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पहाड़ी कोरवा महिला की डिलीवरी ने डॉक्टरों को भी किया हैरान, मां और नवजात सुरक्षित

हाई रिस्क गर्भवती महिला के गांव लौटने की सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ स्वास्थ्य अमला, मितानिन और 102 एंबुलेंस टीम की मदद से मिला समय पर उपचार

रायपुर, 8 सितंबर 2026। बलरामपुर जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र से राहत भरी खबर सामने आई है। राजपुर विकासखंड की हाई रिस्क गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती ने बीते दिन तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों से महिला को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। फिलहाल मां और तीनों नवजात स्वस्थ हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

जानकारी के मुताबिक, बसंती अति-जोखिम वाली गर्भवती थीं और किसी कारणवश जिला अस्पताल अंबिकापुर से उपचार कराए बिना अपने गांव वापस लौट आई थीं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को मिलते ही संबंधित अमला सक्रिय हो गया। महिला को सुरक्षित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिन और 102 एंबुलेंस टीम के स्तर पर तत्काल आवश्यक व्यवस्था की गई।

PVTG समुदाय से आती हैं बसंती

पहाड़ी कोरवा समुदाय को भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group- PVTG) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह समुदाय मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और वन क्षेत्रों में निवास करता है।

ऐसे क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती होती है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की मैदानी टीम, मितानिन और एंबुलेंस सेवा के बीच समय पर हुआ समन्वय महत्वपूर्ण साबित हुआ।

स्वास्थ्य टीम ने समय पर संभाला मोर्चा

महिला की स्थिति को देखते हुए मैदानी स्वास्थ्य अमले और अस्पताल के चिकित्सकों के बीच तेजी से समन्वय स्थापित किया गया। 102 एंबुलेंस सेवा और मितानिन की मदद से महिला को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

समय पर मिले उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के बीच बसंती ने तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां और तीनों नवजातों की स्थिति स्वस्थ बताई गई है। चिकित्सक फिलहाल चारों के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।

हाई रिस्क गर्भावस्था में निगरानी जरूरी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने कहा कि अति-जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान करना और उनकी नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसी महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार तत्काल रेफरल और उपचार उपलब्ध कराना मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी होता है।

उन्होंने कहा कि बलरामपुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं तक सुरक्षित मातृत्व सेवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है।

पहाड़ी कोरवा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह में शामिल

पहाड़ी कोरवा समुदाय को भारत सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया है। यह समुदाय मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दूरस्थ वन क्षेत्रों में निवास करता है। सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में रहने वाले इस समुदाय तक स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में पहाड़ी कोरवा महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना और सुरक्षित प्रसव होना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य अमले के बेहतर समन्वय की सराहना

सीएमएचओ ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारियों, मितानिन, 102 एंबुलेंस टीम और चिकित्सकों के बीच हुए त्वरित समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में जरूरतमंद मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है।

बसंती द्वारा तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म देने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। मां और तीनों नवजात फिलहाल चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

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