
भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीदी के दौरान सामने आई वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2023 से अब तक हुई खरीदी से जुड़े मामलों की जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अब तक 62 मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया चली है और कुल 138 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इनमें सात कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, जबकि 76 की वेतनवृद्धि रोक दी गई है।
इसके अलावा, 38 अधिकारियों से राशि वसूलने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से वसूली करने का निर्णय लिया गया है। जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर 22 कर्मचारियों को दोषमुक्त भी किया गया है। सरकार ने खरीदी में हुई गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच कराने का फैसला लिया है।
खरीदी में गड़बड़ी पर सरकार की नजर
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशाला में नगरीय निकायों में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। इसके बाद खरीदी से जुड़े मामलों में कार्रवाई और जांच को लेकर सख्ती दिखाई जा रही है।
सरकार का रुख साफ है कि जहां जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होगी, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही, आगे भी ऐसे मामलों में कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।
बाजार दर से महंगा खरीदा गया पानी का टैंकर
सतना जिले के कोटर में 3000 लीटर क्षमता का पानी का टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली बाजार दर से अधिक कीमत पर खरीदने का मामला सामने आया। इस मामले में उपमंत्री देवरत्न सोनी की वेतनवृद्धि रोकने के साथ 1 लाख 45 हजार रुपये की वसूली के आदेश दिए गए हैं।
यह मामला बताता है कि सरकारी खरीद में निर्धारित कीमतों और वास्तविक बाजार दर के बीच अंतर की जांच भी कार्रवाई का आधार बन रही है।
कहीं कचरा वाहन तो कहीं अधिक भुगतान का मामला
खरीदी से जुड़ी अनियमितताओं के अलग-अलग मामले प्रदेश के कई नगरीय निकायों में सामने आए हैं।
- सिवनी: तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी पूजा बुनकर की दो वेतनवृद्धियां रोकने की कार्रवाई की गई।
- गुना: 20 कचरा वाहन खरीदे जाने के बजाय केवल 10 वाहन खरीदे जाने के मामले में वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई।
- शहडोल के ब्यौहारी: बाजार दर से अधिक भुगतान के मामले में राशि वसूलने के साथ महेंद्र मिश्रा और यशवंत वर्मा की वेतनवृद्धि रोक दी गई।
इन मामलों में कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी धन के उपयोग में जवाबदेही तय करना है।
कई संभागों में हुई कार्रवाई
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग संभागों में भी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं। ग्वालियर में 32, शहडोल में 25, उज्जैन और इंदौर में 21-21 तथा जबलपुर में 15 और भोपाल में 16 मामलों में कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
इन आंकड़ों के साथ कार्रवाई की अलग-अलग श्रेणियों को समझना जरूरी है, क्योंकि वेतनवृद्धि रोकना, राशि वसूलना और सेवा समाप्त करना अलग-अलग प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई हैं।
सरकार ने आगे भी कार्रवाई के दिए संकेत
अपर मुख्य सचिव के मुताबिक, जिन मामलों में गड़बड़ी प्रमाणित हुई है, उनमें कार्रवाई की गई है और आगे भी ऐसा जारी रहेगा। नगरीय निकायों में खरीदी के मामलों की उच्चस्तरीय जांच का निर्णय भी इसी दिशा में अहम माना जा रहा है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच में और किन मामलों की पुष्टि होती है और सरकारी खरीद में अनियमितताओं को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।












