
पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित खनौरी-दाता सिंह वाला बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। एमएसपी की कानूनी गारंटी और कृषि क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के प्रभाव से बचाने की मांग को लेकर किसान 228 किलोमीटर लंबी ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ पर निकले हैं। पंजाब से दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे किसानों को हरियाणा सीमा पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया। रास्ता बंद होने के बाद किसानों ने सड़क किनारे ही बिस्तर बिछाकर रात गुजारी।
किसान नेताओं के मुताबिक, उनका मकसद केवल 51 किसानों के सीमित जत्थे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से पैदल दिल्ली पहुंचना है। उनका आरोप है कि सीमित संख्या में होने और शांतिपूर्ण मार्च की बात कहने के बावजूद प्रशासन उन्हें हरियाणा में प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगों में फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी शामिल है। इसके अलावा किसान कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के संभावित प्रभाव से बचाने की मांग कर रहे हैं। किसान नेताओं को आशंका है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को शामिल किए जाने से भारतीय किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
खनौरी बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा
किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा प्रशासन ने खनौरी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सीमा क्षेत्र में बैरिकेड्स, कंक्रीट के अवरोधक, कंटीले तार, वाटर कैनन और अन्य सुरक्षा उपकरण तैनात किए गए हैं। जींद प्रशासन ने सार्वजनिक जमावड़े और बिना अनुमति मार्च पर रोक लगाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की है।
पुलिस की ओर से रास्ता रोके जाने के बाद किसानों ने सीमा के पास ही डेरा डाल दिया। कई किसान सड़क किनारे अपने बिस्तर लगाकर रात गुजारते नजर आए। किसान नेताओं का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते और शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली तक पहुंचना चाहते हैं।
29 अगस्त को जंतर-मंतर पर महापंचायत की तैयारी
किसान नेताओं के अनुसार, ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ को 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित महापंचायत तक पहुंचाने की योजना है। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसान नेताओं ने शांतिपूर्ण आवागमन की अनुमति देने की मांग दोहराई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें किसानों की आय, फसल के उचित मूल्य और कृषि क्षेत्र के हितों से जुड़ी हैं। वहीं, प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बिना अनुमति बड़े जमावड़े को रोकने पर है। खनौरी बॉर्डर पर किसानों के डटे रहने से पंजाब-हरियाणा सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।












