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घुटनों के दर्द में गोंद के लड्डू कितने फायदेमंद? एनएलएम की रिसर्च से जानिए पूरी सच्चाई

बुजुर्गों से लेकर कम उम्र के लोगों तक क्यों बढ़ रही जोड़ों के दर्द की समस्या? गोंद के लड्डू, उनके फायदे और बनाने की विधि भी जानिए

आजकल घुटनों, कमर और दूसरे जोड़ों में दर्द की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के लोगों में भी लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता वजन, पुरानी चोट और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं जोड़ों पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में सर्दियों में खाए जाने वाले पारंपरिक गोंद के लड्डू एक बार फिर चर्चा में रहते हैं। कई परिवारों में इन्हें जोड़ों को मजबूत बनाने, शरीर को ताकत देने और दर्द से राहत पाने के लिए खाया जाता है।

लेकिन क्या सचमुच गोंद के लड्डू घुटनों का दर्द कम करते हैं? क्या ये जोड़ों के भीतर मौजूद चिकनाई यानी तरल पदार्थ को बढ़ा सकते हैं? और क्या इस बारे में अमेरिका की राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय (एनएलएम) में प्रकाशित शोध कोई प्रमाण देता है?

इन सवालों का जवाब जानने के लिए पारंपरिक खानपान और वैज्ञानिक शोध के बीच अंतर समझना जरूरी है। एनएलएम के पबमेड संग्रह में प्रकाशित शोधों में कुछ वनस्पतियों के अर्क और घुटनों के पुराने दर्द पर अध्ययन मिलते हैं, लेकिन गोंद के लड्डू खाने से जोड़ों का तरल पदार्थ बढ़ने या घिसा हुआ कार्टिलेज दोबारा बनने का पक्का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें पौष्टिक आहार के रूप में देखा जा सकता है, किसी बीमारी का निश्चित इलाज मानकर नहीं।

1. एनएलएम की रिसर्च में गोंद और जोड़ों के दर्द को लेकर क्या मिला?

सबसे पहले एक जरूरी अंतर समझिए। एनएलएम यानी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन अमेरिका की एक प्रमुख चिकित्सा-साहित्य लाइब्रेरी है। इसका पबमेड संग्रह वैज्ञानिक शोधपत्रों का विवरण और उनके सार उपलब्ध कराता है। किसी शोधपत्र का पबमेड में होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसमें बताई गई चीज इलाज के रूप में पूरी तरह सफल साबित हो गई है।

गोंद के लड्डू के बारे में उपलब्ध दावों को समझने के लिए तीन तरह के शोधों पर ध्यान देना जरूरी है।

Gond For Laddu | Jaribooti – jaribooti.com

पहला: खाने वाले गोंद पर शोध

पारंपरिक लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाला गोंद एक ही प्रकार का पदार्थ नहीं होता। अलग-अलग पेड़ों से प्राप्त गोंद की संरचना अलग होती है। इसलिए किसी एक गोंद पर किए गए शोध को सभी प्रकार के गोंद के लड्डुओं पर लागू नहीं किया जा सकता।

Boswellia Serrata: Shallaki / Shalai Guggal Benefits & Uses | Dabur

दूसरा: सलाई गूगल यानी बोसवेलिया पर शोध

बोसवेलिया एक अलग औषधीय पेड़ है। इसके राल से तैयार विशेष अर्क पर घुटनों के पुराने दर्द को लेकर कुछ मानव अध्ययन हुए हैं। ये शोध सामान्य खाने वाले गोंद के लड्डुओं के अध्ययन नहीं हैं।

Synovial fluid: MedlinePlus Medical Encyclopedia Image

तीसरा: जोड़ों के भीतर मौजूद तरल पर शोध

घुटनों के जोड़ में मौजूद तरल को साइनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह जोड़ की सतहों के बीच चिकनाई और सामान्य गति बनाए रखने में मदद करता है। उपलब्ध शोधों से यह साबित नहीं होता कि गोंद के लड्डू खाने से इस तरल की मात्रा बढ़ जाती है।

2. वर्ष 2023 का गोंद पर शोध क्या बताता है?

एनएलएम के पबमेड में जनवरी 2023 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा में गोंद अरबिक (Gum Arabic) से जुड़े 29 शोधपत्रों का आकलन किया गया। गोंद अरबिक एक विशेष प्रकार का खाद्य गोंद है, जो मुख्यतः अकेशिया की कुछ प्रजातियों से प्राप्त होता है।

इस समीक्षा में शरीर की सूजन से जुड़े कुछ संकेतकों और विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों पर अध्ययन शामिल थे। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला हर गोंद इसी प्रकार का होता है या उससे वही परिणाम मिलेंगे।

इस विषय में एक और महत्वपूर्ण अध्ययन है।

3. वर्ष 2018 का अध्ययन: गठिया के मरीजों पर क्या असर दिखा?

