओं की दृश्य पसंद पर की रिसर्च
क्या नवजात शिशु भी अपने आसपास की चीजों में किसी तरह की पसंद दिखाते हैं? जन्म के बाद जब बच्चा पहली बार दुनिया को देखना शुरू करता है, तो वह किन चीजों पर ज्यादा ध्यान देता है—इंसानी चेहरों पर या आसपास मौजूद वस्तुओं पर? ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक स्टडी ने इस सवाल को लेकर दिलचस्प जानकारी सामने रखी है।
रिसर्च में नवजात लड़के और लड़कियों के देखने के पैटर्न में अंतर देखने को मिला। अध्ययन के मुताबिक, नवजात बच्चियों ने अपेक्षाकृत अधिक समय इंसानी चेहरों को देखने में बिताया, जबकि नवजात लड़कों का ध्यान वस्तुओं की ओर अधिक देखा गया।
क्या सच में नवजात बच्चों की होती है पसंद?
नवजात बच्चे जन्म के बाद लगातार अपने आसपास की दुनिया को समझने की कोशिश करते हैं। उनकी देखने की क्षमता शुरुआती दौर में पूरी तरह विकसित नहीं होती, लेकिन वे रोशनी, आकार, गति और चेहरे जैसी चीजों पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
इसी वजह से शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि क्या जन्म के शुरुआती चरण में ही बच्चों के देखने के तरीके में कोई अंतर दिखाई देता है।
बच्चियों का चेहरों की ओर ज्यादा ध्यान
स्टडी के मुताबिक, नवजात बच्चियों ने इंसानी चेहरों को देखने में अपेक्षाकृत अधिक रुचि दिखाई। वहीं नवजात लड़कों का ध्यान वस्तुओं की तरफ ज्यादा देखा गया।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बच्ची केवल चेहरा देखना पसंद करती है या हर बच्चा वस्तुओं में ही दिलचस्पी रखता है। यह शोध समूहों के बीच देखे गए औसत व्यवहार के अंतर को दर्शाता है।
इसके पीछे क्या हो सकता है कारण?
शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि अगर जन्म के शुरुआती समय में ही ऐसा अंतर दिखाई देता है, तो इसके पीछे वजह क्या हो सकती है।
इस तरह के व्यवहार को लेकर वैज्ञानिकों ने जैविक और सामाजिक दोनों संभावनाओं पर चर्चा की है। हालांकि, केवल इस तरह के शुरुआती दृश्य व्यवहार के आधार पर बच्चों की भविष्य की रुचि, व्यक्तित्व या क्षमता के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
स्टडी से क्या समझना जरूरी है?
इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नवजात बच्चों के व्यवहार में छोटे-छोटे अंतर भी वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय हो सकते हैं। बच्चों के देखने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को समझने से शुरुआती विकास को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
साथ ही, विशेषज्ञों के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अध्ययनों के परिणामों को सामान्य नियम की तरह न देखा जाए। हर बच्चा अलग होता है और उसके विकास पर कई जैविक, पारिवारिक और पर्यावरणीय कारकों का प्रभाव पड़ता है।












