रायपुर में मकान तोड़ते ही मचा हड़कंप, मलबे से रास्ते बंद; 50 से ज्यादा घरों की बिजली गुल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा इलाके में पुराने मकान को तोड़ने के दौरान उसका एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के बाद सड़क पर मलबा फैल गया, जिससे आसपास के कई रास्तों पर आवागमन प्रभावित हुआ। वहीं, 50 से ज्यादा घरों की बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। घटना के बाद स्थानीय रहवासियों में नाराजगी है और मकान तोड़ने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मकान ढहने से सड़क पर फैला मलबा
जानकारी के अनुसार, बूढ़ापारा में डॉ. कुकरेजा के पुराने मकान को राजधानी ज्वेलर्स ने खरीदा था। मकान को तोड़ने का काम चल रहा था, तभी उसका हिस्सा गिर गया। मलबा सड़क पर फैलने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
मौके से मजदूरों और ठेकेदार के जाने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मकान का हिस्सा गिरने के बाद वहां काम कर रहे मजदूर और ठेकेदार मौके से चले गए। रहवासियों ने सवाल उठाया कि मकान तोड़ने के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं। हालांकि, मौके से जाने के आरोपों और ध्वस्तीकरण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
रायपुर में 150 से ज्यादा जर्जर भवन चिह्नित होने की जानकारी
राजधानी में जर्जर भवनों को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर में 150 से ज्यादा जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, जिनमें 35 से अधिक को अति जर्जर बताया गया था। सदर बाजार, मालवीय रोड-गोलबाजार, फूल चौक, सद्दानी चौक-बूढ़ापारा, सत्ती बाजार और बैजनाथपारा जैसे इलाके भी इस समस्या से प्रभावित बताए गए हैं।
जर्जर मकानों को हटाने की जिम्मेदारी पर सवाल
बताया जाता है कि नगर निगम की कार्रवाई में भवन मालिकों को नोटिस जारी करने और अपने खर्च पर जर्जर मकान हटाने के निर्देश देने जैसे कदम शामिल रहे हैं। बूढ़ापारा की घटना के बाद यह सवाल फिर उठा है कि खतरा बने भवनों को समय पर हटाने और ध्वस्तीकरण के दौरान आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
फिलहाल घटना में किसी के घायल होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। मकान ढहने के कारणों, सुरक्षा इंतजामों और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों की पुष्टि मिलने पर ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।












