
मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक हादसे की मजिस्ट्रियल जांच में नया मोड़ आ गया है। घटना के चार दिन बाद भी पुलिस अधिकारियों ने जांच अधिकारी को मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। अब प्रशासन ने आम लोगों से भी घटना से जुड़े साक्ष्य और जानकारी देने की अपील की है। इस बीच हादसे में गंभीर रूप से घायल एक और मरीज को हवाई एंबुलेंस से भोपाल स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है।
पुलिस से किन दस्तावेजों का इंतजार?
18 अक्टूबर की रात शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर ट्रक दुर्घटना के कारण हुई जनहानि की जांच के लिए ग्वालियर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने अपर जिला मजिस्ट्रेट सीबी प्रसाद को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
जांच अधिकारी ने पुलिस से नवरात्र के दौरान मंदिर में तैनात पुलिसकर्मियों के ड्यूटी आदेश, यातायात व्यवस्था, भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड से संबंधित आदेश और चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले पुलिसकर्मियों के नाम मांगे थे। इसके अलावा नवरात्र के दौरान के सीसीटीवी फुटेज भी मांगे गए हैं।
हालांकि, संबंधित पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई थी। जांच अधिकारी ने कहा है कि इस संबंध में शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
आम लोग 26 से 28 अक्टूबर तक दे सकते हैं साक्ष्य
प्रशासन ने अब स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यक्तियों से भी घटना से जुड़ी जानकारी देने की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति के पास हादसे से संबंधित कोई प्रत्यक्ष जानकारी या साक्ष्य है, तो वह निर्धारित तारीखों पर जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।
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तारीख: 26, 27 और 28 अक्टूबर 2026
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समय: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक
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स्थान: अपर जिला मजिस्ट्रेट का न्यायालय, कक्ष क्रमांक 201, ग्वालियर कलेक्ट्रेट
प्रशासन के अनुसार, निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
एक और घायल को हवाई एंबुलेंस से भोपाल भेजा
हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए उन्हें हवाई एंबुलेंस से भोपाल एम्स भेजा जा रहा है। इसी क्रम में गोहद, जिला भिंड निवासी अंकित को गुरुवार को भोपाल एम्स में भर्ती कराया गया।
इससे पहले कल्पना परिहार, संजय शर्मा और शैलेंद्र सिंह तोमर को भी हवाई एंबुलेंस के जरिए एम्स पहुंचाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री की निगरानी में घायलों का इलाज
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिला प्रशासन घायलों के उपचार की निगरानी कर रहा है। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है।
कलेक्टर रुचिका चौहान स्वयं उपचार व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी अस्पतालों में जाकर मरीजों की स्थिति जानने और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
मजिस्ट्रियल जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि मंदिर परिसर के आसपास यातायात और भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था थी। साथ ही, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी, बैरिकेडिंग और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच से हादसे की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।
पुलिस से जानकारी मिलने और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्ष्य जुटने के बाद ही दुर्घटना के कारणों तथा संभावित लापरवाही को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष सामने आ सकेंगे।












