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सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भी आंध्र प्रदेश में चुनावी हिंसा! 45 घटनाएं, 54 आरोपी

डिजिटल डेस्क, अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के नामांकन के दौरान हिंसा, पथराव और उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने की घटनाओं ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पुलिस के मुताबिक, दो दिनों में चुनाव से जुड़ी 45 घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं में कई लोग घायल हुए, वाहनों में आगजनी की गई और उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोप भी सामने आए हैं। मामले में कम से कम 54 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

दो दिनों में 45 घटनाएं, कई जिलों में तनाव

पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता के अनुसार, 22 अक्टूबर को 13 जिलों में 31 चुनाव संबंधी घटनाएं सामने आईं। इनमें हिंसा, झड़प, कानून-व्यवस्था बिगड़ने और नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने के मामले शामिल थे। इसके बाद 23 अक्टूबर को आठ जिलों में 14 और घटनाएं दर्ज की गईं। इस तरह दो दिनों में कुल संख्या 45 तक पहुंच गई।

पुलिस के अनुसार, शुरुआती घटनाओं में 22 मामले हिंसा, झड़प या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से संबंधित थे, जबकि नौ घटनाएं नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने से जुड़ी थीं। अन्य घटनाओं में भी चुनावी प्रक्रिया में बाधा और तोड़फोड़ की शिकायतें सामने आईं।

नामांकन पत्र छीने, वाहनों में आगजनी

स्थानीय मीडिया और पुलिस की रिपोर्टों के अनुसार, कई जगहों पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने की घटनाएं हुईं। कुछ स्थानों पर पथराव और लाठी-डंडों से हमले किए गए। चार वाहनों में आग लगाए जाने, दो आवासीय परिसरों पर हमले और एक स्थान पर मशीन से मकान को नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई। एक घटना में पुलिस वाहन पर पथराव हुआ, जिसमें एक पुलिसकर्मी के सिर में गंभीर चोट आई। एक उम्मीदवार समेत दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है।

पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए तीन बार लाठीचार्ज करना पड़ा और दो आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इन घटनाओं के बाद संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

पूर्व मंत्री वी. रजनी को रोके जाने का आरोप

हिंसा के बीच वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की नेता और पूर्व मंत्री वी. रजनी से जुड़ा मामला भी सामने आया। आरोप है कि चिलकलुरिपेट में पुलिस ने उन्हें उम्मीदवार से मिलने नहीं दिया। बाहर निकलने की कोशिश के दौरान उनके साथ धक्कामुक्की हुई और वह गिर गईं। इस घटना को लेकर विपक्ष ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।

इसी तरह गुट्टकल में पार्टी की स्थानीय प्रभारी नैऋति रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोकने की कोशिश की। खबरों के मुताबिक, वह पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहनकर नामांकन केंद्र पहुंचीं। इन आरोपों पर भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को क्या निर्देश दिए?

नामांकन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को कथित तौर पर रोके जाने और हिंसा की शिकायतें सामने आने के बाद वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने न्यायालय का रुख किया। 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को शिकायतों और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके, वहां समयसीमा बढ़ाने पर विचार किया जाए।

अदालत ने अंतिम उम्मीदवार सूची का प्रकाशन 25 अक्टूबर तक टालने और राज्य के पुलिस महानिदेशक को सुरक्षा मांगने वाले उम्मीदवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इसके बाद चुनाव आयोग ने कडपा, तिरुपति, राजमपेट और मैदुकुर के चार स्थानीय निकायों में 23 और 24 अक्टूबर को नए सिरे से नामांकन दाखिल करने का अवसर दिया।

इसके अतिरिक्त, राज्य चुनाव आयोग ने 13 नगर निगमों और 87 नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों सहित कुल 100 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया था। चुनावी प्रक्रिया और नामांकन से संबंधित शिकायतों की समीक्षा इस घटनाक्रम का अहम हिस्सा बनी हुई है।

 टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस आमने-सामने

हिंसा को लेकर सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी और विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। वाईएसआर कांग्रेस का आरोप है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने उसके उम्मीदवारों को डराया-धमकाया और नामांकन दाखिल करने से रोका। पार्टी ने पुलिस पर भी पक्षपात का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं ने विपक्ष पर चुनाव प्रक्रिया बाधित करने और अशांति फैलाने के आरोप लगाए हैं। सत्तारूढ़ पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उसके कार्यकर्ताओं पर भी हिंसा में शामिल होने का आरोप लगाया है। इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

पुलिस ने दर्ज किए मामले, सीसीटीवी से पहचान

पुलिस ने कम से कम 16 मामले दर्ज किए हैं, जबकि 11 अन्य घटनाओं से जुड़े मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी बताई गई। कम से कम 54 लोगों को आरोपी बनाया गया है और कुछ लोगों को घटनास्थल से पकड़ा गया। पुलिस वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों की मदद से हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर रही है।

पुलिस महानिदेशक ने चेतावनी दी है कि चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने, हिंसा करने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ राजनीतिक संबद्धता से परे कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील नामांकन केंद्रों और गांवों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अब आगे क्या होगा?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष तरीके से चुनाव लड़ने का अवसर मिल पाएगा। नामांकन से वंचित रहने की शिकायतों की जांच, अतिरिक्त समय में दाखिल किए गए पर्चों की समीक्षा और हिंसा के आरोपों पर कार्रवाई से चुनाव की आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्टों के अनुसार, मतदान की तारीख 1 नवंबर निर्धारित की गई है, जबकि मतगणना 3 नवंबर को होनी है। हालांकि, चुनाव आयोग के आदेशों और न्यायालय की कार्यवाही के तहत संबंधित निकायों की प्रक्रिया की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल पुलिस जांच और चुनाव आयोग की समीक्षा से ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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