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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु लापता, सद्गुरु भी पहुंचे तिब्बत

गिरोंग में अचानक आई बाढ़ ने इमिग्रेशन सेंटर और आसपास के इलाके को लिया चपेट में, श्रद्धालुओं की तलाश जारी

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। नेपाल और चीन के सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया ईशा फाउंडेशन का करीब 80 श्रद्धालुओं का समूह तिब्बत के गिरोंग क्षेत्र में फंस गया है। समूह के श्रद्धालु यात्रा पूरी करने के बाद भारत लौटने की प्रक्रिया में थे और इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
बताया जा रहा है कि श्रद्धालु वापसी के दौरान चीन के इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी अचानक बाढ़ का पानी तेजी से इलाके में पहुंच गया। बाढ़ की चपेट में इमिग्रेशन सेंटर और आसपास का कस्बा भी आया है। घटना के बाद से वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है।
इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद था पूरा समूह
ईशा फाउंडेशन के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया समूह वापस लौट रहा था। इसी दौरान श्रद्धालु तिब्बत के गिरोंग स्थित इमिग्रेशन सेंटर में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए मौजूद थे।
इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने इलाके में भारी तबाही मचा दी। पानी और मलबे के तेज बहाव के कारण इमिग्रेशन सेंटर समेत आसपास की कई इमारतें प्रभावित हुईं। घटना के बाद से समूह के सदस्यों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
सद्गुरु खुद पहुंचे गिरोंग
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) ने घटना पर चिंता जताते हुए बताया कि कैलाश यात्रा पर गया उनका एक समूह बाढ़ की चपेट में आया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर घटना की जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धालु वापसी के दौरान इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी अचानक बाढ़ आ गई। सद्गुरु के अनुसार, इमारत और कस्बे का बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सद्गुरु खुद गिरोंग पहुंच गए हैं और वहां राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में मचाई तबाही
नेपाल-चीन सीमा के आसपास के हिमालयी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ से कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर है। तेज पानी और मलबे के बहाव से सड़कें, पुल, इमारतें और अन्य बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है।
हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की फ्लैश फ्लड की घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं, क्योंकि पहाड़ों से अचानक बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ और मलबा नीचे की ओर आता है। इससे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का समय बहुत कम मिलता है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता
ईशा फाउंडेशन के करीब 80 श्रद्धालुओं के बारे में संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनके परिवारों और परिचितों में चिंता बढ़ गई है। फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
स्थानीय परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण होने के कारण राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। प्रभावित इलाके में सड़क संपर्क और संचार व्यवस्था भी बाधित होने की खबर है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पड़ा असर
इस घटना के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी असर पड़ा है। तिब्बत के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। सीमा क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों के कारण यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
फिलहाल लापता श्रद्धालुओं की स्थिति को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। राहत और बचाव एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समूह के कितने सदस्य सुरक्षित हैं।

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