चीन सीमा पर भारत की नई तैयारी, शौर्य कमांडो की ताकत जानकर चौंक जाएंगे!

भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) अपनी युद्ध क्षमता बढ़ा रही है। आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर के अनुसार, बल ने ‘शौर्य कमांडो’ नाम से एक नई लड़ाकू इकाई तैयार की है। इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ तनाव के दौरान अपनी क्षमताएं दिखाई हैं। अब हर सीमा बटालियन में इनकी तैनाती की योजना है।
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की लंबाई करीब 3,488 किलोमीटर है। इस पूरे क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आईटीबीपी आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर जोर दे रही है।
शौर्य कमांडो की हर सीमा बटालियन में होगी तैनाती
आईटीबीपी प्रमुख ने राजस्थान के अलवर स्थित एक शिविर में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन जैसी चुनौती का सामना करने के लिए पारंपरिक युद्ध तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण भी जरूरी हैं।
इसी दिशा में बल अपनी सीमा बटालियनों को अधिक सक्षम बनाने की तैयारी कर रहा है। शौर्य कमांडो को अलग-अलग सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात करने की योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर कठिन परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई की जा सके।
ड्रोन युद्ध के लिए 400 करोड़ रुपये
आईटीबीपी अपनी सीमा सुरक्षा व्यवस्था में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। इसके लिए सीमा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बनाए गए हैं और जवानों को ड्रोन चलाने तथा इस तकनीक के विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आईटीबीपी प्रमुख के मुताबिक, बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये की राशि मिली है। इसमें से लगभग 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमता मजबूत करने पर खर्च की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय ने करीब 4,000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस योजना में ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।
गलवान जैसी परिस्थितियों के लिए विशेष प्रशिक्षण
आईटीबीपी ने जवानों को कठिन युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से नया प्रहार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया है। इसका लक्ष्य जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी करना है।
आईटीबीपी प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को यह प्रशिक्षण देने की योजना है।
गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक बलिदान हुए थे। बाद में चीन ने भी अपने चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों की सीमा पर सैन्य तैयारियों और निगरानी को विशेष महत्व दिया गया है।
चीन सीमा पर जमीन के नीचे बनेंगे आश्रय स्थल
आईटीबीपी ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में जवानों की सुरक्षा और सुविधाएं बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। बल प्रमुख के अनुसार, कुछ अग्रिम क्षेत्रों में जमीन के नीचे आश्रय स्थल तैयार किए जा रहे हैं, ताकि संघर्ष की स्थिति में जवानों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके।
इसके साथ ही अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए बैरकों में तापरोधी व्यवस्था, सौर जल तापक और दूरस्थ चौकियों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए जनरेटर लगाए जा रहे हैं। वाहनों को कड़ाके की ठंड में चालू करने के लिए विशेष शीतकालीन उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन प्रयासों का उद्देश्य आईटीबीपी को कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में लंबे समय तक प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बनाना है।
कांग्रेस ने चीन नीति पर उठाए सवाल
इस बीच कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा तनाव से जुड़ी चिंताओं पर सरकार पर्याप्त जवाब नहीं दे रही है।
रमेश ने यह दावा भी किया कि कुछ सीमावर्ती गश्ती बिंदुओं तक भारत की पहुंच प्रभावित हुई है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों और वहां बड़े बांध के निर्माण की खबरों का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस नेता के ये बयान राजनीतिक आरोप हैं। गश्ती बिंदुओं पर नियंत्रण और बांध से जुड़े दावों की स्थिति को स्वतंत्र तथा आधिकारिक जानकारी के आधार पर अलग से परखना जरूरी है।
भारत की सीमा सुरक्षा रणनीति में क्या बदलेगा?
शौर्य कमांडो, ड्रोन प्लाटून, आधुनिक निगरानी उपकरण और विशेष पर्वतीय प्रशिक्षण आईटीबीपी की तैयारियों के अहम हिस्से हैं। इनसे कठिन भूभाग में निगरानी, जवानों की सुरक्षा और आपात परिस्थितियों में कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन योजनाओं की वास्तविक प्रभावशीलता तैनाती, प्रशिक्षण पूरा होने और उपकरणों के संचालन पर निर्भर करेगी। चीन सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ बेहतर बुनियादी ढांचा और सतर्क निगरानी भी महत्वपूर्ण रहेंगे।












