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शिवा शर्मा की मौत का राज खुलेगा? चौथी मंजिल से पुतला गिराकर जांच करेगी पुलिस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। शिवा की मौत हत्या थी, आत्महत्या या कोई हादसा, इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए पुलिस अब घटनास्थल पर पूरी घटना को दोबारा समझने की तैयारी कर रही है। इसके तहत फॉरेंसिक टीम शिवा की कद-काठी और वजन के हिसाब से तैयार पुतले को इमारत की चौथी मंजिल से गिराकर उसकी दिशा, दूरी और गिरने के कोण का विश्लेषण करेगी।

चौथी मंजिल से गिराया जाएगा पुतला

 

पुलिस की इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह समझना है कि चौथी मंजिल से गिरने पर पुतला किस दिशा में और कितनी दूरी पर पहुंचता है। इसके बाद नतीजों का मिलान घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से किया जाएगा। जांच में इमारत की बनावट, ऊंचाई और उस स्थान को भी ध्यान में रखा जाएगा, जहां शिवा गिरे हुए मिले थे।

फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उपलब्ध साक्ष्य किसी व्यक्ति के खुद नीचे कूदने, दुर्घटनावश गिरने या धक्का दिए जाने की संभावनाओं के बारे में क्या संकेत देते हैं। हालांकि, केवल पुतले के परीक्षण से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना पर्याप्त नहीं होगा। इसके परिणामों को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखना जरूरी होगा।

9 अक्टूबर को हुई थी शिवा की मौत

शिवा शर्मा की 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में प्राग नारायण रोड स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। वह कैफे और खानपान के कारोबार से जुड़े थे। घटना के बाद उनकी मां रंजना शर्मा ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और अन्य संबंधित लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का दावा है कि शिवा के साथ मारपीट की गई और उन्हें इमारत से नीचे फेंका गया।

दूसरी ओर, श्रद्धा दुबे ने गिरफ्तारी से पहले सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में दावा किया था कि शिवा ने आत्महत्या की थी। इस तरह मामले में परिवार के आरोप और आरोपी पक्ष का दावा एक-दूसरे से अलग हैं। पुलिस इन्हीं दावों की जांच साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम में शिवा के शरीर पर कई गंभीर आंतरिक चोटें पाई गई थीं। मौत का कारण शॉक और रक्तस्राव बताया गया था। हालांकि, चोटों और मौत के कारण से अपने आप यह साबित नहीं होता कि शिवा को धक्का दिया गया था या उन्होंने खुद छलांग लगाई थी। इस अंतर को स्पष्ट करने के लिए फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों का मिलान महत्वपूर्ण है।

सीसीटीवी फुटेज से भी मिले अहम सुराग

25 अक्टूबर को सामने आई एक रिपोर्ट में मई 2026 के दो सीसीटीवी वीडियो का उल्लेख किया गया। इनमें से एक में शिवा शर्मा, श्रद्धा दुबे और रश्मि दुबे अपार्टमेंट की सीढ़ियों से नीचे जाते दिखाई देते हैं। दूसरे वीडियो में श्रद्धा सुबह लगभग 5 बजकर 26 मिनट पर पार्टी के कपड़ों में फ्लैट लौटती नजर आती हैं। ये फुटेज शिवा की मौत से करीब साढ़े चार महीने पहले के बताए गए हैं।

इन वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियां अपने आप में 9 अक्टूबर की घटना का पूरा विवरण नहीं देतीं। जांच के लिहाज से इनकी प्रासंगिकता अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित समय के घटनाक्रम के साथ मिलान करने पर ही स्पष्ट होगी।

तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश की जमानत याचिकाएं अदालत ने खारिज कर दी थीं। तीनों को गिरफ्तार किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अदालत ने मामले की गंभीरता और सुनवाई के अधिकार क्षेत्र से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा। जमानत खारिज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

अब किस बात का इंतजार?

अब पुलिस की जांच में घटनास्थल के साक्ष्य, पुतले के जरिए किए जाने वाले परीक्षण के नतीजे, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयान अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन सभी पहलुओं का आपस में मिलान करके ही घटना की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर शिवा शर्मा की मौत को अंतिम रूप से हत्या या आत्महत्या घोषित नहीं किया जा सकता। मामले का वास्तविक निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।

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