रायपुर में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी पहल, 800 छात्रों को दी गई डिजिटल सुरक्षा की जानकारी

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में साइबर जागृति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम, OTP और UPI PIN साझा न करने की दी सलाह
रायपुर, 4 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों को देखते हुए पुलिस द्वारा प्रदेशभर में ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषक नगर में 3 सितंबर को विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 800 छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में युवाओं को साइबर ठगी के बदलते तरीकों और डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के उपायों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को समझाया गया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय छोटी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
रामविचार नेताम रहे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित साइबर जागरूकता कार्यक्रमों का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंदेल, डीसीपी मध्य तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर गौरव मंडल सहित पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अलावा कलिंगा विश्वविद्यालय और मैट्स विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने भी भाग लिया।
फर्जी कॉल से डिजिटल अरेस्ट तक, समझाए साइबर ठगी के तरीके
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी। इनमें फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, OTP के नाम पर ठगी, बैंक और UPI फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, सोशल मीडिया फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी और लोन के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन जैसे मामलों के प्रति विशेष रूप से सावधान किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल, मैसेज, ई-मेल या सोशल मीडिया संदेश पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।
OTP और UPI PIN किसी से साझा न करें
पुलिस ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपना OTP, UPI PIN, ATM या डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी और पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
इसके अलावा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई। सोशल मीडिया पर निजी और वित्तीय जानकारी साझा करने को भी जोखिम भरा बताया गया।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। पीड़ित को तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, साइबर फ्रॉड की सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, ठगी गई रकम को रोकने या वापस दिलाने की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है।
15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
छत्तीसगढ़ पुलिस का ‘साइबर जागृति अभियान’ 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं को साइबर अपराध के नए तरीकों तथा डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है।
अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
पुलिस ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे साइबर सुरक्षा की जानकारी केवल खुद तक सीमित न रखें, बल्कि अपने परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों को भी डिजिटल ठगी से बचने के लिए जागरूक करें।












