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22 सितंबर से छत्तीसगढ़ में थम सकते हैं बसों के पहिए, 12 हजार यात्री बसों पर सं

लंबित मांगों को लेकर यातायात महासंघ ने अनिश्चितकालीन बस महाबंद का ऐलान किया है। करीब 800 बस ऑपरेटर आंदोलन में शामिल होने की तैयारी में हैं, जिससे प्रदेशभर में लाखों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 22 सितंबर से यात्री बसों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ सकता है। अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन बस महाबंद की चेतावनी दी है। महासंघ के मुताबिक मांगों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में प्रदेश के करीब 800 बस ऑपरेटर आंदोलन में शामिल होंगे।

संगठन का दावा है कि हड़ताल की स्थिति में लगभग 12 हजार यात्री बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। इससे रोजाना बसों पर निर्भर रहने वाले लाखों यात्रियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बस स्टैंडों पर खड़ी की जाएंगी बसें

महासंघ के अनुसार, 22 सितंबर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बसों को बस स्टैंडों पर खड़ा कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। ऑपरेटरों का कहना है कि किराया, टैक्स, परमिट, फिटनेस और बस संचालन से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर लंबे समय से शासन के समक्ष मांग रखी जा रही है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।

यात्री किराया बढ़ाने की मांग

बस संचालकों की सबसे प्रमुख मांग यात्री किराए में बढ़ोतरी की है। ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की कीमत, बसों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन खर्च बढ़ने के बावजूद मौजूदा किराए के हिसाब से बस चलाना मुश्किल हो रहा है।

इसके साथ ही सिंगल स्लीपर बसों पर सिंगल टैक्स लागू करने की मांग भी की गई है।

ई-बस और टूरिस्ट बसों को लेकर भी आपत्ति

महासंघ ने ई-बसों के संचालन को निर्धारित सीमा में रखने की मांग की है। इसके अलावा ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण क्षेत्रों और बस स्टैंडों में संचालन को लेकर भी नियम तय करने की मांग की गई है।

संगठन का कहना है कि स्टेट कैरिज बसों के नए परमिट जारी करने से पहले रूट के समय चक्र की समीक्षा जरूरी है। दो बसों के बीच पर्याप्त अंतराल तय होने से संचालन व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

फिटनेस और ऑनलाइन परमिट की मांग

बस ऑपरेटरों ने VITD डिवाइस के नवीनीकरण शुल्क को कम करने की मांग रखी है। इसके अलावा फिटनेस सेंटर पूरी तरह तैयार होने तक RTO कार्यालयों को मैनुअल फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति देने की मांग की गई है।

महासंघ चाहता है कि यात्री बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की सुविधा भी शुरू की जाए, ताकि परमिट से संबंधित प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो सके।

काउंटर सिग्नेचर व्यवस्था पर नाराजगी

दूसरे राज्यों में बसों के संचालन से जुड़ी काउंटर सिग्नेचर व्यवस्था भी महासंघ की मांगों में शामिल है। संगठन का कहना है कि जिन राज्यों में छत्तीसगढ़ की बसों को संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वहां की व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

महासंघ ने ओडिशा समेत दूसरे राज्यों में बस संचालन से जुड़े मामलों में उचित नियंत्रण और समाधान की मांग की है।

सरकार से जल्द समाधान की अपील

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सैयद अनवर अली ने कहा कि बस संचालक लंबे समय से अपनी समस्याओं को शासन के सामने रखते आ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को आगे जारी रखा जाएगा।

उन्होंने परिवहन विभाग और सरकार से 22 सितंबर से पहले बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है।

ये हैं बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें

  • यात्री बसों का किराया बढ़ाया जाए।
  • सिंगल स्लीपर बसों पर सिंगल टैक्स लागू किया जाए।
  • ई-बसों का संचालन निर्धारित सीमा में रखा जाए।
  • ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बसों के संचालन को नियंत्रित किया जाए।
  • स्टेट कैरिज बसों के समय चक्र और बसों के बीच अंतराल की समीक्षा हो।
  • VITD डिवाइस के रिन्यूअल शुल्क में कमी की जाए।
  • फिटनेस सेंटर शुरू होने तक मैनुअल फिटनेस प्रमाणपत्र की सुविधा दी जाए।
  • काउंटर सिग्नेचर व्यवस्था में सुधार किया जाए।
  • सभी यात्री बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

अगर 22 सितंबर से पहले सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो प्रदेश में अनिश्चितकालीन बस महाबंद शुरू हो सकता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

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