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ब्रिटेन में 72 घंटे का राशन रखने की सलाह, आखिर क्यों बढ़ी चिंता?

ब्रिटेन सरकार ने लोगों को घर में कम से कम तीन दिन यानी 72 घंटे के लिए खाना, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और अन्य सामान रखने की सलाह दी है। सरकार के ‘बी रेडी’ अभियान का मकसद लोगों को ऐसी आपात स्थितियों के लिए तैयार करना है, जिनमें बिजली, पानी, इंटरनेट और रोजमर्रा की सेवाएं ठप हो सकती हैं। साइबर हमले, प्राकृतिक आपदाएं और जरूरी सेवाओं में रुकावट जैसी आशंकाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकार ने ऐसी तैयारी करने को क्यों कहा है? क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है? जानिए पूरा मामला।

सरकार को क्यों करनी पड़ रही है ऐसी तैयारी?

ब्रिटेन सरकार के मुताबिक, खराब मौसम, बाढ़, जंगलों में आग और साइबर हमलों जैसी घटनाएं आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकती हैं। अगर बिजली या पानी की आपूर्ति बाधित हो जाए, तो घरों में खाना बनाने, मोबाइल चार्ज करने और साफ-सफाई जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, इंटरनेट या डिजिटल भुगतान व्यवस्था में गड़बड़ी होने पर दुकानों से सामान खरीदने और बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी आ सकती है।

ऐसी आपात स्थितियों में राहत और बचाव दलों को हर व्यक्ति तक तुरंत पहुंचने में समय लग सकता है। इसलिए सरकार चाहती है कि लोग शुरुआती तीन दिनों तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी करने की तैयारी रखें। यह सलाह किसी निश्चित हमले की घोषणा नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के संकटों से निपटने की तैयारी के तौर पर दी गई है।

हर व्यक्ति के लिए कितना पानी और खाना जरूरी?

ब्रिटिश सरकार की सलाह के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए रोजाना लगभग तीन लीटर पीने का पानी रखने की योजना बनाई गई है। इस हिसाब से तीन दिन के लिए प्रति व्यक्ति नौ लीटर पानी चाहिए। खाना बनाने और दूसरी जरूरतों के लिए अतिरिक्त पानी की आवश्यकता हो सकती है।

भोजन में ऐसे सामान को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो जल्दी खराब न हो और जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से खाया जा सके। डिब्बाबंद सब्जियां, मांस या मछली, सूखे मेवे और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले खाद्य पदार्थ इसमें शामिल हो सकते हैं। परिवार के सदस्यों की संख्या, बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों के अनुसार सामान की मात्रा तय करनी चाहिए।

घर में किन जरूरी चीजों का इंतजाम रखें?

पानी और खाने के अलावा घर में टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, कंबल, गर्म कपड़े और प्राथमिक उपचार किट रखना उपयोगी हो सकता है। बिजली या इंटरनेट बंद होने की स्थिति में जानकारी पाने के लिए बैटरी या हाथ से चलने वाला रेडियो और मोबाइल चार्ज करने के लिए पावर बैंक भी काम आ सकते हैं।

इसके साथ कुछ नकदी, जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां और नियमित रूप से ली जाने वाली दवाएं भी रखनी चाहिए। छोटे बच्चों वाले परिवारों को दूध, डायपर और अन्य जरूरी सामान का इंतजाम करना चाहिए। पालतू जानवर हैं, तो उनके लिए भी भोजन और पानी रखना जरूरी है। हैंड सैनिटाइजर और सफाई से जुड़ी चीजें भी आपातकालीन सामान में शामिल की जा सकती हैं।

सरकार की सलाह का एक अहम हिस्सा यह भी है कि लोग एक ही बार में सारा सामान खरीदने के बजाय धीरे-धीरे तैयारी कर सकते हैं। समय-समय पर खाने-पीने की चीजों की समाप्ति तिथि जांचना और परिवार की बदलती जरूरतों के अनुसार सामान अपडेट करना भी जरूरी है।

साइबर हमलों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

आधुनिक जीवन में बैंकिंग, खरीदारी, संचार और कई जरूरी सेवाएं डिजिटल प्रणालियों पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी बड़े साइबर हमले या तकनीकी गड़बड़ी से भुगतान व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। अगर दुकानों में डिजिटल भुगतान काम करना बंद कर दे या एटीएम उपलब्ध न हों, तो लोगों को जरूरी सामान खरीदने में मुश्किल हो सकती है।

ब्रिटेन में सॉफ्टवेयर सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियों और साइबर खतरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, किसी एक सुरक्षा खामी का सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि देश की सभी सेवाएं ठप होने वाली हैं। सरकार की तैयारी का उद्देश्य संभावित जोखिमों के असर को कम करना है।

क्या यह युद्ध की तैयारी है?

ब्रिटेन की इस सलाह को सीधे युद्ध या किसी निश्चित हमले की चेतावनी मानना सही नहीं होगा। इसका दायरा प्राकृतिक आपदाओं, बिजली-पानी की आपूर्ति में रुकावट और साइबर हमलों जैसी कई परिस्थितियों तक फैला है। यूरोप के अन्य देशों और यूरोपीय संघ में भी लोगों को आपात स्थिति के लिए लगभग 72 घंटे का जरूरी सामान तैयार रखने की सलाह दी जाती रही है।

ब्रिटेन में जिन लोगों को बिजली या पानी की सेवा बाधित होने पर विशेष सहायता की जरूरत पड़ सकती है, उन्हें संबंधित सेवा प्रदाताओं की प्राथमिकता सहायता सूची में पंजीकरण कराने की सलाह भी दी जाती है। इससे संकट के दौरान पात्र लोगों तक मदद पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।

कुल मिलाकर, तीन दिन का खाना-पानी रखने की सलाह का मकसद लोगों को डराना नहीं, बल्कि संकट के शुरुआती समय में आत्मनिर्भर बनाना है। आपात स्थिति कब और किस रूप में आएगी, इसका अनुमान हमेशा नहीं लगाया जा सकता। लेकिन पानी, भोजन, दवाएं, रोशनी और जरूरी दस्तावेजों की पहले से व्यवस्था होने पर मुश्किल समय का सामना करना आसान हो सकता है।

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