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21 अगस्त 1911: जब लौवर से गायब हुई थी मोनालिसा, कपड़ों के नीचे छिपाकर चोर ले गया था दुनिया की सबसे चर्चित पेंटिंग

पेरिस: दुनिया की सबसे मशहूर कलाकृतियों में शामिल लियोनार्डो दा विंची की ‘मोनालिसा’ से जुड़ी चोरी की कहानी आज भी हैरान करती है। 21 अगस्त 1911 को पेरिस के लौवर संग्रहालय से यह ऐतिहासिक पेंटिंग चोरी हो गई थी। दिलचस्प बात यह है कि संग्रहालय को पेंटिंग के गायब होने की जानकारी तुरंत नहीं, बल्कि अगले दिन हुई।

मोनालिसा के अपने स्थान से गायब मिलते ही फ्रांस में हड़कंप मच गया। पुलिस ने जांच शुरू की और देखते ही देखते यह मामला दुनिया के अखबारों की बड़ी सुर्खी बन गया। लौवर के बाहर भी लोगों की भीड़ जुटने लगी और हर तरफ यही सवाल था कि आखिर इतनी सुरक्षित जगह से इतनी मशहूर पेंटिंग कैसे चोरी हो गई।

कपड़ों के नीचे छिपाकर पेंटिंग ले गया था चोर

जांच के दौरान शक इटली के रहने वाले विन्सेंजो पेरुगिया पर गया, जो लौवर में काम कर चुका था। माना जाता है कि उसने पेंटिंग को उसके फ्रेम से निकालकर अपने कपड़ों के नीचे छिपाया और संग्रहालय से बाहर निकल गया।

इस चोरी ने जांच एजेंसियों को लंबे समय तक उलझाए रखा। पेरुगिया करीब दो साल तक मोनालिसा को अपने पास रखे रहा। आखिरकार 1913 में उसने पेंटिंग को इटली में बेचने की कोशिश की। इसी दौरान उसकी पहचान सामने आई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

दो साल बाद लौवर लौटी मोनालिसा

मोनालिसा की बरामदगी के बाद उसे वापस पेरिस के लौवर संग्रहालय ले जाया गया। इस चोरी ने पेंटिंग की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया। जो कलाकृति पहले ही कला जगत में महत्वपूर्ण थी, चोरी की इस सनसनीखेज घटना के बाद वह आम लोगों के बीच भी दुनिया की सबसे चर्चित पेंटिंग बन गई।

आज मोनालिसा को देखने के लिए दुनिया भर से लोग लौवर पहुंचते हैं। उसकी रहस्यमयी मुस्कान, लियोनार्डो दा विंची की तकनीक और उससे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं इसे बाकी कलाकृतियों से अलग बनाती हैं।

आखिर मोनालिसा इतनी खास क्यों है?

मोनालिसा की सबसे बड़ी खासियतों में लियोनार्डो दा विंची की ‘स्फुमाटो’ तकनीक शामिल है। इसमें रंगों और छायाओं के बीच बेहद महीन बदलाव किए गए हैं, जिससे चेहरे की अभिव्यक्ति अलग-अलग कोणों से बदलती हुई महसूस होती है।

पेंटिंग में दिखाई देने वाली महिला को आमतौर पर लिसा घेरार्दिनी माना जाता है। ‘मोनालिसा’ नाम का अर्थ मोटे तौर पर ‘मैडम लिसा’ माना जाता है।

मोनालिसा की कीमत कितनी है?

मोनालिसा को सामान्य अर्थों में बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध कलाकृति नहीं माना जाता। इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता इतनी अधिक है कि इसकी कीमत का वास्तविक आकलन करना मुश्किल है। यही वजह है कि इसे अक्सर दुनिया की सबसे मूल्यवान और अमूल्य कलाकृतियों में गिना जाता है।

मोनालिसा की चोरी ने बढ़ा दी थी प्रसिद्धि

विडंबना यह है कि 1911 की चोरी ने मोनालिसा को और ज्यादा प्रसिद्ध कर दिया। पेंटिंग के गायब होने की खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंची और जब 1913 में यह वापस मिली, तब तक यह केवल कला प्रेमियों की पसंद नहीं रही थी, बल्कि पूरी दुनिया की पहचान बन चुकी थी।

यानी जिस चोरी ने लौवर को हिला दिया था, उसी घटना ने मोनालिसा को दुनिया की सबसे चर्चित पेंटिंग बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

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