नरसू घर जाना चाहता था, छुट्टी नहीं मिली और सुबह मौत की खबर आई!जानिए पूरा मामला

बीजापुर। नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीद लेकर पुनर्वास केंद्र पहुंचे 26 वर्षीय नरसू बोड्डू उर्फ नैती की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे नरसू का शव 21 अक्टूबर की सुबह परिसर के शौचालय में फंदे से लटका मिला। पुलिस शुरुआती तौर पर आत्महत्या की आशंका के आधार पर जांच कर रही है, लेकिन परिवार ने इस पर सवाल उठाते हुए हत्या की आशंका जताई है। घटना से एक रात पहले ही नरसू की अपने भाई से फोन पर बात हुई थी। परिवार के मुताबिक, वह घर लौटने को लेकर उत्साहित था।
कौन था नरसू बोड्डू?
नरसू बोड्डू उर्फ नैती बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के कमकानार गांव का निवासी था। उसकी उम्र 26 वर्ष थी। उपलब्ध खबरों के अनुसार, उसने 27 फरवरी 2025 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उसे पुनर्वास प्रक्रिया से जोड़ा गया। वह 23 जुलाई 2026 से बीजापुर स्थित पुनर्वास केंद्र में रहकर आजीविका से जुड़ा प्रशिक्षण ले रहा था। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आत्मसमर्पण कर चुके लोगों को नई जिंदगी शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना था।
घर लौटने की उम्मीद में था नरसू
इस मामले में परिवार की ओर से सामने आई जानकारी सबसे ज्यादा सवाल खड़े करती है। नरसू के भाई सतीश कुमार बोड्डू के मुताबिक, नरसू को जल्द ही केंद्र से छुट्टी मिलने की उम्मीद थी और वह घर लौटने को लेकर खुश था। परिवार का कहना है कि उसने पहले भी आत्मसमर्पण के बाद घर वापसी की थी, लेकिन बाद में प्रशिक्षण के लिए उसे पुनर्वास केंद्र बुलाया गया था।
भाई के अनुसार, 20 अक्टूबर की रात करीब 9 बजकर 9 मिनट पर उसकी नरसू से फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान नरसू ने घर-परिवार और बच्चों का हाल पूछा। उसने अगली सुबह फिर बात करने की बात भी कही थी। परिवार का कहना है कि बातचीत में ऐसी कोई बात महसूस नहीं हुई, जिससे किसी अनहोनी का अंदेशा होता।
अगली सुबह आई मौत की खबर
21 अक्टूबर की सुबह पुनर्वास केंद्र में नरसू की मौत की सूचना मिली। उसका शव परिसर के शौचालय में फंदे से लटका पाया गया। घटना की जानकारी मिलने पर बीजापुर पुलिस और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पुलिस ने मामले में मर्ग दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी में आत्महत्या की आशंका जताई गई, लेकिन मौत के पीछे की परिस्थितियों और कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
परिवार ने जताई हत्या की आशंका
नरसू की मौत के बाद उसके परिजनों ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। भाई सतीश कुमार बोड्डू ने आत्महत्या की आशंका पर अविश्वास जताते हुए हत्या की आशंका व्यक्त की है। परिवार का कहना है कि नरसू घर लौटने की उम्मीद कर रहा था और घटना से एक रात पहले उसकी बातचीत भी सामान्य थी।
हालांकि, परिवार की आशंका और पुलिस की शुरुआती जांच के बीच अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि नरसू की हत्या हुई थी या उसे छुट्टी नहीं मिलने के कारण ही उसकी मौत हुई। इन बातों की पुष्टि जांच से ही हो सकती है।
पुनर्वास केंद्र की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
नरसू की मौत ने आत्मसमर्पण करने वाले लोगों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। सरकार की पुनर्वास व्यवस्था का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना, उन्हें कौशल प्रशिक्षण देना और रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है।
ऐसे में पुनर्वास केंद्र में रह रहे किसी व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर यह जानना जरूरी है कि घटना किन हालात में हुई, केंद्र में निगरानी की क्या व्यवस्था थी और संबंधित व्यक्ति की मानसिक एवं सामाजिक स्थिति कैसी थी। इन सवालों का जवाब जांच के निष्कर्षों और संबंधित अधिकारियों की जानकारी से ही मिल सकेगा।
पुलिस जांच में सामने आएगा मौत का सच
फिलहाल नरसू की मौत के मामले में पुलिस जांच जारी है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मौत के वास्तविक कारण और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की पुष्टि जांच रिपोर्ट से होनी बाकी है।
नरसू की मौत के बाद परिवार के मन में कई सवाल हैं। एक ओर परिवार का कहना है कि वह घर लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था, वहीं दूसरी ओर पुलिस को यह पता लगाना है कि पुनर्वास केंद्र में आखिर ऐसा क्या हुआ कि 26 वर्षीय युवक की जान चली गई।
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि नरसू की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।












