BusinessInternationalLatestNational

WhatsApp पर 1 अक्टूबर से हर मैसेज के 14 पैसे? जानिए किसे देना होगा पैसा और किसे नहीं

WhatsApp की नई मैसेजिंग फीस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। हालांकि, इसका असर सामान्य यूजर्स पर नहीं बल्कि WhatsApp Business Platform का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर पड़ेगा।

नई दिल्ली। WhatsApp पर 1 अक्टूबर 2026 से हर मैसेज के लिए 14 पैसे वसूले जाने की खबरों ने यूजर्स के बीच चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर कई जगह दावा किया जा रहा है कि अब WhatsApp पर मैसेज भेजने के लिए पैसे देने होंगे। हालांकि, मामला इतना सीधा नहीं है।

दरअसल, सामान्य WhatsApp यूजर्स के लिए प्रति मैसेज 14 पैसे का कोई नया चार्ज लागू नहीं हो रहा है। यह बदलाव मुख्य रूप से WhatsApp Business Platform पर लागू होने वाली Meta की मैसेजिंग फीस से जुड़ा है। यानी इसका सीधा असर उन कंपनियों, संस्थानों और कारोबारियों पर पड़ सकता है जो WhatsApp के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों को मैसेज भेजते हैं।

1 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?

Meta ने WhatsApp Business Platform की मैसेजिंग कीमतों में बदलाव किया है। इसके तहत कुछ तरह के बिजनेस मैसेज के लिए कंपनियों से प्रति डिलीवर मैसेज शुल्क लिया जाता है।

भारत में कुछ श्रेणियों के संदेशों के लिए बेस रेट लगभग 11.5 पैसे प्रति मैसेज है। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि करीब 14 पैसे तक पहुंच सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि WhatsApp इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति अपने भेजे गए प्रत्येक संदेश के लिए 14 पैसे देगा।

आम WhatsApp यूजर को नहीं देना होगा पैसा

अगर आप अपने मोबाइल में सामान्य WhatsApp इस्तेमाल करते हैं और दोस्तों, रिश्तेदारों या किसी ग्रुप में मैसेज भेजते हैं, तो आपको 1 अक्टूबर से हर मैसेज के लिए 14 पैसे नहीं देने होंगे।

आप पहले की तरह सामान्य WhatsApp चैट, ग्रुप चैट, फोटो, वीडियो और दूसरे मैसेजिंग फीचर्स का इस्तेमाल कर सकेंगे।

इसलिए “1 अक्टूबर से WhatsApp पर हर मैसेज 14 पैसे का हो जाएगा” कहना भ्रामक होगा।

फिर 14 पैसे किससे लिए जाएंगे?

यह शुल्क मुख्य रूप से उन कारोबारियों और संस्थानों से संबंधित है जो WhatsApp Business Platform/API के जरिए बड़े पैमाने पर ग्राहकों को संदेश भेजते हैं।

उदाहरण के तौर पर किसी कंपनी के पास 1 लाख ग्राहकों के नंबर हैं और वह WhatsApp API के माध्यम से उन्हें बड़ी संख्या में बिजनेस मैसेज भेजती है। ऐसे मामलों में Meta की तय मैसेजिंग कैटेगरी और दर के अनुसार शुल्क लगाया जा सकता है।

यानी यहां भुगतान सामान्य WhatsApp यूजर नहीं, बल्कि बिजनेस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे WhatsApp Business Platform से जुड़ा है।

सभी बिजनेस मैसेज की कीमत एक जैसी नहीं

WhatsApp Business Platform पर मैसेज अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं। इनमें मार्केटिंग, यूटिलिटी, ऑथेंटिकेशन और सर्विस मैसेज शामिल हैं।

मार्केटिंग मैसेज:
ऑफर, डिस्काउंट, प्रमोशन या विज्ञापन जैसी जानकारी भेजने वाले संदेश।

यूटिलिटी मैसेज:
ऑर्डर कन्फर्मेशन, बुकिंग, बिल या किसी सेवा से जुड़ी जानकारी।

ऑथेंटिकेशन मैसेज:
ओटीपी और पहचान सत्यापन जैसे संदेश।

सर्विस मैसेज:
ग्राहक की बातचीत या अनुरोध के जवाब में भेजे जाने वाले सेवा संबंधी संदेश।

