मदनपुर में 200 से अधिक महिलाएं सीख रहीं चूड़ी बनाने का हुनर, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे कदम

कलेक्टर रेना जमील ने प्रशिक्षण केंद्र का किया अवलोकन, खुद भी आजमाई चूड़ी बनाने की कला; एक महीने के प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की तैयारी
सूरजपुर, 26 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में महिलाओं को पारंपरिक कला और आधुनिक कौशल से जोड़कर आजीविका के नए अवसर तैयार करने की पहल की जा रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सिलफिली क्षेत्र के मदनपुर में 21 महिला समूहों की 200 से अधिक महिलाएं इन दिनों चूड़ी बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। कांच, मेटल और लाख से चूड़ियां तैयार करने के साथ महिलाओं को डिजाइनिंग और तकनीकी कौशल भी सिखाया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को चूड़ी निर्माण को आय के साधन के रूप में अपनाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।
फिरोजाबाद की चूड़ी कला अब सूरजपुर में
चूड़ी निर्माण के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से प्रेरणा लेते हुए सूरजपुर के मदनपुर में इस कला को स्थानीय स्तर पर विकसित करने की शुरुआत की गई है। यहां प्रशिक्षण ले रहीं महिलाएं चूड़ी बनाने की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल चूड़ी तैयार करने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि डिजाइन और गुणवत्ता से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी जा रही है।
प्रशिक्षण केंद्र पहुंचीं कलेक्टर, महिलाओं से जाना अनुभव
कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने मदनपुर पहुंचकर चूड़ी निर्माण प्रशिक्षण का अवलोकन किया। उन्होंने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभव जाने और चूड़ी बनाने की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा।
कलेक्टर ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जिस लगन और मेहनत के साथ वे चूड़ी बनाना सीख रही हैं, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। निरंतर अभ्यास से उनका हुनर और बेहतर होगा और उनके हाथों से तैयार चूड़ियां उनकी पहचान बन सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं से आत्मविश्वास के साथ इस कौशल को सीखने और आगे बढ़ाने का आह्वान किया। इस दौरान कलेक्टर ने स्वयं भी चूड़ी बनाने की कला आजमाई। प्रशिक्षण ले रही महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार की गई चूड़ियां कलेक्टर को भेंट कीं।
21 महिला समूहों की 200 से अधिक सदस्य प्रशिक्षण में शामिल
मदनपुर में चल रहे इस प्रशिक्षण में जिले के 21 महिला समूहों की 200 से अधिक सदस्य भाग ले रही हैं। महिलाओं को करीब एक महीने तक चूड़ी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के शुरुआती चरण में उन्हें कांच, मेटल और लाख की चूड़ियां बनाने की तकनीक सिखाई जा रही है। इसके अलावा डिजाइनिंग और चूड़ी निर्माण से जुड़े अन्य तकनीकी कौशल भी प्रशिक्षण का हिस्सा हैं।
प्रशासन का उद्देश्य महिलाओं को ऐसा व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना है, जिसे वे प्रशिक्षण के बाद रोजगार और आय के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकें। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम में दक्ष होने के बाद महिलाएं प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये तक की आय अर्जित करने में सक्षम हो सकती हैं।
कच्चे माल से लेकर बाजार तक सहयोग की तैयारी
चूड़ी निर्माण को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय प्रशासन इसके लिए पूरी गतिविधि को स्थानीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। फिलहाल चूड़ी निर्माण में इस्तेमाल होने वाला आवश्यक कच्चा माल उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से मंगाया जा रहा है।
आगे चलकर स्थानीय स्तर पर कांच प्लांट यूनिट स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे चूड़ी निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन के दौरान निकलने वाले वेस्टेज के बेहतर उपयोग की संभावना भी बनेगी।
प्रशासन की योजना प्रशिक्षण के साथ महिलाओं को कच्चा माल उपलब्ध कराने और उनके द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की भी है। इससे महिलाओं को उत्पादन से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया में सहयोग मिल सकेगा।
हुनर से परिवार की आय में योगदान का अवसर
मदनपुर में चल रही यह पहल महिलाओं के लिए केवल एक नई कला सीखने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ऐसा कौशल देना है, जिसके माध्यम से वे अपने परिवार की आय में योगदान दे सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और काम के अवसर मिलने से महिलाओं को रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। समूह की महिलाएं अपने सामूहिक प्रयास से चूड़ी निर्माण को आगे बढ़ा सकती हैं और भविष्य में इसे बड़े स्तर पर आजीविका गतिविधि का रूप दिया जा सकता है।
स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़ने की कोशिश
चूड़ी निर्माण की गतिविधि को सूरजपुर में विकसित करने के पीछे एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय महिलाओं के हुनर को बाजार से जोड़ना भी है। यदि प्रशिक्षण के बाद तैयार उत्पादों को उचित बाजार और खरीदार मिलते हैं, तो यह गतिविधि महिला समूहों के लिए नियमित आय का माध्यम बन सकती है।
