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टेलीग्राम के मालिक की जिंदगी भी कम रहस्यमयी नहीं, WhatsApp पर बड़ा हमला… जानिए पावेल दुरोव का पूरा विवाद

पावेल दुरोव फिर चर्चा में, WhatsApp की प्राइवेसी से लेकर फ्रांस के केस तक क्यों घिरे रहे Telegram के संस्थापक?

टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल दुरोव टेक्नोलॉजी की दुनिया के उन चेहरों में शामिल हैं, जिनकी पहचान सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप बनाने वाले कारोबारी के तौर पर नहीं, बल्कि उनकी बेहद अलग जीवनशैली और विवादित बयानों के कारण भी होती है। दुरोव लंबे समय से इंटरनेट की निजता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी निगरानी के खिलाफ अपनी सार्वजनिक राय रखते रहे हैं। लेकिन यही रवैया उन्हें कई बार विवादों के बीच भी ले आया है।

हाल के वर्षों में दुरोव और Telegram को लेकर सबसे बड़ा विवाद फ्रांस में सामने आया, जहां अगस्त 2024 में उन्हें पेरिस के पास ले बॉुर्जे एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। फ्रांसीसी जांच में Telegram पर कथित आपराधिक गतिविधियों को रोकने और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। दुरोव पर 12 आरोपों के तहत जांच शुरू हुई थी, जिनमें अवैध लेनदेन, नशीले पदार्थों की तस्करी, बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री और संगठित अपराध से जुड़े आरोप शामिल थे।

फ्रांस की अदालत ने बाद में उन्हें न्यायिक निगरानी में रिहा किया। उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं थी और 50 लाख यूरो की जमानत राशि भी तय की गई थी। इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया कि किसी सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उसके यूजर्स की गतिविधियों के लिए कंपनी के प्रमुख की कानूनी जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए।

WhatsApp पर दुरोव का बड़ा हमला

पावेल दुरोव सिर्फ सरकारी एजेंसियों से विवाद को लेकर ही चर्चा में नहीं रहे। अप्रैल 2026 में उन्होंने WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोरदार हमला किया। दुरोव ने दावा किया कि WhatsApp के करीब 95 प्रतिशत निजी संदेश आखिरकार Apple या Google के सर्वरों पर ऐसे बैकअप के रूप में पहुंच सकते हैं, जिन पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू नहीं होता। उन्होंने WhatsApp की एन्क्रिप्शन व्यवस्था को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी भी की।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। WhatsApp के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार व्यक्तिगत संदेश और कॉल डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं। WhatsApp अपने चैट बैकअप के लिए अलग से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का विकल्प भी देता है। कंपनी के मुताबिक इसे पासवर्ड, 64 अंकों की एन्क्रिप्शन कुंजी या पासकी के जरिए सुरक्षित किया जा सकता है।

यानी दुरोव का निशाना मुख्य रूप से क्लाउड बैकअप की सुरक्षा और उसे इस्तेमाल करने की आदत पर था, जबकि WhatsApp की आधिकारिक स्थिति यह है कि उसके निजी संदेश और कॉल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और यूजर के पास अपने बैकअप को भी एन्क्रिप्ट करने का विकल्प मौजूद है।

आखिर कैसी जिंदगी जीते हैं पावेल दुरोव?

दुरोव की निजी जिंदगी भी उन्हें दूसरे टेक अरबपतियों से अलग बनाती है। वह सोशल मीडिया पर खुद को बेहद फिट रखने वाली और अपेक्षाकृत सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए पेश करते रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में उनकी डाइट, फिटनेस और कम भौतिक जरूरतों वाली जीवनशैली का कई बार जिक्र हुआ है।

वह अक्सर अपनी तस्वीरों में फिटनेस और शारीरिक अनुशासन को प्रदर्शित करते रहे हैं। यही वजह है कि टेक्नोलॉजी की खबरों के साथ-साथ उनकी निजी जीवनशैली भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनती रही है।

दुरोव ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक और बड़ा खुलासा तब किया था, जब उन्होंने बताया कि वह स्पर्म डोनर रहे हैं और उनके 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं। इस बयान ने भी दुनियाभर में काफी चर्चा बटोरी थी।

रूस छोड़ने से लेकर Telegram तक का सफर

दुरोव का विवादों से रिश्ता Telegram से पहले ही शुरू हो चुका था। उन्होंने रूस में सोशल नेटवर्क VKontakte की स्थापना की थी। 2014 में रूसी अधिकारियों के साथ टकराव के बाद उन्होंने रूस छोड़ दिया। दुरोव के अनुसार उन पर कुछ राजनीतिक समूहों से जुड़े खातों के संबंध में कार्रवाई करने का दबाव था, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया। बाद में उन्होंने VK में अपनी हिस्सेदारी बेच दी और Telegram पर ध्यान केंद्रित किया।

2013 में अपने भाई निकोलाई दुरोव के साथ Telegram शुरू करने के बाद उन्होंने इसे प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर केंद्रित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में आगे बढ़ाया। दुरोव की सोच यह रही है कि इंटरनेट पर लोगों की निजी बातचीत में सरकारों या कंपनियों का दखल सीमित होना चाहिए।

Telegram की सबसे बड़ी ताकत ही बनी विवाद की वजह

Telegram की पहचान उसकी प्राइवेसी और अपेक्षाकृत कम मॉडरेशन वाली नीति से बनी। लेकिन यही नीति फ्रांस समेत कई देशों की जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी। फ्रांसीसी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि Telegram पर आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए और जांच एजेंसियों के अनुरोधों के साथ पर्याप्त सहयोग नहीं किया गया।

दूसरी तरफ दुरोव और Telegram ने यह रुख रखा कि प्लेटफॉर्म को उसके यूजर्स की हर गतिविधि के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है और कंपनी कानूनों का पालन करती है। इस विवाद ने दुनिया भर में प्राइवेसी बनाम सरकारी निगरानी और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर बहस को तेज किया।

Telegram और WhatsApp की लड़ाई सिर्फ फीचर की नहीं

Telegram और WhatsApp की प्रतिस्पर्धा केवल यूजर्स और फीचर्स तक सीमित नहीं है। दोनों प्लेटफॉर्म प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर अलग-अलग तरीके से अपनी पहचान बनाते हैं। दुरोव लगातार WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि WhatsApp अपनी आधिकारिक जानकारी में डिफॉल्ट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और एन्क्रिप्टेड बैकअप जैसे सुरक्षा विकल्पों पर जोर देता है।

यही वजह है कि पावेल दुरोव से जुड़ी कोई भी नई टिप्पणी तुरंत टेक्नोलॉजी की खबर बन जाती है। एक तरफ वह Telegram को निजता और स्वतंत्रता का प्लेटफॉर्म बताते हैं, तो दूसरी तरफ उनकी कंपनी खुद फ्रांस में मॉडरेशन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग को लेकर कानूनी विवाद झेल चुकी है।

दुरोव की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि इसमें टेक्नोलॉजी, अरबों डॉलर का कारोबार, बेहद निजी जीवनशैली, सरकारी एजेंसियों से टकराव, सोशल मीडिया की स्वतंत्रता और प्राइवेसी जैसे कई मुद्दे एक साथ दिखाई देते हैं। यही कारण है कि Telegram के संस्थापक पावेल दुरोव का नाम अक्सर किसी नए फीचर से ज्यादा किसी बड़े विवाद या बयान के साथ सुर्खियों में आ जाता है।

 

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