
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में लोकायुक्त पुलिस ने वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के निवास पर आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के बाद छापा मारा। मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे शुरू हुई कार्रवाई में जमीन, मकान, फ्लैट, वाहन और बीमा पॉलिसियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच के अनुसार, अधिकारी की आय करीब 1.03 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि खर्च लगभग 3.78 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, यह शुरुआती आंकड़े हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
आय और खर्च के अंतर की जांच
लोकायुक्त पुलिस को मनीष कुमार जैन के खिलाफ ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। शिकायत का सत्यापन किए जाने के बाद मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। जांच टीम अब अधिकारी की घोषित आय, संपत्तियों की कीमत और खर्च से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
जबलपुर में जमीन की जानकारी
शुरुआती जांच में मनीष कुमार जैन के नाम पर जबलपुर में 278.74 वर्गमीटर का भूखंड होने की जानकारी सामने आई है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है। लोकायुक्त की टीम जमीन के स्वामित्व, खरीद से संबंधित दस्तावेजों और भुगतान के स्रोत की जांच कर रही है।
पत्नी के नाम पर बंगला और फ्लैट
जांच के दौरान अधिकारी की पत्नी निधि जैन के नाम पर भी संपत्तियों की जानकारी मिली है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भोपाल में 180 वर्गमीटर जमीन पर बना बंगला और एक फ्लैट शामिल हैं। पत्नी के नाम पर 402.41 वर्गमीटर का एक अन्य भूखंड होने की जानकारी भी सामने आई है। इन संपत्तियों की खरीद और वित्तीय स्रोतों की जांच की जा रही है।
परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्तियां भी जांच के दायरे में
लोकायुक्त की शुरुआती जांच में परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर संपत्तियों का भी उल्लेख है।
- मां शशि जैन: सागर जिले के बंडा में 92.93 वर्गमीटर के भूखंड पर मकान होने की जानकारी।
- पिता कोमलचंद जैन: बंडा में दो भूखंडों पर मकान होने की बात सामने आई है।
- वाहन: पत्नी के नाम पर मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस स्कूटर होने की जानकारी मिली है। दोनों की अनुमानित कीमत करीब 5.10 लाख रुपये बताई गई है।
किसी संपत्ति का परिवार के सदस्य के नाम पर होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। जांच में यह देखना होगा कि संपत्ति खरीदने के लिए धन कहां से आया और उससे जुड़े दस्तावेज क्या बताते हैं।
बीमा पॉलिसियों पर भी जांच
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों के लिए करीब 33.93 लाख रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई है। लोकायुक्त की टीम प्रीमियम भुगतान और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला
शिकायत का सत्यापन निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया ने किया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस की टीम कर रही है और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।
अब किन सवालों के जवाब तलाश रही टीम?
लोकायुक्त की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि अधिकारी की ज्ञात आय और बताए गए खर्च के बीच अंतर का आधार क्या है। संपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन, खरीद के समय भुगतान की गई राशि और धन के स्रोत की पड़ताल भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध मानना उचित नहीं होगा; आगे की स्थिति जांच के निष्कर्षों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।