फिरोजाबाद की चूड़ी कला से प्रशिक्षण लेकर सूरजपुर की महिलाएं अब अपने क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं। प्रशासन की ओर से प्रशिक्षण, कच्चे माल और विपणन से जुड़ा सहयोग मिलने पर इस पहल को आगे बड़े स्तर पर विकसित करने की संभावना है।
राज्य शासन की ओर से महिला समूहों को कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मदनपुर में शुरू की गई चूड़ी निर्माण गतिविधि ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कला के साथ आर्थिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक प्रयास है।
प्रशिक्षण स्थल पर जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र सिंह पाटले, अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती शिवानी जायसवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं अन्य जनप्रतिनिधि
प्रशिक्षण केंद्र पहुंचीं कलेक्टर, महिलाओं से जाना अनुभव
कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने मदनपुर पहुंचकर चूड़ी निर्माण प्रशिक्षण का अवलोकन किया। उन्होंने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभव जाने और चूड़ी बनाने की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा।
कलेक्टर ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जिस लगन और मेहनत के साथ वे चूड़ी बनाना सीख रही हैं, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। निरंतर अभ्यास से उनका हुनर और बेहतर होगा और उनके हाथों से तैयार चूड़ियां उनकी पहचान बन सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं से आत्मविश्वास के साथ इस कौशल को सीखने और आगे बढ़ाने का आह्वान किया। इस दौरान कलेक्टर ने स्वयं भी चूड़ी बनाने की कला आजमाई। प्रशिक्षण ले रही महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार की गई चूड़ियां कलेक्टर को भेंट कीं।
21 महिला समूहों की 200 से अधिक सदस्य प्रशिक्षण में शामिल
मदनपुर में चल रहे इस प्रशिक्षण में जिले के 21 महिला समूहों की 200 से अधिक सदस्य भाग ले रही हैं। महिलाओं को करीब एक महीने तक चूड़ी निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के शुरुआती चरण में उन्हें कांच, मेटल और लाख की चूड़ियां बनाने की तकनीक सिखाई जा रही है। इसके अलावा डिजाइनिंग और चूड़ी निर्माण से जुड़े अन्य तकनीकी कौशल भी प्रशिक्षण का हिस्सा हैं।
प्रशासन का उद्देश्य महिलाओं को ऐसा व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना है, जिसे वे प्रशिक्षण के बाद रोजगार और आय के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकें। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम में दक्ष होने के बाद महिलाएं प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये तक की आय अर्जित करने में सक्षम हो सकती हैं।
कच्चे माल से लेकर बाजार तक सहयोग की तैयारी
चूड़ी निर्माण को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय प्रशासन इसके लिए पूरी गतिविधि को स्थानीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। फिलहाल चूड़ी निर्माण में इस्तेमाल होने वाला आवश्यक कच्चा माल उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से मंगाया जा रहा है।
आगे चलकर स्थानीय स्तर पर कांच प्लांट यूनिट स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे चूड़ी निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन के दौरान निकलने वाले वेस्टेज के बेहतर उपयोग की संभावना भी बनेगी।
प्रशासन की योजना प्रशिक्षण के साथ महिलाओं को कच्चा माल उपलब्ध कराने और उनके द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की भी है। इससे महिलाओं को उत्पादन से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया में सहयोग मिल सकेगा।
हुनर से परिवार की आय में योगदान का अवसर
मदनपुर में चल रही यह पहल महिलाओं के लिए केवल एक नई कला सीखने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ऐसा कौशल देना है, जिसके माध्यम से वे अपने परिवार की आय में योगदान दे सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और काम के अवसर मिलने से महिलाओं को रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। समूह की महिलाएं अपने सामूहिक प्रयास से चूड़ी निर्माण को आगे बढ़ा सकती हैं और भविष्य में इसे बड़े स्तर पर आजीविका गतिविधि का रूप दिया जा सकता है।
स्थानीय हुनर को बाजार से जोड़ने की कोशिश
चूड़ी निर्माण की गतिविधि को सूरजपुर में विकसित करने के पीछे एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय महिलाओं के हुनर को बाजार से जोड़ना भी है। यदि प्रशिक्षण के बाद तैयार उत्पादों को उचित बाजार और खरीदार मिलते हैं, तो यह गतिविधि महिला समूहों के लिए नियमित आय का माध्यम बन सकती है।
फिरोजाबाद की चूड़ी कला से प्रशिक्षण लेकर सूरजपुर की महिलाएं अब अपने क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं। प्रशासन की ओर से प्रशिक्षण, कच्चे माल और विपणन से जुड़ा सहयोग मिलने पर इस पहल को आगे बड़े स्तर पर विकसित करने की संभावना है।
राज्य शासन की ओर से महिला समूहों को कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मदनपुर में शुरू की गई चूड़ी निर्माण गतिविधि ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कला के साथ आर्थिक अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक प्रयास है।
प्रशिक्षण स्थल पर जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र सिंह पाटले, अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती शिवानी जायसवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।