सूडान में किए गए एक छोटे चरण-दो अध्ययन में रूमेटाइड आर्थराइटिस यानी प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी गठिया की समस्या वाले 40 मरीजों को शामिल किया गया। उन्हें 12 सप्ताह तक प्रतिदिन 30 ग्राम गोंद अरबिक दिया गया।

शोधकर्ताओं ने कुछ सूजन-संबंधी संकेतकों में कमी और जोड़ों में सूजन तथा दर्द की गंभीरता के माप में सुधार दर्ज किया।

इस अध्ययन की सीमाएं भी समझनी चाहिए:

  • इसमें केवल 40 मरीज शामिल थे।

  • यह भारत में बनाए जाने वाले पारंपरिक गोंद के लड्डुओं का परीक्षण नहीं था।

  • इसमें गोंद अरबिक का निर्धारित सेवन किया गया था, घी, चीनी, आटा और मेवों से बने लड्डुओं का नहीं।

  • इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गोंद खाने से घुटने के भीतर का तरल बढ़ता है या घिसा हुआ कार्टिलेज फिर से बन जाता है।

इसलिए यह शोध दिलचस्प है, लेकिन इसे गोंद के लड्डुओं के लाभ का सीधा प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

4. बोसवेलिया पर शोध: क्या सच में घुटनों के दर्द में लाभ हो सकता है?

यहां एक दिलचस्प बात सामने आती है। एनएलएम में उपलब्ध कुछ शोधों में बोसवेलिया से बने विशेष अर्क का घुटनों के पुराने दर्द पर अध्ययन किया गया है।

वैज्ञानिक अध्ययन

2024 की व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने घुटनों के पुराने दर्द से संबंधित 13 अध्ययनों का विश्लेषण किया। इनमें दर्द और जोड़ों के काम करने की क्षमता को मापने के लिए अलग-अलग मानकों का इस्तेमाल हुआ।

  • सभी अध्ययनों को एक साथ देखने पर उपचार और नियंत्रण समूहों के बीच स्पष्ट सांख्यिकीय लाभ नहीं मिला।

  • अलग से किए गए विश्लेषण में कुछ बोसवेलिया अर्क का लाभ निष्क्रिय उपचार की तुलना में दिखाई दिया।

  • शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए और उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययन जरूरी हैं।

शोधपत्र: पबमेड पर पूरा अध्ययन पढ़ें।

इसका मतलब है कि कुछ विशेष वनस्पति अर्क जोड़ों के दर्द में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनका प्रभाव निश्चित नहीं है। बोसवेलिया का औषधीय अर्क और मिठाई बनाने वाला साधारण गोंद अलग चीजें हैं। एक पर हुए शोध से दूसरे के फायदे प्रमाणित नहीं होते।

5. जोड़ों में तरल पदार्थ क्या होता है और इसकी कमी से क्या होता है?

घुटने के जोड़ में हड्डियों के सिरों पर कार्टिलेज नामक मुलायम ऊतक होता है। जोड़ के अंदर मौजूद साइनोवियल द्रव गति के दौरान घर्षण कम करने और कार्टिलेज के सामान्य काम में सहायता करता है।

उम्र बढ़ने के साथ कुछ लोगों में कार्टिलेज घिसने लगता है। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस कहा जाता है। इससे दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।

लेकिन हर तरह का घुटने का दर्द तरल पदार्थ की कमी के कारण नहीं होता। कभी जोड़ में जरूरत से ज्यादा तरल जमा हो सकता है, जिसे आम भाषा में घुटने में पानी भरना कहा जाता है। यह चोट, सूजन, गठिया या संक्रमण के कारण भी हो सकता है।

इसलिए दो स्थितियों को अलग समझना चाहिए:

समस्या क्या हो सकता है?
कार्टिलेज का घिसना दर्द, अकड़न और गति में कमी
जोड़ में सूजन या तरल जमा होना घुटने में सूजन, खिंचाव और दर्द
मांसपेशियों की कमजोरी चलने, उठने-बैठने में परेशानी
रूमेटाइड आर्थराइटिस प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी सूजन और जोड़ों में दर्द

गोंद के लड्डू इनमें से किसी भी स्थिति का प्रमाणित इलाज नहीं हैं। घुटने में सूजन होने पर यह मान लेना भी सही नहीं कि शरीर में चिकनाई कम हो गई है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच या जोड़ के तरल की जांच से कारण पता कर सकते हैं।

6. बुजुर्गों और कम उम्र के लोगों में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ता दिखाई देता है?

जोड़ों का दर्द कई कारणों से हो सकता है। उम्र बढ़ना एक कारण है, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है।

  • बढ़ता वजन: शरीर का अतिरिक्त वजन घुटनों पर दबाव बढ़ाता है।

  • शारीरिक गतिविधि की कमी: मांसपेशियां कमजोर होने से जोड़ों को मिलने वाला सहारा कम हो सकता है।

  • लंबे समय तक बैठना: लगातार एक ही स्थिति में रहने से अकड़न महसूस हो सकती है।

  • पुरानी चोट: खेल या दुर्घटना में लगी चोट बाद में जोड़ों की समस्या बढ़ा सकती है।

  • गठिया: ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों के कारण दर्द हो सकता है।

  • अन्य स्वास्थ्य समस्याएं: कुछ मामलों में यूरिक एसिड से जुड़ी गाउट जैसी बीमारी भी दर्द और सूजन का कारण बनती है।

कम उम्र में घुटनों का दर्द होने पर उसे केवल उम्र, कैल्शियम की कमी या चिकनाई की कमी से जोड़ना उचित नहीं है। लगातार दर्द रहने पर कारण की जांच जरूरी है।

7. गोंद के लड्डू खाने से क्या फायदे मिल सकते हैं?

