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मुंह का संक्रमण दिल तक कैसे पहुंचता है? जानिए जीभ और हार्ट का कनेक्शन

दिल की बीमारियों को अक्सर बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आज कम उम्र के लोग भी हृदय संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में खानपान, व्यायाम और नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ मुंह और दांतों की सफाई पर ध्यान देना भी जरूरी है। खराब मौखिक स्वास्थ्य का असर केवल दांतों और मसूड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में यह हृदय के स्वास्थ्य से भी जुड़ सकता है। आखिर मुंह में पनपने वाले बैक्टीरिया दिल को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? क्या जीभ का दिल से कोई सीधा संबंध है? आइए जानते हैं पूरा मामला।

जीभ और दिल के बीच क्या है संबंध?

जीभ की मांसपेशियों और दिल के बीच ऐसा कोई सीधा शारीरिक जुड़ाव नहीं है, जिससे जीभ का संक्रमण सीधे दिल तक पहुंच जाए। हालांकि, शरीर में कुछ तंत्रिकाएं मस्तिष्क से निकलकर गर्दन और छाती के अंगों तक जाती हैं। इनमें वेगस तंत्रिका भी शामिल है, जो हृदय की गति को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि तंत्रिकाओं का संबंध और संक्रमण का फैलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

मुंह में मौजूद बैक्टीरिया कुछ स्थितियों में रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। दुर्लभ मामलों में ये हृदय की अंदरूनी परत या हृदय के वाल्व तक पहुंचकर गंभीर संक्रमण पैदा कर सकते हैं। इस बीमारी को संक्रामक एंडोकार्डाइटिस कहा जाता है। इसका खतरा खासतौर पर कुछ हृदय रोगों से पीड़ित लोगों या कृत्रिम हृदय वाल्व वाले मरीजों में अधिक हो सकता है।

खराब ओरल हेल्थ दिल के लिए क्यों बन सकती है चिंता?

नवजीवन अस्पताल के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, मुंह की स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। दांतों और मसूड़ों में लंबे समय तक संक्रमण या सूजन रहने पर बैक्टीरिया के रक्तप्रवाह में पहुंचने की आशंका हो सकती है। कुछ मामलों में इससे हृदय के वाल्व प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति के मुंह का संक्रमण दिल की बीमारी पैदा करेगा।

शोध में भी मुंह के सूक्ष्मजीवों और हृदय के स्वास्थ्य के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है। वर्ष 2022 के एक अध्ययन में जीभ पर मौजूद सूक्ष्मजीवों और हृदय के स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध की चर्चा हुई। हृदय की विफलता से पीड़ित लोगों की जीभ पर मौजूद सूक्ष्मजीवों में भी स्वस्थ लोगों की तुलना में अंतर देखा गया है। हालांकि, ऐसे निष्कर्ष अपने आप में यह साबित नहीं करते कि जीभ पर मौजूद बैक्टीरिया ही हृदय रोग का कारण हैं।

मुंह की सफाई के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए दिन में दो बार लगभग दो मिनट तक ब्रश करें। दांतों के साथ जीभ की सफाई भी करें और दांतों के बीच फंसे भोजन को निकालने के लिए रोजाना दंत-सूत्र यानी फ्लॉस का इस्तेमाल करें। जरूरत के अनुसार दंत चिकित्सक की सलाह से माउथवॉश का उपयोग किया जा सकता है। ब्रश के रेशे घिसने पर उसे बदलें और आमतौर पर हर तीन से चार महीने में नया ब्रश लें।

साल में एक या दो बार दांतों की जांच कराना उपयोगी है। यदि मसूड़ों से बार-बार खून आता है, उनमें सूजन या दर्द है, मुंह से लगातार दुर्गंध आती है या दांतों में सड़न दिखाई देती है, तो दंत चिकित्सक से सलाह लें। मुंह में कोई घाव या छाला दो सप्ताह तक ठीक न हो, तो भी जांच कराना जरूरी है।

क्या रखें ध्यान?

मुंह की अच्छी सफाई हृदय सहित पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह हृदय रोग से बचाव की गारंटी नहीं है। रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, खानपान और शारीरिक गतिविधि जैसे दूसरे कारक भी दिल की सेहत पर असर डालते हैं। सीने में दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

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