रीना अख्तर के डिपोर्ट होने के बाद छत्तीसगढ़ में तेज हुई जांच, 250 संदिग्धों की पहचान

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से बांग्लादेशी नागरिक रीना अख्तर को देश से डिपोर्ट किए जाने के बाद पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए अभियान तेज कर दिया है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम ने पिछले एक साल में करीब 32 हजार व्यक्तियों से जुड़े स्कैन किए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 250 संदिग्ध लोगों को चिह्नित किया गया है। अब उनकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
एसटीएफ की इस कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध लोगों की नागरिकता, पते और अन्य संबंधित जानकारियों की पुष्टि करना है। अधिकारियों के अनुसार, केवल संदिग्ध के रूप में चिह्नित होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति बांग्लादेशी नागरिक है। इसके लिए दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध जानकारियों की जांच की जा रही है।
एसटीएफ की टीम ने संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद और अन्य क्षेत्रों में खोज अभियान चलाया। इस दौरान संबंधित व्यक्तियों की ओर से बताए गए पतों और उनके परिजनों से जुड़ी जानकारियों का सत्यापन किया गया। प्राप्त सूचनाओं का दस्तावेजीकरण भी किया गया है।
पुलिस अब अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारियों का आपस में मिलान कर रही है, ताकि संबंधित व्यक्तियों की पहचान और नागरिकता की स्थिति स्पष्ट हो सके। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
एएसपी सिटी शोभराज अग्रवाल के अनुसार, अभियान के तहत सालभर में करीब 32 हजार व्यक्तियों से संबंधित आंकड़ों की जांच की गई और 250 से अधिक लोगों को चिह्नित किया गया। एसटीएफ की सहायता से उनके दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
रीना अख्तर को डिपोर्ट किए जाने के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत पुलिस अब संदिग्धों की पहचान से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चिह्नित लोगों में से कितने व्यक्तियों के दस्तावेजों में अनियमितताएं हैं और किन मामलों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।