पारंपरिक गोंद के लड्डुओं में आमतौर पर खाने वाला गोंद, गेहूं का आटा, घी, मेवे और चीनी या गुड़ शामिल होते हैं। सामग्री के अनुसार इनके पोषण में अंतर होता है।

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खाने वाला गोंद

कुछ प्रकार के गोंद में कार्बोहाइड्रेट और रेशेदार घटक होते हैं। अलग-अलग गोंद की संरचना अलग हो सकती है।

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बादाम, काजू और दूसरे मेवे

ये वसा, प्रोटीन और कई सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। इनकी मात्रा और विविधता के अनुसार पोषण बदलता है।

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आटा और घी

ये ऊर्जा देते हैं। कम वजन या अधिक ऊर्जा की जरूरत वाले लोगों के आहार में इनका उपयोग हो सकता है, लेकिन अधिक मात्रा से कैलोरी सेवन बढ़ सकता है।

इस तरह गोंद के लड्डू संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, इनसे हड्डियां निश्चित रूप से मजबूत होती हैं, जोड़ों की चिकनाई बढ़ती है या घिसा हुआ कार्टिलेज फिर बनता है—ऐसे दावों की पुष्टि के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं।

8. बुजुर्ग कितने लड्डू खाएं? किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?

गोंद के लड्डुओं की कोई प्रमाणित चिकित्सकीय खुराक नहीं है। इन्हें दवा की तरह रोजाना निश्चित संख्या में खाने की सलाह देना उचित नहीं होगा।

  • मधुमेह वाले लोग चीनी या गुड़ की मात्रा और कुल कार्बोहाइड्रेट का ध्यान रखें।

  • वजन अधिक होने या वजन घटाने की जरूरत होने पर छोटे हिस्से में खाएं।

  • हृदय रोग या रक्त में वसा बढ़ने की समस्या वाले लोग घी और मेवों की मात्रा पर ध्यान दें।

  • किडनी की बीमारी में आहार संबंधी पाबंदियां हों तो डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।

  • किसी भी तरह के गोंद से एलर्जी या पेट संबंधी परेशानी हो तो उसका सेवन न करें।

जोड़ों के पुराने दर्द में नियमित हल्का व्यायाम, मांसपेशियों को मजबूत करने वाले अभ्यास और जरूरत पड़ने पर वजन कम करना अधिक प्रमाणित उपाय हैं। डॉक्टर की सलाह से उपचार लेना भी जरूरी है।

यदि घुटना अचानक बहुत सूज जाए, लाल या गर्म हो, तेज दर्द हो अथवा बुखार के साथ दर्द हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

9. घर पर गोंद के लड्डू बनाने की विधि

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यह पारंपरिक पौष्टिक लड्डू बनाने की सामान्य विधि है। इसमें खाने योग्य खाद्य गोंद का इस्तेमाल करें, औद्योगिक या सजावटी गोंद का नहीं।

बनाने का तरीका

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चरण 1: गोंद तलें

कड़ाही में थोड़ा घी गर्म करें। गोंद को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालकर धीमी से मध्यम आंच पर तलें। फूलने और कुरकुरा होने पर निकाल लें। ठंडा होने पर दरदरा कूट लें।

 

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चरण 2: आटा भूनें

उसी कड़ाही में बचा हुआ घी डालें। गेहूं के आटे को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए सुनहरा और खुशबूदार होने तक भूनें।

 

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चरण 3: मेवे तैयार करें

बादाम, काजू और मखाने को छोटे टुकड़ों में काट लें। चाहें तो इन्हें हल्का भून लें।

 

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चरण 4: सभी सामग्री मिलाएं

भुने आटे में कुटा हुआ गोंद, मेवे और इलायची मिलाएं। मिश्रण थोड़ा ठंडा होने पर पिसी चीनी या बारीक किया हुआ गुड़ मिलाएं। बहुत गर्म मिश्रण में चीनी डालने से बचें।

 

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चरण 5: लड्डू बांधें

मिश्रण हल्का गर्म रहते हुए हाथों से छोटे-छोटे लड्डू बना लें। ठंडा होने पर इन्हें साफ, सूखे और वायुरोधी डिब्बे में रखें।

लड्डू बनाते समय ध्यान रखें

  • गोंद को सही तरह से फूलने और कुरकुरा होने तक तलें।

  • घी की मात्रा जरूरत से ज्यादा न रखें।

  • मधुमेह वाले लोगों के लिए चीनी या गुड़ कम करने पर भी कुल कार्बोहाइड्रेट का ध्यान रखना जरूरी है।

  • लड्डुओं को छोटे आकार में बनाएं ताकि मात्रा नियंत्रित रखना आसान हो।

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