
सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत से फिर चर्चा में आया निठारी कांड, कुछ महीने पहले ही जेल से निकला था बाहर
देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल निठारी कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में लंबे समय तक आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार, 18 सितंबर को हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार उसका शव सप्त सरोवर रोड के पास एक चाय की दुकान में फंदे पर लटका मिला। प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत की पूरी तस्वीर साफ होगी। मौके से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
चाय की दुकान में मिला शव
जानकारी के मुताबिक हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में पुलिस को चाय की दुकान के अंदर एक व्यक्ति के फंदे पर लटके होने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर उसकी पहचान कराई। इसके बाद मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के तौर पर हुई।
पुलिस ने उसके अल्मोड़ा निवासी परिजनों को सूचना दे दी है। घटनास्थल की जांच के साथ शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस फिलहाल मौत की परिस्थितियों और उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
हरिद्वार में बदल ली थी जिंदगी
रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। रिपोर्टों के अनुसार उसने वहां चाय की दुकान किराये पर ली थी और इसी से अपना गुजारा कर रहा था। निठारी मामले की वजह से लंबे समय तक सुर्खियों में रहने के बाद वह काफी हद तक गुमनाम जिंदगी जी रहा था।
कभी मिली थी फांसी की सजा, फिर बदल गई पूरी कहानी
निठारी कांड का खुलासा वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी इलाके में हुआ था। कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले से बच्चों के कंकाल और मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। सुरेंद्र कोली पर कई बच्चों और महिलाओं के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे।
मामले की जांच के बाद कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया और अलग-अलग मामलों में उसे मृत्युदंड तक सुनाया गया। हालांकि बाद की न्यायिक प्रक्रिया में अभियोजन की कहानी और जांच के तरीकों पर गंभीर सवाल उठे।
अदालतों में सुनवाई के दौरान स्वीकारोक्ति, बरामदगी और जांच से जुड़े साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल सामने आए। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े कई मामलों में कोली को बरी कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में भी उसकी दोषसिद्धियों को चुनौती मिली और 2025 में अंतिम मामले में भी उसे राहत मिली। इसके बाद वह जेल से बाहर आ गया था।
19 साल जेल में रहने के बाद मिली थी आजादी
सुरेंद्र कोली करीब 19 साल जेल में रहा। नवंबर 2025 में अंतिम मामले में राहत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आया था। इसके बाद उसने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी और बाद में हरिद्वार में रहने लगा।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद पुलिस के सामने कई सवाल हैं। क्या यह आत्महत्या थी या मौत की कोई दूसरी वजह थी? घटनास्थल से सुसाइड नोट क्यों नहीं मिला? हरिद्वार में उसकी जिंदगी कैसी चल रही थी और मौत से पहले उसकी किसी से बातचीत हुई थी या नहीं—इन तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस की शुरुआती जांच आत्महत्या की ओर इशारा कर रही है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।












