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राहुल गांधी के धरने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीजेआई बोले……..जानिए पूरा मामला

एसआईआर विवाद में राहुल समेत 13 नेताओं को राहत की उम्मीद, चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस;

सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दाखिल याचिका पर गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को अहम सुनवाई हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख होने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी न्यायपालिका को धौंस दिखाकर या दबाव बनाकर प्रभावित नहीं कर सकता। अदालत की इस टिप्पणी के बाद एसआईआर विवाद और विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

राहुल गांधी के धरने का जिक्र होने पर क्या बोले सीजेआई?

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन तथा सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का उल्लेख किया। उन्होंने अदालत में कहा कि करीब 200 वकीलों ने कथित तौर पर न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इन घटनाओं से अनजान नहीं है और वह ‘हाथीदांत की मीनार’ में बैठकर काम नहीं कर रही है। उनका आशय था कि न्यायपालिका बाहर हो रही घटनाओं और सार्वजनिक बयानों से पूरी तरह अनभिज्ञ नहीं है।

सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाला जा सकता। अदालत में उठाए गए सवालों और टिप्पणियों के बीच एक याचिकाकर्ता के आचरण पर भी आपत्ति जताई गई। सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछा जाएगा।

हालांकि, अदालत की टिप्पणी को याचिका के अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। एसआईआर की वैधता और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय सुनवाई तथा संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही होगा।

क्या है एसआईआर विवाद?

एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की विस्तृत जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। इस प्रक्रिया के तहत पात्र मतदाताओं की जानकारी की जांच की जाती है और नियमानुसार नाम जोड़े या हटाए जा सकते हैं।

विवाद तब खड़ा होता है जब किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने, दस्तावेजों की जांच करने या पात्रता निर्धारित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका है। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

याचिका में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और क्या संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जा रहा है।

राहुल गांधी समेत किन 13 नेताओं ने दाखिल की याचिका?

इस मामले में राहुल गांधी के साथ कई प्रमुख विपक्षी नेता याचिकाकर्ता हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत शामिल हैं।

याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। शुरुआती प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर को इसे पंजीकृत किया।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के दौरान नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करना जरूरी है। उनका जोर इस बात पर है कि पात्र मतदाताओं के नाम बिना उचित प्रक्रिया अपनाए नहीं हटाए जाने चाहिए।

याचिका में चुनाव आयोग से क्या मांग की गई है?

याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित 2023 के कानून तथा टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप है या नहीं।

याचिका में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  • किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए।
  • मतदाता को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का उचित अवसर मिले।
  • हटाए गए मतदाताओं की सूची बूथ-वार प्रकाशित की जाए।
  • नाम हटाने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
  • चुनाव आयोग की कार्रवाई की संवैधानिक वैधता की जांच की जाए।

इन मांगों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर किसी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए।

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को क्यों भेजा गया नोटिस?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी से जवाब मांगा है।

नोटिस जारी होने का अर्थ है कि अदालत ने संबंधित पक्षों से याचिका में उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष रखने को कहा है। इसे विपक्षी नेताओं के सभी आरोपों पर अदालत की मुहर या याचिका की अंतिम जीत नहीं माना जा सकता।

अब संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई करेगी। इस दौरान यह देखा जा सकता है कि एसआईआर की प्रक्रिया में अपनाए गए नियम और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रावधान पर्याप्त हैं या नहीं।

ओवैसी की याचिका और अन्य मामलों पर भी सुनवाई

सुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी सहित अन्य नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं का भी उल्लेख हुआ। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए और समान प्रकार की राहत मांगने वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।

इस कदम का उद्देश्य एक जैसे कानूनी सवालों पर अलग-अलग कार्यवाही से बचना और संबंधित मामलों पर समन्वित तरीके से सुनवाई करना है। इससे एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती देने वाले विभिन्न पक्षों के तर्क एक ही व्यापक न्यायिक कार्यवाही में सामने आ सकते हैं।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। अदालत को यह देखना होगा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया लागू नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।

इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े निर्णयों का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से होता है।

फिलहाल, अदालत ने जवाब मांगा है और याचिका पर अंतिम फैसला आना बाकी है। आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की मांगों पर अदालत क्या रुख अपनाती है।

निष्कर्ष: राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की एसआईआर संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी बहस का अहम पड़ाव है। वहीं, सीजेआई सूर्यकांत की न्यायपालिका पर दबाव न डालने संबंधी टिप्पणी ने सुनवाई को और चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें चुनाव आयोग के जवाब और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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