जल संरक्षण में बलौदाबाजार-भाटापारा की ऐतिहासिक उपलब्धि, देश के टॉप-10 जिलों में 8वें स्थान पर

2.46 लाख से अधिक वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण, 10.78 लाख लोगों की भागीदारी से बना जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल
बलौदाबाजार, 3 सितंबर 2026। वर्षा जल के संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की दिशा में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में जिला देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुआ है। जिले ने इस अभियान में 8वां स्थान हासिल किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे नवाचारों, सामुदायिक सहभागिता और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की।
2.46 लाख से अधिक जल संचयन संरचनाओं का निर्माण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप और कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रखते हुए जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा ‘मोर गांव-मोर पानी अभियान 3.0’ के तहत ग्राम पंचायतों, महिला समूहों, युवाओं, ग्रामीणों और विभिन्न विभागों की सहभागिता से जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया।
अभियान के तहत जिले में 2,46,488 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इन संरचनाओं के माध्यम से लगभग 5,146.30 लाख लीटर जल संचयन क्षमता विकसित हुई है। वहीं अभियान में 10,78,911 लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी दर्ज की गई।
यह अभियान जिले के 736 गांवों, 519 ग्राम पंचायतों और 9 नगरीय क्षेत्रों तक पहुंचा। जनभागीदारी के मामले में यह प्रयास जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवासों से लेकर खेतों तक जल संरक्षण
जिले में जल संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, डबरी और चेकडैम निर्माण, खेत एवं सामुदायिक जल संरचनाएं, नाला उपचार, गैबियन संरचनाएं तथा अन्य भू-जल रिचार्ज गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई।
विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवासों के साथ रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को जोड़कर जल संरक्षण को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इससे बारिश के पानी को सीधे उपयोग या भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया।
‘हर घर पानी घर में’ की अवधारणा पर काम
जिला प्रशासन की रणनीति में स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट अवधारणा अपनाई गई—“हर घर पानी घर में, मोहल्ले का पानी मोहल्ले में, खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में।”
जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जल चौपाल, रैलियां, रंगोली, दीप प्रज्वलन, महिला समूहों की गतिविधियां और विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन गतिविधियों के जरिए जल संरक्षण को सरकारी योजना के बजाय सामुदायिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया।
जनभागीदारी बनी जिले की ताकत
राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान जिला प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। देश के शीर्ष 10 जिलों में बलौदाबाजार-भाटापारा का शामिल होना यह दर्शाता है कि स्थानीय संसाधनों, प्रशासनिक प्रयासों, नवाचार और जनभागीदारी को एक साथ जोड़कर जल सुरक्षा के क्षेत्र में प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सकता है।
जिले की यह उपलब्धि भविष्य में जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के लिए किए जाने वाले प्रयासों को और गति देने के साथ अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।












