सत्या निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान शुरू हो गया है।
दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में पांच मंजिला छात्र PG इमारत के भयावह हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इमारत ढहने की घटना में अब तक सात लोगों की मौत और पांच लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। NDRF, दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की करीब 27 घंटे चली रेस्क्यू कार्रवाई के बाद बचाव अभियान पूरा कर लिया गया।
हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। नगर निगम ने तत्काल खतरे को देखते हुए आसपास की छह इमारतों को सील कर दिया है। वहीं, बुरी तरह कमजोर हो चुकी पड़ोसी इमारत को चरणबद्ध तरीके से गिराने की तैयारी की जा रही है। बताया गया है कि इस इमारत को फिलहाल करीब 18 से 20 लोहे के गार्डरेल के सहारे खड़ा रखा गया है।
डर के कारण PG खाली कर रहे छात्र
हादसे के बाद सत्या निकेतन की संकरी गलियों में रहने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के कई छात्रों में डर का माहौल है। कई छात्र अपने सामान के साथ PG और किराए के कमरों से बाहर निकलते दिखाई दिए। छात्रों को आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सता रही है।

PG मालिक और परिवार पर कानूनी कार्रवाई
हादसे के मामले में PG संचालक परिवार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। अदालत ने मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। वहीं, संपत्ति के प्रबंधन से जुड़े उनके बेटे महेश गुप्ता को पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। MCD के कई अधिकारियों और इंजीनियरों को निलंबित किया गया है। अधिकारियों पर इमारत की स्थिति और निर्माण से जुड़े नियमों की अनदेखी का आरोप है।
बिना पिलर और बीम के बना था ग्राउंड फ्लोर
प्रारंभिक जांच में इमारत की संरचना को लेकर बेहद गंभीर तथ्य सामने आए हैं। निरीक्षण टीम के मुताबिक, इमारत के ग्राउंड फ्लोर में पर्याप्त पिलर और बीम नहीं थे। इसके ऊपर समय के साथ अतिरिक्त मंजिलें बनाई गईं, जिससे भवन की संरचनात्मक मजबूती पर गंभीर असर पड़ा।
बताया गया है कि करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी यह इमारत ग्राउंड प्लस चार मंजिल तक पहुंच गई थी, जबकि जमीन का इस्तेमाल केवल आवासीय ग्राउंड प्लस वन निर्माण के लिए किया जा सकता था। जांच में यह भी सामने आया कि भवन का कोई स्वीकृत MCD बिल्डिंग प्लान नहीं था।
पानी भरने के दौरान हुआ बड़ा हादसा
जांच के अनुसार, इमारत में चल रहे निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान बेसमेंट में पानी भरने की स्थिति बनी थी। इसी दौरान कमजोर संरचना पर दबाव बढ़ा और इमारत ढह गई। हादसे के बाद सामने आए तथ्यों ने दिल्ली में अवैध निर्माण और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल हो रहे छात्र आवासों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किराया समझौते में ‘जीरो जिम्मेदारी’ का दावा
हादसे के बाद PG के किराया समझौते की प्रतियां भी सामने आई हैं। इनमें ऐसे प्रावधान होने की बात सामने आई है, जिनमें कथित तौर पर किसी चोट या दुर्घटना की स्थिति में मालिक की जिम्मेदारी को सीमित करने की कोशिश की गई थी। इस मामले ने किराएदार छात्रों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर भी बहस तेज कर दी है।
दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों का होगा सेफ्टी ऑडिट
सत्या निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्र आवासों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने MCD को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG और हॉस्टल परिसरों का निरीक्षण कर सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली सरकार ने भी नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर स्वीकृत सीमा से अधिक मंजिलों वाली इमारतों की जांच और उन्हें सील करने की कार्रवाई की जा रही है।
सत्या निकेतन हादसे ने राजधानी में तेजी से बढ़ते PG कल्चर, अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा और छात्रों के लिए उपलब्ध आवासीय सुविधाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब प्रशासन की कार्रवाई का फोकस केवल हादसे की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरभर में ऐसे भवनों की पहचान और सुरक्षा जांच पर भी है।












