
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखा टकराव देखने को मिला। विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सत्र के समापन पर बताया कि उच्च सदन कुल 37 घंटे 49 मिनट चला। इस दौरान 12 विधेयकों पर विचार किया गया और उन्हें पारित किया गया या वापस भेजा गया। उन्होंने लगातार हंगामे और अव्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे लोगों का संसदीय व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होता है।
सत्र के दौरान नीट से जुड़ी कथित गड़बड़ियों, दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कई मौकों पर विरोध प्रदर्शन के चलते सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सत्र की समीक्षा करते हुए भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर युवाओं और आस्था से जुड़े मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें दबाने को प्राथमिकता दी।
वहीं, राज्यसभा में खनिज और खनन (विकास और नियमन) संशोधन विधेयक, 2026 भी पारित किया गया। सत्र के अंतिम दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर टीएमसी सांसद सागरिका घोष की टिप्पणी के बाद भी सदन में हंगामा हुआ और विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की।
राज्यसभा की कार्यवाही के समापन पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के सदन के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में अनौपचारिक मुलाकात भी की।












