HealthInternationalLatestNational

गाल, जीभ, होंठ और गले की कोशिकाओं से चिपकते हैं तंबाकू के रसायन, ऐसे बढ़ता है मुंह के कैंसर का खतरा

मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन माना जाता है। गुटखा, खैनी, पान मसाला और सिगरेट जैसी तंबाकू वाली चीजों में मौजूद हानिकारक रसायन मुंह की अंदरूनी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लगातार सेवन से इन रसायनों का असर कोशिकाओं के डीएनए तक पहुंचता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

तंबाकू कैसे पहुंचाता है कोशिकाओं को नुकसान?

तंबाकू में कई ऐसे रसायन पाए जाते हैं जो शरीर की कोशिकाओं के लिए नुकसानदायक होते हैं। जब तंबाकू या इससे बने उत्पादों का सेवन किया जाता है, तो ये रसायन सीधे गाल, जीभ, होंठ, मसूड़ों और गले की अंदरूनी परत के संपर्क में आते हैं।

लगातार संपर्क में रहने से मुंह की कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंच सकता है। सामान्य स्थिति में शरीर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत करने की कोशिश करती हैं, लेकिन लंबे समय तक तंबाकू के संपर्क में रहने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने का खतरा बढ़ता है।

मुंह की स्थानीय इम्यूनिटी पर भी असर

तंबाकू का असर केवल कोशिकाओं तक सीमित नहीं रहता। इसके लगातार सेवन से मुंह के स्थानीय इम्यून सिस्टम पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे मुंह की अंदरूनी सतह को संक्रमण और कोशिकीय क्षति से बचाने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

कैंसर रोग विशेषज्ञ Dr. आशीष गुप्ता के अनुसार, लगातार तंबाकू सेवन से शरीर का डीएनए रिपेयर सिस्टम प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि लंबे समय तक तंबाकू का सेवन करने वालों में मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

गुटखा और खैनी ही नहीं, सिगरेट भी खतरनाक

अक्सर लोग मानते हैं कि केवल गुटखा या खैनी से ही मुंह का कैंसर होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद भी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला में तंबाकू मिलाकर सेवन करना और धूम्रपान—इन सभी आदतों से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। खासतौर पर तंबाकू को लंबे समय तक मुंह में दबाकर रखने से मुंह की कोशिकाएं हानिकारक रसायनों के सीधे संपर्क में रहती हैं।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य समस्या जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर इनमें से कोई समस्या लगातार बनी रहती है तो डॉक्टर या दंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए—

  • मुंह में ऐसा छाला जो लंबे समय तक ठीक न हो।
  • गाल, जीभ या मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे।
  • मुंह में लगातार दर्द या जलन।
  • जीभ या मुंह के किसी हिस्से में गांठ या असामान्य मोटापन।
  • मुंह खोलने या चबाने में परेशानी।
  • निगलने में दिक्कत या दर्द।
  • आवाज में लगातार बदलाव या भारीपन।
  • गर्दन में गांठ या सूजन।
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना।
  • मुंह या मसूड़ों से असामान्य रक्तस्राव।

इनमें से किसी एक लक्षण का होना जरूरी नहीं कि कैंसर ही हो, लेकिन लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

तंबाकू छोड़ना सबसे बड़ा बचाव

मुंह के कैंसर से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना है। केवल मात्रा कम करने के बजाय तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करना ज्यादा प्रभावी बचाव माना जाता है।

अगर किसी व्यक्ति को तंबाकू छोड़ने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर या तंबाकू मुक्ति विशेषज्ञ की मदद ली जा सकती है। समय रहते तंबाकू छोड़ने से शरीर को इसके नुकसान से उबरने का मौका मिलता है और भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का जोखिम कम किया जा सकता है।

चंद मिनट के स्वाद या आदत के लिए अपनी सेहत को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है। मुंह की कोशिकाओं को जितना कम तंबाकू के संपर्क में रखा जाएगा, उतना ही बेहतर। तंबाकू छोड़ना ही मुंह के कैंसर से बचाव की दिशा में सबसे अहम कदम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button