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पेट्रोल पंप पर अब बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल? जानें कब से लागू होगा नया सिस्टम

गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म तो पेट्रोल-डीजल भी रुक सकता है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा नया पायलट प्रोजेक्ट

अगर आप कार, बाइक या स्कूटर चलाते हैं तो आपके लिए इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर बेहद अहम है। सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें वाहन के वैध इंश्योरेंस स्टेटस को पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से जोड़ा जा सकता है। यानी भविष्य में जिस वाहन का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वैध नहीं होगा, उसे पेट्रोल या डीजल देने से इनकार किया जा सकता है।

अभी पूरे देश में लागू नहीं हुआ नियम
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 18 सितंबर 2026 तक “नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल” व्यवस्था देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर लागू नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को केंद्र, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को इसका पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा था। इसलिए अभी इसकी देशव्यापी शुरुआत की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है।

दिल्ली से शुरू हो सकता है ट्रायल
प्रस्तावित व्यवस्था को पहले सीमित स्तर पर लागू करके देखा जाएगा। दिल्ली समेत कुछ क्षेत्रों में पायलट के जरिए यह जांच की जा सकती है कि पेट्रोल पंप पर वाहन की नंबर प्लेट और इंश्योरेंस रिकॉर्ड को किस तरह जोड़ा जाए। सिस्टम सफल रहने पर इसे आगे दूसरे शहरों और राज्यों तक बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल सरकार और संबंधित एजेंसियों को इसकी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करनी है।

पेट्रोल पंप पर कैमरा कैसे करेगा काम?
नई व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी एएनपीआर कैमरों की अहम भूमिका होगी। वाहन जैसे ही पेट्रोल पंप पर पहुंचेगा, कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर सकता है। इसके बाद नंबर प्लेट के आधार पर वाहन की जानकारी संबंधित वाहन और बीमा डेटाबेस से मिलाई जाएगी। अगर रिकॉर्ड में वैध अनिवार्य बीमा नहीं मिलता है, तो प्रस्तावित सिस्टम ईंधन देने की प्रक्रिया रोक सकता है।

सिर्फ पेट्रोल पंप ही नहीं, सड़क पर भी होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियमों के पालन के लिए कई स्तरों पर डिजिटल निगरानी की बात कही है। एएनपीआर कैमरों को वाहन और बीमा डेटाबेस से जोड़कर बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान तथा ई-चालान की व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को ऐसे मोबाइल एप या उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है, जिनसे सड़क पर वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस तुरंत जांचा जा सके।

देश में इतने वाहन बिना इंश्योरेंस के क्यों?
सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 56 प्रतिशत वाहन वैध इंश्योरेंस के बिना चल रहे हैं। रिपोर्ट में लगभग 16.54 करोड़ वाहनों के बिना बीमा होने का आंकड़ा सामने आया। ऐसे वाहनों से दुर्घटना होने पर पीड़ितों को मुआवजा हासिल करने में मुश्किलें आ सकती हैं। इसी वजह से कोर्ट ने बीमा कानून के पालन को मजबूत करने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था पर जोर दिया है।

नई कार और बाइक खरीदने वालों के लिए भी बड़ा बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि भी बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब नई कार के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए दोपहिया वाहन के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने आईआरडीएआई को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है।

कब से मिलेगा पेट्रोल और कब रुक सकता है?
अभी ऐसा नहीं है कि कल से देश के हर पेट्रोल पंप पर इंश्योरेंस चेक होने लगेगा। पहले पायलट प्रोजेक्ट तैयार होगा, तकनीकी व्यवस्था विकसित होगी और सीमित स्तर पर इसकी जांच होगी। इसके बाद सरकार और संबंधित नियामक यह तय करेंगे कि व्यवस्था को किस क्षेत्र में और किस तरीके से लागू किया जाए। इसलिए फिलहाल “नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल” की पूरे देश में लागू होने की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

इंश्योरेंस खत्म है तो अभी क्या करें?
वाहन मालिकों को अपने वाहन का वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूर बनाए रखना चाहिए, क्योंकि मोटर वाहन कानून के तहत सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाने के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है। प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद बीमा की वैधता की जांच पेट्रोल पंप और सड़क दोनों जगह तकनीक के जरिए हो सकती है।

क्यों लाया जा रहा है यह सिस्टम?
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान करना और अनिवार्य मोटर थर्ड-पार्टी बीमा के नियम का पालन सुनिश्चित करना है। कोर्ट के निर्देशों में पेट्रोल पंप, एएनपीआर कैमरे, वाहन डेटाबेस और पुलिस जांच को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा दिखाई गई है।

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