इन अलग-अलग श्रेणियों पर शुल्क अलग हो सकता है।

सबसे ज्यादा शुल्क प्रमोशनल मैसेज पर

बिजनेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंतर मार्केटिंग मैसेज में है। कंपनियां अगर ग्राहकों को ऑफर, सेल, डिस्काउंट या दूसरे प्रचारात्मक संदेश भेजती हैं तो इन पर सामान्य उपयोगिता या सेवा संदेशों की तुलना में ज्यादा शुल्क हो सकता है।

यही कारण है कि बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, बैंक, ट्रैवल कंपनियां, एजुकेशन संस्थान और दूसरे व्यवसाय अपने WhatsApp मैसेजिंग खर्च को लेकर इस बदलाव पर नजर रख रहे हैं।

क्या OTP भी महंगा होगा?

ऑथेंटिकेशन या OTP से जुड़े संदेशों के लिए भी WhatsApp Business Platform पर शुल्क लागू हो सकता है। हालांकि, यह शुल्क सामान्य WhatsApp यूजर से सीधे नहीं लिया जाता।

जब कोई वेबसाइट या ऐप WhatsApp के जरिए OTP भेजती है, तो उस सेवा को उपलब्ध कराने वाली कंपनी WhatsApp Business Platform और संबंधित सेवा प्रदाता के शुल्क का भुगतान करती है।

बाद में कंपनी चाहे तो अपनी सेवा की कीमत में इस खर्च को शामिल कर सकती है।

WhatsApp Business App और WhatsApp Business Platform में अंतर

यहीं सबसे ज्यादा भ्रम पैदा होता है।

WhatsApp Business App एक सामान्य ऐप है जिसका इस्तेमाल छोटे कारोबारी ग्राहकों से बातचीत करने के लिए कर सकते हैं।

वहीं WhatsApp Business Platform/API बड़े पैमाने पर स्वचालित संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर, वेबसाइट, CRM और दूसरे सिस्टम को WhatsApp से जोड़ सकती हैं।

1 अक्टूबर से जिस मैसेजिंग शुल्क की चर्चा हो रही है, उसका संबंध मुख्य रूप से इसी Business Platform से है।

न्यूज वेबसाइट और डिजिटल मीडिया के लिए भी महत्वपूर्ण

इस बदलाव का असर उन डिजिटल संस्थानों पर भी पड़ सकता है जो WhatsApp Business Platform का इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में पाठकों को न्यूज अपडेट भेजते हैं।

उदाहरण के लिए किसी न्यूज वेबसाइट के पास हजारों या लाखों सब्सक्राइबर हैं और वह WhatsApp API के जरिए उन्हें खबरों के लिंक या अपडेट भेजती है। ऐसे मामलों में मैसेज की संख्या और उसकी कैटेगरी के आधार पर लागत बढ़ सकती है।

इसलिए डिजिटल मीडिया संस्थानों को WhatsApp से न्यूज वितरण की अपनी मौजूदा व्यवस्था और लागत की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।

क्या WhatsApp पूरी तरह पेड हो रहा है?

नहीं।

WhatsApp का सामान्य इस्तेमाल बंद नहीं हो रहा है और न ही सामान्य यूजर्स के लिए प्रत्येक मैसेज पर 14 पैसे का चार्ज लगाया जा रहा है।

1 अक्टूबर से होने वाला बदलाव मुख्य रूप से बिजनेस मैसेजिंग के शुल्क ढांचे से संबंधित है।

इसलिए अगर कोई संदेश सोशल मीडिया पर यह दावा करता है कि “अब WhatsApp पर चैट करने के लिए हर मैसेज के 14 पैसे देने होंगे”, तो यह सही तस्वीर नहीं बताता।

आसान भाषा में समझिए

आप → दोस्त को WhatsApp मैसेज: कोई 14 पैसे प्रति मैसेज चार्ज नहीं।

आप → WhatsApp ग्रुप में मैसेज: कोई नया 14 पैसे प्रति मैसेज चार्ज नहीं।

कंपनी → ग्राहक को WhatsApp Business Platform से मैसेज: संबंधित कैटेगरी के अनुसार Meta का शुल्क लग सकता है।

यानी WhatsApp इस्तेमाल करने वाले करोड़ों सामान्य यूजर्स को इस बदलाव से सीधे परेशान होने की जरूरत नहीं है। असली बदलाव बिजनेस द्वारा बड़े पैमाने पर भेजे जाने वाले संदेशों की लागत में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button